ईरान जंग खत्म कर सकता है भारत; अब फिनलैंड ने भी माना लोहा, जयशंकर के हुए कायल
Last Updated:March 17, 2026, 11:54 IST
Iran-Israel War News: फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने नई दिल्ली से अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने की अपील की. उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर की कूटनीतिक पहल का हवाला दिया.

Iran War News: ईरान जंग से दुनिया त्रस्त हो चुकी है. ईरान अकेला इजरायल और अमेरिका से बदला ले रहा है. ईरान के जवाबी एक्शन से पश्चिम एशिया जल रहा है. यह ईरान-अमेरिका जंग कैसे खत्म होगी, किसी को कुछ भी पता नहीं. मगर इस जंग को कौन खत्म करवा सकता है, इसकी गूंज अब सुनाई देने लगी है. ईरान जंग को भारत खत्म करवा सकता है. यूएई और ईरान के बाद अब फिनलैंड का भी कुछ ऐसा ही मानना है. जी हां, फिनलैंड ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए भारत से कूटनीतिक भूमिका निभाने की अपील की है. फिनलैंड ने मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच तुरंत युद्धविराम की मांग की है. फिनलैंड का मानना है कि भारत ही इस ईरान युद्ध को खत्म करवा सकता है.
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने एक इंटरव्यू में सुझाव दिया कि भारत शांति कराने में मदद कर सकता है. उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया कूटनीतिक पहलों का जिक्र किया. जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान युद्ध वाला तनाव कम करने की अपील की थी.
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमें युद्धविराम की जरूरत है. मैं सोच रहा हूं कि क्या भारत सचमुच इसमें शामिल हो सकता है. हमने देखा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने हालात शांत करने के लिए युद्धविराम की अपील की थी.’
स्टब की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब नई दिल्ली ने बढ़ते तनाव के बीच तेहरान के साथ अपना संपर्क बढ़ा दिया है. पिछले हफ़्ते विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के साथ फ़ोन पर बातचीत की थी. कई बार हुई इस बातचीत में उन्होंने क्षेत्र में बदलते हालात पर चर्चा की.
ईरानी विदेश मंत्री से जयशंकर की क्या बात हुई
बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने भारत को ईरान जंग पर ताजा घटनाक्रमों की जानकारी दी. इतना ही नहीं, उन्होंने इस संघर्ष को अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता का नतीजा बताया. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने का इरादा रखता है. साथ ही उन्होंने इसके व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक नतीजों की चेतावनी भी दी.
पीएम मोदी ने भी की ईरान से बात
इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कूटनीतिक प्रयासों के तहत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिया से बात की है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने बढ़ते तनाव और नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सामान व ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
ईरान जंग को लेकर जारी है तनाव
हालांकि तनाव अभी भी बना हुआ है. भारत ने अपनी ऊर्जा और व्यापारिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है. होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय झंडे वाले जहाज इस अहम तेल मार्ग से गुजर रहे हैं. एलपीजी शिवालिक के बाद अब नंदा देवी जहाज भी भारत पहुंच चुका है. एस जयशंकर ने ईरान के साथ सीधी बातचीत को होर्मुज़ से शिपिंग फिर से शुरू करने का सबसे प्रभावी तरीका बताया.
यूएई और ईरान भी यही दावा कर चुके
इससे पहले ईरान और यूएई भी मान चुका है कि पश्चिम एशिया की इस तबाही को भारत रोक सकता है. भारत वह देश है, जिसके दोनों पक्षों से बेहतर संबंध हैं. भारत वैसे भी शांति का पक्षधर रहा है. बीते दिनों ईरान ने कहा था कि भारत युद्ध रुकवा सकता है और इसे खत्म करने में रचनात्मक भूमिका निभा रहा है. संयुक्त अरब अमीरात के पहले राजदूत हुसैन हसन भी कहा था कि भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करवा सकता है. यूएई का तो यहां तक कहना है कि पीएम मोदी के महज एक फोन कॉल से यह युद्ध रुक सकता है.
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First Published :
March 17, 2026, 11:46 IST

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