Last Updated:March 06, 2026, 18:29 IST
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी दिखने लगा है. सरकार ने एहतियात के तौर पर रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इस कदम का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की सप्लाई को सुरक्षित रखना है. सरकार ने जरूरी वस्तु अधिनियम के तहत आपात प्रावधान लागू कर यह फैसला लिया है.

नई दिल्ली. भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट को देखते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अहम कदम उठाया है. सरकार ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे रसोई गैस यानी एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं. अधिकारियों के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण अगर सप्लाई प्रभावित होती है तो देश में गैस की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर न पड़े.
सरकार ने लागू किए आपात प्रावधान
केंद्र सरकार ने इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आपात प्रावधान लागू किए हैं. इसके तहत सरकार कंपनियों को किसी जरूरी वस्तु का उत्पादन बढ़ाने के लिए निर्देश दे सकती है. जारी आदेश के मुताबिक देश में काम कर रही सभी तेल रिफाइनरियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल एलपीजी बनाने में किया जाए. यह एलपीजी मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराई जाएगी.
प्रोपेन और ब्यूटेन का अन्य उपयोग रोकने के निर्देश
सरकार ने साफ कहा है कि रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल किसी अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद या उससे जुड़े उत्पाद बनाने में नहीं करेंगी. इन गैसों का उपयोग केवल एलपीजी उत्पादन के लिए किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से देश में घरेलू गैस की आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी. साथ ही यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगली सूचना तक जारी रहेगा.
गल्फ संकट से सप्लाई पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की एलपीजी जरूरत का करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. यह सप्लाई आमतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचती है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे सप्लाई बाधित होने की आशंका बनी हुई है. इसी वजह से सरकार पहले से तैयारी कर रही है.
देश में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है. देश की रिफाइनिंग क्षमता भी मजबूत है, इसलिए जरूरत पड़ने पर उत्पादन की प्राथमिकताओं को बदला जा सकता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में एलपीजी आयात और खपत दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते उठाए गए इस कदम से भविष्य में किसी संभावित संकट के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
March 06, 2026, 18:29 IST

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