Last Updated:March 16, 2026, 21:51 IST
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्रास करके भारतीय जहाज लौट गए हैं. लेकिन इसके पीछे इंडियन नेवी का मिशन इंपॉसिबल था. यह एक ऐसा ऑपरेशन था, जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया.

जब आसमान से मिसाइलें बरस रही हों और समुद्र में खौफ तैर रहा हो, तब अपने जहाजों को सुरक्षित निकालना किसी चमत्कार से कम नहीं है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे महायुद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग सील हो चुका है. दुनिया भर के जहाज अटके हुए हैं, लेकिन इसी खौफनाक माहौल के बीच भारतीय नौसेना और कूटनीति ने मिलकर कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसकी मिसाल पहले कभी नहीं देखी गई.
ईरान ने साफ कर दिया था कि उसके दुश्मनों अमेरिका-इजरायल या उनके सहयोगियों का कोई भी जहाज हॉर्मुज से नहीं गुजरेगा. इसी बीच भारत के दो टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’करीब 92,700 मीट्रिक LPG लेकर वहां मौजूद थे. एक छोटी सी चिंगारी या गलतफहमी इस पूरे माल को राख में बदल सकती थी.
समुद्र में उतरे नौसेना के बाहुबली
हालात की नजाकत को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपना ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ शुरू किया. व्यापारिक जहाजों को भगवान भरोसे छोड़ने के बजाय, नौसेना ने अपने तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों को अरब सागर और ओमान की खाड़ी में उतार दिया. नौसेना का यह विध्वंसक जहाज आईएनएस सूरत पहले से ही वहां एक मिशन पर तैनात था. इसके साथ एक और युद्धपोत को मोर्चे पर लगाया गया. एक तीसरे युद्धपोत को विशेष रूप से व्यापारिक जहाजों को चारों तरफ से घेरकर सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई. नौसेना का वहां होना सिर्फ सुरक्षा नहीं था, बल्कि हमलावरों को एक खुला संदेश था कि अगर हमारे जहाजों की तरफ आंख भी उठाई, तो सामने भारतीय युद्धपोत खड़े हैं. ओमान की खाड़ी में जहां लगातार मर्चेंट जहाजों पर हमले हो रहे थे, वहां भारतीय युद्धपोतों की गश्त ने एक अभेद्य ‘कवच’ का काम किया.बंद कमरों में कूटनीति का मास्टरस्ट्रोक
समुद्र में जहां नेवी अपना दम दिखा रही थी, वहीं दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर एक अलग ही बिसात बिछा रहे थे. यह सिर्फ हथियारों का खेल नहीं था, बल्कि बातचीत की कला थी. विदेश मंत्री ने साफ किया कि ईरान के साथ जहाजों को निकालने की कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है. हर एक जहाज को एक-एक करके निकाला जा रहा है.
न कोई लेन-देन, न कोई शर्त
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत ने इसके बदले ईरान को कुछ दिया नहीं है. यह भारत और ईरान के पुराने और मजबूत कूटनीतिक रिश्तों का असर था कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ को उस रास्ते से गुजरने की ‘ग्रीन सिग्नल’ मिल गई, जहां बड़े-बड़े देशों के जहाज जाने से कांप रहे थे.
इंडियन नेवी ने रचा इतिहास
आज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह की ओर सुरक्षित बढ़ गए. यह घटना बताती है कि नया भारत संकट के समय न तो घबराता है और न ही किसी के आगे हाथ फैलाता है. नौसेना की ताकत और जयशंकर की शांत कूटनीति के इस अचूक तालमेल ने साबित कर दिया है कि भारत अपने हितों की रक्षा करना बखूबी जानता है फिर चाहे समंदर में कितनी ही बड़ी आग क्यों न लगी हो.
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First Published :
March 16, 2026, 21:08 IST

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