अब अंतरिक्ष में भी भारत का 'बॉडीगार्ड', खतरे के बीच सैटेलाइट्स का सुरक्षा कवच वाला प्लान समझिए

1 hour ago

Last Updated:March 05, 2026, 16:36 IST

भारत अपने महत्वपूर्ण सैटेलाइट्स की सुरक्षा के लिए ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट’ तैनात करने की योजना बना रहा है. जानिए अंतरिक्ष में बढ़ते खतरों, चीन-पाकिस्तान की भूमिका और भारत की नई स्पेस सुरक्षा रणनीति के बारे में. 

अब अंतरिक्ष में भी भारत का 'बॉडीगार्ड', खतरे के बीच सैटेलाइट्स का सुरक्षा कवच Zoom

अंतरिक्ष में भारतीय सैटेलाइट्स

भारत अब अंतरिक्ष में अपने महत्वपूर्ण सैटेलाइट्स की सुरक्षा के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रहा है. इसके तहत देश ऐसे खास ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट’ तैनात करने की योजना बना रहा है जो भारत के प्रमुख उपग्रहों को अंतरिक्ष में संभावित खतरों से बचाएंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने निजी स्टार्टअप कंपनियों से इस तरह के विशेष सैटेलाइट विकसित करने को कहा है. इनका काम भारत के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष यानों के साथ रहकर उनकी निगरानी करना और खतरा होने पर उन्हें सुरक्षित रखना होगा.

सरकारी एजेंसियों और स्टार्टअप्स के बीच इस परियोजना को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. कंपनियां इस साल की पहली छमाही में पहला परीक्षण सैटेलाइट लॉन्च करने का लक्ष्य रख रही हैं. यदि परीक्षण सफल रहा तो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक कई और ऐसे सैटेलाइट लॉन्च किए जा सकते हैं. इसके बाद सरकार स्वयं इस कार्यक्रम को संभालते हुए बड़े पैमाने पर इन सुरक्षा सैटेलाइट्स का निर्माण करेगी.

क्यों पड़ी ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट’ की जरूरत? 
भारत के इस कदम के पीछे अंतरिक्ष में बढ़ते सुरक्षा खतरे बड़ी वजह माने जा रहे हैं. 2024 में एक ऐसी घटना हुई थी जब एक अज्ञात पड़ोसी देश का सैटेलाइट भारत के एक उपग्रह के बेहद करीब एक किलोमीटर दूरी तक पहुंच गया था. यह भारतीय सैटेलाइट जमीन की मैपिंग और निगरानी जैसे संभावित सैन्य कार्य कर रहा था.

इसके अलावा हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संक्षिप्त सैन्य तनाव के दौरान भी सैटेलाइट्स ने अहम भूमिका निभाई थी. दोनों देशों ने अपने लक्ष्यों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए अंतरिक्ष आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया.

रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट सहायता भी प्रदान की, जिससे इस्लामाबाद को अपने रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद मिली. इसी तरह की घटनाओं ने भारत को यह एहसास कराया कि अंतरिक्ष में मौजूद उसके महत्वपूर्ण सैटेलाइट्स को भी सुरक्षा की जरूरत है.

पूर्व सैन्य संचालन प्रमुख और भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट के मुताबिक, ‘सैटेलाइट्स को बाधित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. जो भी देश अंतरिक्ष क्षेत्र में गंभीर भूमिका निभाना चाहता है, उसे अपने संसाधनों की सुरक्षा के लिए तकनीकी क्षमताएं विकसित करनी होंगी.’

क्या करेंगे ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट’? 
भारतीय स्टार्टअप्स दो तरह के बॉडीगार्ड सैटेलाइट पर काम कर रहे हैं-

1. रोबोटिक आर्म वाला सैटेलाइट
इस प्रकार के सैटेलाइट में एक रोबोटिक आर्म होगी. यदि कोई संदिग्ध या खतरनाक सैटेलाइट भारत के किसी महत्वपूर्ण उपग्रह के पास आता है, तो यह रोबोटिक आर्म उसकी पकड़ बनाकर उसे वहां से दूर कर सकती है.

2. घेराबंदी करने वाला सैटेलाइट
दूसरी तरह का सैटेलाइट छोटे हमलावर उपग्रहों से निपटने के लिए बनाया जा रहा है. यह सैटेलाइट संदिग्ध वस्तु को चारों तरफ से घेरकर उसे भारत के सैटेलाइट्स से दूर धकेल देगा. इस तरह ये सैटेलाइट अंतरिक्ष में भारत के महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा के लिए एक तरह से ‘एस्कॉर्ट सिस्टम’ की तरह काम करेंगे.

चीन की बढ़त भी चिंता का कारण
अंतरिक्ष सुरक्षा के मामले में चीन की तेज प्रगति भी भारत की चिंता बढ़ा रही है. फिलहाल चीन के पास 1100 से ज्यादा सक्रिय सैटेलाइट हैं, जबकि भारत के पास लगभग 100 के आसपास सक्रिय सैटेलाइट हैं. चीन पहले से ही ऐसे सैटेलाइट्स पर प्रयोग कर रहा है जो दूसरे देशों के अंतरिक्ष यानों के पास जाकर उन्हें प्रभावित कर सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि चीन ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जो जरूरत पड़ने पर अन्य देशों के सैटेलाइट्स के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकती है.

क्या यही अंतरिक्ष सुरक्षा का भविष्य है? 
बॉडीगार्ड सैटेलाइट परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की व्यापक अंतरिक्ष सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है. भारत अपने स्पेस-बेस्ड सर्विलांस प्रोग्राम को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है. इसके तहत 50 से ज्यादा जासूसी सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है जो रात और खराब मौसम में भी उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ले सकेंगे. लंबी अवधि में भारत 150 तक नए सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रहा है, ताकि देश की सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा सके. इसके साथ ही भारत देश के भीतर और विदेशों में रणनीतिक स्थानों पर नई ग्राउंड स्टेशन सुविधाएं भी विकसित कर रहा है, जिससे विदेशी सैटेलाइट्स की निगरानी और डेटा ट्रांसफर तेज़ी से किया जा सके.

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ऐश्वर्य कुमार राय

ऐश्वर्य कुमार राय नेटवर्क 18 ग्रुप में जर्नलिस्ट हैं. वह यहां डेप्युटी न्यूज एडिटर के तौर पर देश और दुनिया के घटनाक्रमों पर विस्तृत रिपोर्ट्स कवर करते हैं. वह पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्स और र...और पढ़ें

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New Delhi,New Delhi,Delhi

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March 05, 2026, 16:36 IST

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