Fish Farming Tips: झारखंड के कुचाई प्रखंड स्थित जिलिंगदा गांव में एक तालाब ने न केवल परंपराओं को जीवित रखा है. बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदल दी है. ग्रामीण जिसे प्यार से बड़ा तालाब कहते हैं. वह आज मत्स्य पालन के जरिए समृद्धि का आधार बन चुका है. तालाब के संचालक महेश मिंज ने इस पारंपरिक जल स्रोत को मुनाफे के बिजनेस में बदल दिया है. वे यहां रूई, कतला और झींगा मछली का पालन कर रहे हैं. मात्र ₹40000 की शुरुआती लागत से वे सालाना ₹2.5 लाख तक की आमदनी कर रहे हैं. यह मॉडल अब जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है. यह तालाब सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का भी अनूठा उदाहरण है. यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग स्नान घाट और पशुओं के लिए सुरक्षित रेंप बने हैं. खेती के लिए जल निकासी के दो द्वार सिंचाई की समस्या को खत्म करते हैं, जिससे भीषण गर्मी में भी गांव के खेत लहलहाते रहते हैं. आस्था और आजीविका का यह संगम साबित करता है कि अगर जल स्रोतों का प्रबंधन सही हो, तो गांव का पैसा गांव में ही रहेगा.
Video: 40 हजार का निवेश, 2.5 लाख का रिटर्न! महेश मिंज की मछली पालन तकनीक ने सबको चौंकाया
2 hours ago
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