ईरान ने 2 भारतीय जहाजों को होर्मुज पार कैसे करने दिया? जयशंकर ने बताया पर्दे के पीछे का खेल

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ईरान ने 2 भारतीय जहाजों को होर्मुज पार कैसे करने दिया? जयशंकर ने बताया असल खेल

Last Updated:March 16, 2026, 10:00 IST

EAM S Jaishankar on Iran Strait of Hormuz: ईरान जंग के बीच भारत के लिए खुशखबरी है. ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की इजाज़त दे दी है. अब दोनों जहाज आज-कल में भारत पहुंचने वाले हैं. अब सवाल है कि आखिर ईरान ने भारतीय झंडे वाले दोनों जहाजों को होर्मुज पार करने की इजाजत कैसे दी? इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तेहरान के साथ सीधी बातचीत की तारीफ़ की और कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही फिर से शुरू करने का यह सबसे असरदार तरीका था.

ईरान ने 2 भारतीय जहाजों को होर्मुज पार कैसे करने दिया? जयशंकर ने बताया असल खेलZoom

ईरान ने 2 भारतीय टैंकरों को होर्मुज़ पास से गुज़रने की इजाज़त क्यों दी? एस. जयशंकर ने उसका कारण बताया है.

EAM S Jaishankar on Iran Strait of Hormuz: ईरान जंग से दुनिया में ईंधन को लेकर हाहाकार है. ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल-गैस वाले जहाज फंसे हैं. मगर ईरान ने भारत से दोस्ती निभाई है. होर्मुज से भारत के जहाज अब आसानी से आ रहे हैं. भारतीय झंडे वाले ये दोनों गैस वाले जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ होर्मुज से निकलकर अब भारत के तट पर पहुंचने वाले हैं. भारत के ये दोनों टैंकर करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर जा रहे हैं. शिवालिक आज मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच रहा है, जबकि नंदादेवी टैंकर कांडला बंदरगाल पर कल पहुंचेगा. अब सवाल है कि जब ईरान होर्मुज में ईंधन वाले जहाजों को निशाना बना रहा है तो फिर भारत के झंडे वाले ये जहाज होर्मुज पार कर कैसे आ रहे? आखिर ईरान ने दोनों भारतीय टैंकर को होर्मुज के पास गुजरने की इजाजत क्यों और कैसे दे दी? खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पर्दे के पीछे की पूरी कहानी बताई है.

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की मानें तो यह सब ईरान और भारत के बीच बातचीत का नतीजा है. उन्होंने कहा कि बातचीत से ही ये कुछ नतीजे निकले हैं. और यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत मिलने के कुछ दिनों बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तेहरान के साथ सीधी बातचीत की तारीफ की. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही फिर से शुरू करने का यह सबसे असरदार तरीका था. बता दें कि बीते दिनों ही ईरान ने भारत के झंडे वाले दो गैस टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की इजाज़त दे दी.

जयशंकर ने बताई अंदर की बात

एस जयशंकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, ‘मैं इस समय उनसे बातचीत करने में लगा हुआ हूं, और मेरी बातचीत से कुछ नतीजे निकले हैं. यह प्रक्रिया अभी भी जारी है. अगर इससे मुझे नतीजे मिल रहे हैं, तो ज़ाहिर है मैं इस पर काम करना जारी रखूंगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘निश्चित रूप से भारत के नज़रिए से यह बेहतर है कि हम तर्क से काम लें. आपस में तालमेल बिठाएं और कोई समाधान निकालें.’ विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि भारत के झंडे वाले जहाज़ों के लिए ईरान के साथ कोई एकमुश्त या आम व्यवस्था (blanket arrangement) नहीं है, और हर जहाज की आवाजाही एक अलग घटना होती है.’

ईरान ने 2 भारतीय टैंकरों को होर्मुज़ पास से गुज़रने की इजाज़त क्यों दी? एस. जयशंकर ने उसका कारण बताया है.

क्या भारत से ईरान ने भी बदले में कुछ लिया?
अब सवाल है कि क्या ईरान ने इसके बदले भारत से कुछ लिया है? उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इसके बदले में ईरान को कुछ मिला है. उन्होंने कहा कि दिल्ली और तेहरान के बीच आपस में लेन-देन का एक लंबा इतिहास रहा है… और इसी आधार पर मैंने उनसे बातचीत की.’ उन्होंने कहा, ‘यह किसी लेन-देन का मामला नहीं है. भारत और ईरान के बीच आपसी संबंध हैं. और इस संघर्ष को हम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं.’ जयशंकर ने आगे कहा, टअभी तो यह शुरुआत भर है. हमारे कई और जहाज़ भी वहां मौजूद हैं. इसलिए, जहां एक तरफ यह एक स्वागत योग्य कदम है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत का सिलसिला अभी भी जारी है, क्योंकि इस मामले पर लगातार काम चल रहा है.’

मोदी की बातचीत का भी असर

‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जहाज को ईरान ने होर्मुज से गुजरने की इजाजत तब दी, जब पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई थी. गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात की थी और सामान और ऊर्जा की आवाजाही (transit) के मुद्दे पर चर्चा की थी. भारत के झंडे वाले ये दोनों टैंकर वाले जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लेकर जा रहे हैं. बता दें कि होर्मुज ही फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एकमात्र समुद्री रास्ता है.

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Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें

First Published :

March 16, 2026, 10:00 IST

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