Last Updated:February 24, 2026, 12:08 IST
CJI Suryakant News : पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में बंगाल में जजों की कमी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा-झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को मंजूरी दी. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया.

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी मंगलवार को सुनवाई हुई. बंगाल में जजों की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल के अनुभव वाले न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने की अनुमति दे दी. हाईकोर्ट ने दलील दी थी कि बंगाल के जजों से ही होगा तो 80 दिन लगेंगे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि कलकत्ता हाईकोर्ट पश्चिम बंगाल में एसआईआर यानी वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को तेजी से पूरा करने के लिए कम से कम तीन साल के अनुभव वाले सिविल जजों को भी तैनात कर सकता है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने यह फैसला लिया.
सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच से कहा कि तार्किक विसंगति और अवर्गीकृत श्रेणी के अंतर्गत रखे गए मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए 294 सेवारत और सेवानिवृत्त न्यायिक जजों को तैनात करने के बावजूद ऐसे 50 लाख मामलों की जांच में 80 दिन लगेंगे. इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल के अनुभव वाले न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने की अनुमति दी.
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कलकत्ता HC के चीफ जस्टिस को झारखंड और उड़ीसा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाकर जांच में तेजी लाने की स्वतंत्रता भी दी. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सत्यापित मतदाताओं के नामों वाली अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी.
सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा, ‘इस बात और समय की कमी को देखते हुए हमारा मानना है कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स का कैचमेंट एरिया बढ़ाने के लिए और क्लैरिफिकेशन की ज़रूरत है.’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उड़ीसा और झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से भी संपर्क कर सकते हैं ताकि इन दो पड़ोसी राज्यों से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की मदद ली जा सके.
कलकत्ता हाईकोर्ट को पूरी छूट
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने आदेश दिया, ‘अगर कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लगता है कि और ह्यूमन रिसोर्स की ज़रूरत है, तो वे पड़ोसी राज्यों – उड़ीसा और झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क कर सकते हैं ताकि उन राज्यों के मौजूदा और रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को उसी रैंक पर बुलाया जा सके, जिन्हें पश्चिम बंगाल में वेरिफिकेशन का काम पूरा करने का काम सौंपा जाएगा. ऐसे ऑफिसर्स के आने-जाने, रहने-खाने का खर्च भारत का चुनाव आयोग उठाएगा.’
इस बीच बेंच ने उन डॉक्यूमेंट्स पर भी क्लैरिफिकेशन जारी किया, जिन्हें क्लेम की प्रोसेसिंग के दौरान स्वीकार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, ‘इस कोर्ट का सितंबर 2025 का आदेश, जिसमें आधार को पहचान के सबूत के तौर पर मंज़ूरी दी गई थी और माध्यमिक एडमिट कार्ड और पासवर्ड सर्टिफिकेट से जुड़ी रिट पिटीशन पर इस कोर्ट का आदेश माना जाएगा. हम कहते हैं कि ऐसे सभी डॉक्यूमेंट्स, चाहे वे इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपडेट किए गए हों या 14 फरवरी 2026 से पहले फिजिकली सौंपे गए हों, उन पर विचार किया जाएगा.’
सुप्रीम कोर्ट में आज क्या-क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में बंगाल के जजों से ही होगा तो 80 दिन लगेंगे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा और झारखंड के जजों की तैनाती को दी अनुमति. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में लंबित कार्यों के मद्देनज़र बड़ा फैसला देते हुए ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की अनुमति दे दी. अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि काम केवल बंगाल के न्यायाधीशों के भरोसे छोड़ा गया, तो प्रक्रिया पूरी होने में करीब 80 दिन लग सकते हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि समयबद्ध तरीके से दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की जरूरत है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बाहरी राज्यों के जजों की नियुक्ति उचित कदम है.About the Author
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें
First Published :
February 24, 2026, 12:08 IST

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