‘इस उम्र में तलाक का क्या फायदा’-34 साल पुरानी शादी तोड़ने से HC का इनकार

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Last Updated:November 30, 2025, 16:35 IST

Telangana High Court News: तेलंगाना हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने विवाह को खत्म करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि 56 और 52 साल की उम्र में तलाक देने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा. पति-पत्नी की 17 साल की कानूनी लड़ाई, गंभीर आरोपों और असफल सुलह प्रयासों के बाद कोर्ट ने दोनों अपीलें खारिज कर दीं और मूल तलाक याचिका भी रद्द कर दी.

‘इस उम्र में तलाक का क्या फायदा’-34 साल पुरानी शादी तोड़ने से HC का इनकारतेलंगाना हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने विवाह में तलाक देने से इनकार किया.

Telangana News: तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक अनोखे और लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद पर ऐसा फैसला दिया, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. अदालत ने साफ कहा कि इस उम्र में तलाक लेकर कोई फायदा नहीं. और यही बात अदालत के फैसले का आधार भी बनी. 34 साल पुरानी शादी को टूटने से रोकते हुए कोर्ट ने माना कि अब रिश्ते को कानूनी रूप से खत्म करना व्यावहारिक समाधान नहीं है.

इस केस में खास बात यह थी कि पति और पत्नी दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपील दायर की थी. 17 साल तक चली कानूनी लड़ाई, कई सुनवाई, पति की गुमशुदा स्थिति, और बच्चों के वयस्क हो जाने के बाद अदालत ने महसूस किया कि तलाक का कोई ठोस उद्देश्य अब बचा ही नहीं है. इसलिए कोर्ट ने तलाक ही नहीं बल्कि पहले दिए गए ज्यूडिशियल सेपरेशन के आदेश को भी रद्द कर दिया.

17 साल पुराना विवाद आखिर कहां से शुरू हुआ?

यह मामला 2008 में शुरू हुआ था, जब पति ने 1991 में हुई अपनी शादी को खत्म करने के लिए याचिका दायर की. पति पेशे से सिविल इंजीनियर हैं. उनका आरोप था कि पत्नी लगातार उन पर बेवजह शक करती थी. देर से घर आने पर पूछती थी कि किस औरत के साथ सोकर आए हो? और एक बार फूलदान से हमला कर उन्हें घायल भी कर दिया था. पति ने यह भी बताया कि पत्नी ने उनके खिलाफ 498A के तहत केस किया, जिसमें उन्हें बाद में बरी कर दिया गया.

पत्नी ने भी लगाए गंभीर आरोप

पत्नी ने पलटकर कहा कि पति का किसी दूसरी महिला से अवैध संपर्क था और वह लगातार पैसों के लिए परेशान करते थे. उन्होंने दावा किया कि बच्चों की खातिर उन्होंने सब सहा और परिवार को संभालने की कोशिश की.

क्या था केस की जड़ में? एक नजर में

पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की. पत्नी ने पति पर अवैध संबंध और आर्थिक उत्पीड़न का आरोप लगाया. 2012 में फैमिली कोर्ट ने तलाक नहीं, बल्कि ज्यूडिशियल सेपरेशन दिया. दोनों पक्ष हाईकोर्ट पहुंचे, क्रॉस-अपील दायर की. हाईकोर्ट में कई बार सुलह का प्रयास हुआ, पर सफल नहीं हुआ. हाल के सालों में पति के ठिकाने के बारे में भी जानकारी नहीं थी.

हाईकोर्ट ने कहा: अब तलाक का उद्देश्य ही खत्म

जस्टिस के. लक्ष्मण की बेंच ने कहा कि इतनी उम्र में और इतने सालों के बाद तलाक देना सिर्फ एक औपचारिकता भर रह जाएगा. पति 56 और पत्नी 52 वर्ष के हैं, जबकि उनके बच्चे 33 और 28 साल के हो चुके हैं. कोर्ट ने माना कि इन परिस्थितियों में विवाह खत्म करने से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा.

कोर्ट का दृष्टिकोण: कानूनी लड़ाई बन गई थी बोझ

अदालत ने रिकॉर्ड देखकर कहा कि यह केस अपनी प्रकृति खो चुका है. पति सालों से कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ. पत्नी भी उनके ठिकाने के बारे में कुछ नहीं बता सकी. एक रिश्ते को समाप्त करने का उद्देश्य तब पूरा होता है जब इसका किसी पक्ष के जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़े. लेकिन यहां सालों की दूरी और उम्र का तकाजा दोनों ही अलग कहानी बता रहे थे.

निर्णय: दोनों अपीलें खारिज, पुराना आदेश भी रद्द

हाईकोर्ट ने कहा कि अब न तलाक आवश्यक है और न ही ज्यूडिशियल सेपरेशन. इसलिए दोनों की अपीलें भी खारिज की गईं और पति द्वारा दायर मूल तलाक याचिका भी खत्म कर दी गई.

कानूनी विश्लेषण: यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह निर्णय उन मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां रिश्ते कानूनी रूप से खत्म करने का व्यावहारिक लाभ अब बचा नहीं होता. लंबे समय तक चले विवाह में अदालत कई बार रिश्ते की वास्तविक स्थिति, उम्र, बच्चों की स्थिति, और दैनिक जीवन पर प्रभाव को भी ध्यान में रखती है. इस केस में कोर्ट ने माना कि रिश्ता टूट चुका है, लेकिन कानूनी तलाक अब किसी पक्ष को वास्तविक राहत नहीं देगा.

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Sumit Kumar

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master's degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, ...और पढ़ें

First Published :

November 30, 2025, 16:35 IST

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