Last Updated:January 29, 2026, 14:17 IST
Ajit Pawar News: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे में निधन से महाराष्ट्र की राजनीति और एनसीपी में शोक है. अंतिम संस्कार में अमित शाह समेत कई बड़े नेता शामिल हुए. अब एनसीपी पार्टी नेतृत्व पर संकट गहरा गया है.
अजित पवार की चिता को नमन करते गृह मंत्री अमित शाह. फोटो- पीटीआईAjit Pawar News: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार का बुधवार को एक विमान हादसे में निधन हो गया. उनके असामयिक निधन से महाराष्ट्र की पूरी राजनीति हिल गई है. उनकी पार्टी एनसीपी अनाथ हो गई है. पार्टी के भीतर उनके बाद इसे संभालने वाला कोई बड़ा कद नजर नहीं आ रहा है. इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट भी नजर आ रहे हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि अजित पवार भाजपा और शिवसेना की गठबंधन सरकार से अलग होने वाले थे. लेकिन, उससे पहले ही उनका दुखद निधन हो गया.
गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनकी अंतिम यात्रा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ महाराष्ट्र का करीब-करीब हर बड़ा नेता शरीक हुआ. उनके अंतिम दर्शन के लिए लाखों की भीड़ उमड़ी थी. हर किसी की आंखें गमगीन थीं. पार्टी लाइन से ऊपर उठकर अजित पवार का हर कोई चहेता था.
फडणवीस सरकार से दादा के बाहर होने के कयास
जहां तक भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार से अजित पवार के बाहर होने की संभावना की बात है तो राजनीति के गलियारे में ऐसे कयास रोज लगाए जाते हैं. हां, इतना जरूर है कि बीते स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा और अजित पवार की एनसीपी के बीच दूरियां दिखी थीं. यहां तक कि अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की एनसीपी के साथ पिंपड़ी चिंचवाड़ और कुछ अन्य क्षेत्रों में गठबंधन कर लिया था. दोनों गुटों की ओर से ऐसे बयान भी आने लगे थे जिससे लगता था कि अब पवार परिवार फिर से एक हो जाएगा. अजित पवार ने पब्लिकली कहा था कि दोनों दलों के कार्यकर्ता चाहते हैं कि हम सब फिर से एक हो जाएं. कई मौकों पर अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के साथ मंच भी साझा करते आए. यानी इतना तो तय था कि अजित पवार और शरद पवार गुट के साथ आने की संभावना बढ़ गई थी. लेकिन, सवाल यह था कि इस एकीकरण के बाद क्या एनसीपी देवेंद्र फडणवीस सरकार से बाहर हो जाती?
अपने पिता की चिता को अग्नि देते अजित पवार के बेटे.
नहीं, ये राजनीति है. इसमें कुछ भी स्थायी नहीं होता. बीते विधानसभ चुनाव में अजित पवार ने अपनी ताकत और जनता के बीच अपनी लोकप्रियता साबित कर दी थी. हालांकि बीते लोकसभा चुनाव में शरद पवार अपने भतीजे पर भारी पड़े थे. विधानसभा में अजित पवार की एनसीपी को 41 सीटों पर जीत मिली जबकि उनके चाचा शरद पवार की एनसीपी को केवल 10 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई. इससे साबित हो गया कि चाचा-भतीजे में अब भविष्य केवल भतीजे का है. लेकिन, अजित पवार के निधन के साथ ये सब चीजें पल भर में खत्म हो गई हैं.
पार्थ पवार बन सकते हैं मंत्री
जहां तक मौजूदा वक्त में एनसीपी के देवेंद्र फडणवीस सरकार से बाहर होने की संभावना की बात हो तो ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा है. उनके अंतिम संस्कार में जिस तरह से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने शिरकत की उस दृश्य को देखकर ऐसा तो बिल्कुल नहीं लग रहा है. रही बात एनसीपी के एकीकरण की तो यह सवाल भी फिलहाल के लिए भविष्य के गर्त में है. अभी परिवार पर भारी संकट आया है. ऐसे में 85 वर्षीय शरद पवार पर इस संकट से परिवार को उबारने की जिम्मेदारी है. ऐसी संभावना है कि फिलहाल के लिए अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को फडणवीस कैबिनेट में जगह मिले और पार्टी की कमान एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के हाथों में हो. अगर दोनों धड़ों का विलय हो जाता है तो शरद पवार के एक अन्य पोते रोहित पवार की भूमिका बढ़ सकती है. राज्य में अजित पवार के जाने से जो शून्य पैदा हुआ है उसकी काफी हद तक भरपाई रोहित पवार कर सकते हैं. रोहित जनता के बीच काफी सक्रिय हैं.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
January 29, 2026, 14:17 IST

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