Last Updated:February 25, 2026, 09:17 IST
The Quad Without Washington Dr Brahma Chellaney opinion: सामरिक मामलों के जानेमाने विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे और क्वाड के साथ उनके संभावित लगाव को लेकर एक खूबसूरत विश्लेषण लिखा है. एक्स पर उन्होंने इसे 'Quad Without Washington' शीर्षक से पोस्ट लिखा है. इसमें उन्होंने समझाया है कि कैसे कनाडा अमेरिकी प्रभाव से निकलकर अपना एक स्वतंत्र पहचान बनाना चाहता है. लेकिन, क्या अमेरिका के बिना क्वाड की कोई अहमियत रह जाएगी? ये दोनों बातें बेहद अहम हैं.

The Quad Without Washington Dr Brahma Chellaney opinion: सामरिक मामलों के जाने-माने विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे का एक खूबसूरत विश्लेषण किया है. कार्नी गुरुवार से भारत के दौरे पर आ रहे हैं. पहले वह मुंबई आएंगे फिर वह दिल्ली पहुंचेंगे जहां पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मीटिंग होगी. भारत के साथ-साथ कार्नी ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे. ब्रह्मा चेलानी ने उनके इस दौरे को लेकर ‘क्वाड माइनस वाशिंगटन?’ शीर्षक से अपने एक्स पर एक पोस्ट लिखा है. उन्होंने लिखा है कि कार्नी का यह दौरा क्वाड माइनस वन रणनीति का सबसे व्यावहारिक रूप है. कार्नी ने अपने दौरे से जानबूझकर अमेरिका को बाहर रखा है.
ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि कार्नी का यह कदम कनाडा की अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है. कनाडा इस वक्त हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र ‘थर्ड पाथ’ की तलाश कर रहा है. क्वाड में अभी तक अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. यह समूह मुख्य रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए बनाया गया था. लेकिन, कार्नी का यह दौरा क्वाड के तीन मुख्य सदस्यों से जुड़कर अमेरिका को बाइपास करने का प्रयास है. उनकी यह रणनीति कनाडा को हिंद-प्रशांत की सुरक्षा संरचना में अपनी शर्तों पर शामिल होने का अवसर देती है, न कि वाशिंगटन के एजेंडे का अधीनस्थ भागीदार बनकर. कार्नी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रक्षा, आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और व्यापार जैसे क्षेत्रों में उच्च स्तरीय भागीदारी को सुनिश्चित करना है.
अमेरिका पर कनाडा की निर्भरता कम करने की कोशिशि
ब्रह्मा चेलानी कहते हैं- कार्नी का यह दौरा कनाडा की अमेरिका पर निर्भरता से रेजिलिएंस (यानी अमेरिकी प्रभाव से मुक्ति) से मुक्ति की दिशा में बढ़ रहा है. क्ववाड-माइनस वन दृष्टिकोण अमेरिका के साथ संबंधों को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे पुनर्संतुलित करता है. यह अमेरिका प्रभुत्व से मुक्त होकर कनाडा को वैश्विक शक्ति टेबल पर सार्थक बनाए रखता है.
ब्रह्मा चेलानी का यह विश्लेषण वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में खासतौर पर प्रासंगिक बनाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल सत्ता में लौटने के बाद दुनिया में टैरिफ, व्यापार युद्ध और अनिश्चितताएं बढ़ गई है. कनाडा की पूरी अर्थव्यवस्था अमेरिका को निर्यात पर निर्भर है. लेकिन, अमेरिका टैरिफ और व्यापार में अड़चनों की वजह से कनाडा अपने कारोबार के विविधीकरण में जुटा है.
कार्नी की मिडिल पॉवर्स डॉक्ट्रिन
बदली परिस्थितियों में कार्नी ने अपनी एक मिडिल पावर्स डॉक्ट्रिन तैयार की है. पिछले दिनों स्विट्जरलैंड के दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में कार्नी ने मीडिल पावर देशों से एकजुट होकर आर्थिक-राजनीतिक जबरदस्ती के खिलाफ स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी विकसित करने की अपील की थी. ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि कार्नी की यह डॉक्ट्रिन कनाडा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र प्लेयर के रूप में स्थापित करने की कोशिश है.
कार्नी का यह दौरा 26 फरवरी से सात मार्च तक चलेगा. वह गुरुवार 26 फरवरी को सबसे पहले मुंबई आएंगे. फिर वह कैनबरा और टोक्यो जाएंगे. दो मार्च को वह नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे. ऑस्ट्रेलिया में वह वहां के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे. ऐसा बीते 20 साल में किसी कनाडाई पीएम की ओर से पहली बार होगा. फिर वह जापान में क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और फूड सिक्योरिटी पर फोकस करेंगे. ब्रह्मा चेलानी का मानना है कि यह कदम कनाडा की नई डिफेंस इंडस्ट्रियल स्ट्रैटेजी से जुड़ा है. कार्नी घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत कर विदेशी निर्भरता कम करना चाहते हैं.
अमेरिका के बगैर क्वाड कितना संभव?
सबसे बड़ा सवाल यही है. ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि क्वाड की पूरी ताकत अमेरिकी सैन्य शक्ति और उसके नेतृत्व पर टिकी है. वाशिंगटन के बिना यह एक ढीला-ढाला समूह बनकर रह जाएगा. इसमें रणनीतिक गहराई की कमी होगी. चेलानी चेतावनी देते हैं कि वैसे तो कनाडा का यह कदम वैध है लेकिन इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव कमजोर हो सकता है. इससे कहीं न कहीं चीन को फायदा होगा.
कार्नी का दौरा भारत के लिए कितना अहम
कार्नी का यह दौरा भारत के लिए भी बेहद अहम है. बीते कुछ सालों से खालिस्तान से जुड़े आतंकवादियों के कनाडा में होने की वजह से उसके साथ भारत के रिश्तों में एक तरह का तनाव है. कार्नी का यह दौरा रिश्तों के रीसेट करने वाला है. दोनों देश यूरेनियम डील और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग कर रहे हैं.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
February 25, 2026, 09:15 IST

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