Last Updated:March 08, 2026, 09:33 IST
Barmer Women Success Story: बाड़मेर के ढूंढा गांव की 10 महिलाओं ने 'जीजी बाई स्वयं सहायता समूह' बनाकर बाजरे के कुकीज को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बना दिया है. केयर्न ऑयल एंड गैस की ट्रेनिंग के बाद ये महिलाएं बिना किसी प्रिजर्वेटिव के शुद्ध देशी घी और गुड़ से कुकीज तैयार कर रही हैं. आज इनके उत्पादों की मांग लंदन, अमेरिका और जापान तक है. अब तक ये महिलाएं 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी हैं और ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए वैश्विक ऑर्डर ले रही हैं.
Barmer Women Success Story: राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के एक छोटे से गांव ‘आदर्श ढूंढा’ की महिलाओं ने वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना शायद कुछ साल पहले किसी ने नहीं की थी. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन महिलाओं की सफलता की कहानी पूरे देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है. कभी घर की चारदीवारी और रसोई के चूल्हे तक सीमित रहने वाली इन ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर थार के पारंपरिक अनाज ‘बाजरे’ को एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड में तब्दील कर दिया है. आज इनके द्वारा तैयार किए गए बाजरे के कुकीज (Biscuits) की खुशबू केवल बाड़मेर या राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन, अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच चुकी है.
इस सफलता की नींव तब रखी गई जब गांव की 10 महिलाओं—हेमलता, धुड़ी, पुष्पा, लक्ष्मी, मीरा, कमला, निरमा, संगीता, सुशीला और प्रिया—ने मिलकर “जीजी बाई स्वयं सहायता समूह” का गठन किया. शुरुआत में इन महिलाओं के पास न तो आधुनिक ओवन था, न मिक्सर मशीन और न ही बाजार की समझ. लेकिन 16 मई 2024 को ‘केयर्न ऑयल एंड गैस’ के ‘बाड़मेर उन्नति प्रोजेक्ट’ ने इनके सपनों को पंख दिए. महिलाओं को मात्र तीन दिन की विशेष ट्रेनिंग दी गई, जिसमें उन्हें बेकिंग, फूड प्रोसेसिंग, हाइजीन (स्वच्छता), और आकर्षक पैकेजिंग के गुर सिखाए गए. ग्रामीण परिवेश की इन महिलाओं ने तकनीक को इतनी जल्दी अपनाया कि आज वे क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए पूरी दुनिया से ऑर्डर ले रही हैं.
शुद्धता और सेहत का बेजोड़ संगम
इन कुकीज की सबसे बड़ी खासियत इनकी शुद्धता और पौष्टिकता है. ये पूरी तरह से ‘ग्लूटेन-फ्री’ हैं, जो आजकल के हेल्थ कॉन्शियस दौर में अंतरराष्ट्रीय बाजार की पहली पसंद बन चुके हैं. महिलाएं इन कुकीज को तैयार करने में घर के शुद्ध देशी घी, गुड़, इलायची, जीरा और सूखे मेवों का इस्तेमाल करती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग (Artificial Color) या प्रिजर्वेटिव का उपयोग नहीं किया जाता है. यही वजह है कि पश्चिमी देशों में, जहाँ लोग हेल्दी स्नैक्स की तलाश में रहते हैं, बाड़मेर के इन बाजरा कुकीज की मांग तेजी से बढ़ी है. महज दो साल के भीतर इस समूह ने 300 किलो से ज्यादा कुकीज बेचकर 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर ली है, जो इन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है.
डिजिटल क्रांति और वैश्विक पहचान
आज ‘जीजी बाई समूह’ की पहुंच लंदन के प्रीमियम कैफे से लेकर अमेरिका और जापान के सुपरमार्केट्स तक हो गई है. हाई-टेक क्यूआर कोड पैकेजिंग ने इनके व्यापार को वैश्विक स्तर पर जोड़ दिया है. समूह की सदस्य हेमलता और धूड़ी बड़े गर्व से बताती हैं कि अगर सही अवसर और प्रशिक्षण मिल जाए, तो गांव की साधारण महिलाएं भी दुनिया के किसी भी बाजार में अपनी जगह बना सकती हैं. महिला दिवस पर बाड़मेर की ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं, बल्कि राजस्थान के मोटे अनाज (Millets) को ‘श्री अन्न’ के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. इनका सफर यह साबित करता है कि हुनर को अगर सही दिशा मिल जाए, तो रेगिस्तान की मिट्टी से भी सोना उपजाया जा सकता है.
About the Author
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content...और पढ़ें
Location :
Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
March 08, 2026, 09:33 IST

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