अरब से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक गाय के गोबर की क्यों इतनी डिमांड? 6700 करोड़ रुपये तक पहुंचा कारोबार

1 hour ago

होमफोटोदेश

अरब से ऑस्ट्रेलिया तक गाय के गोबर की क्यों इतनी डिमांड? 6700 करोड़ तक कारोबार

Last Updated:February 15, 2026, 10:35 IST

Cow Dung Business: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में गोबर और इससे बने उत्पादों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. वैश्विक स्तर पर गोबर और खाद का बाजार करीब 6700 करोड़ रुपये का आंका जा रहा है, जिसमें भारत के प्रमुख निर्यातक बने रहने की उम्मीद है.

भारत से गोबर और इससे बने उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है. खास तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण आने वाले वर्षों में गोबर और खाद से जुड़े बाजार के और विस्तार की उम्मीद है.

ऑर्गेनिक खाद की वैश्विक मांग, खाड़ी देशों में निर्यात में इजाफा और बायोगैस व टिकाऊ खेती में बढ़ते उपयोग के चलते भारत में गोबर और इससे बने उत्पादों के दाम बढ़ रहे हैं. अनुमान है कि वर्ष 2025 से 2032 के बीच गोबर आधारित उत्पादों का बाजार करीब 6.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगा. यह बाजार 2025 में करीब 803.5 मिलियन डॉलर का था, जो 2032 तक बढ़कर 1,248.6 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.

भारत में कच्चे गोबर की कीमत आमतौर पर 30 से 50 रुपये प्रति किलो के बीच है. खाड़ी देशों के खरीदार कई बार 50 रुपये प्रति किलो तक का भुगतान करते हैं. प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन की वजह से खुदरा और निर्यात कीमतें और बढ़ जाती हैं. गोबर खाद की कीमत उसकी गुणवत्ता और पैकिंग पर निर्भर करती है. सामान्य पैक 50 से 180 रुपये तक बिकते हैं, जबकि प्रीमियम पैक की कीमत 200 रुपये तक पहुंच जाती है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

वर्ष 2023–24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने करीब 125 करोड़ रुपये का कच्चा गोबर और 173.7 करोड़ रुपये की गोबर आधारित खाद का निर्यात किया. इस तरह कुल निर्यात 400 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली. बेंगलुरु जैसे शहरों में ये उत्पाद इको-स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचे जा रहे हैं.

<br />विदेशी बाजारों में भारतीय गोबर और इससे बने उत्पादों की कीमतें भारत के मुकाबले 5 से 10 गुना तक ज्यादा मिल रही हैं. यही वजह है कि छोटे कारोबारी भी इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि 50 हजार से 2 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से यह काम शुरू किया जा सकता है और सही बाजार मिलने पर हर महीने 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की कमाई संभव है.

गोबर का इस्तेमाल सिर्फ खाद तक सीमित नहीं है. इससे बायो-लॉग्स, वर्मी कम्पोस्ट, कागज, दीये और मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं. संपीड़ित गोबर से बनी जलावन लकड़ी करीब 10 से 15 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है. ऐसे उत्पाद खासकर पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं. इसके अलावा, गोबर से बायोगैस बनाकर भी आय अर्जित की जा सकती है. राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम के तहत छोटे बायोगैस प्लांट लगाने पर सरकार करीब 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी देती है. कृषि केंद्रों को गोबर आधारित खाद की आपूर्ति कर हर महीने 1 से 2 लाख रुपये तक की आमदनी की जा सकती है.

वैश्विक स्तर पर गोबर और खाद का बाजार करीब 803.5 मिलियन डॉलर (लगभग 6,700 करोड़ रुपये) का आंका जा रहा है, जिसमें भारत के प्रमुख निर्यातक बने रहने की उम्मीद है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली खाद की कीमत 2026 तक करीब 260 डॉलर प्रति मीट्रिक टन, यानी 21 से 22 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का अनुमान है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। बजट 2026 की लाइव खबर यहां पढ़ें |

First Published :

February 15, 2026, 10:35 IST

Read Full Article at Source