'ईसाई धर्म छोड़ हिंदू बनो' 25 साल से खोई मां लौटी घर, पत्थरदिल बेटे ने अपनाने से कर दिया इनकार

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Last Updated:February 24, 2026, 11:59 IST

Godda News: झारखंड के गोड्डा जिले के एक गांव में रहने वाले बेटे ने अपनी मां को केवल इस वजह से अपनाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह ईसाई धर्म का पालन करती हैं. बेटे मदन बेसरा ने साफ कहा कि अगर मां को परिवार में लौटना है तो उन्हें हिंदू धर्म अपनाना होगा. इस पर सुशीला मुर्मू ने इनकार कर दिया.

'पहले हिंदू बनो' 25 साल से खोई मां लौटी घर, बेटे ने अपनाने से किया इनकारZoom

बुजुर्ग महिला सुशीला मुर्मू करीब 25 साल पहले अपने पति की मौत के बाद लापता हो गई थीं.

कोलकाता के एक शेल्टर होम में बीते दो दशकों से रह रही एक बुजुर्ग महिला को आखिरकार उसके घर का पता मिल गया, लेकिन जब परिवार सामने आया तो रिश्तों के बीच धर्म दीवार बनकर खड़ा हो गया. झारखंड के गोड्डा जिले के एक गांव में रहने वाले बेटे ने अपनी मां को केवल इस वजह से अपनाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह ईसाई धर्म का पालन करती हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्ग महिला सुशीला मुर्मू करीब 20 साल पहले अपने पति की मौत के बाद लापता हो गई थीं. उनके पति हिंदू थे, जबकि सुशीला मुर्मू ने शादी से पहले ही ईसाई धर्म अपना लिया था. बताया जाता है कि पति के निधन के बाद गांव के लोगों ने एक ईसाई महिला को अपने बीच रहने देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते वह घर छोड़ने को मजबूर हुईं.

सुशीला की याददाश्त भी हो चुकी कमजोर

सुशीला मुर्मू की याददाश्त भी इस दौरान कमजोर हो गई. उन्हें यह भी याद नहीं है कि वह कोलकाता कैसे पहुंचीं. वर्ष 2001 में उन्हें मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़ी एक सदस्य ने देखा और शेल्टर होम में भर्ती कराया. बीते वर्षों में वही आश्रय उनका घर बन गया, हालांकि वह कभी-कभी अपने पति और परिवार को याद करती थीं.

शेल्टर होम के एक कर्मचारी ने उनकी कहानी को एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर को बताया. इसके बाद वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सदस्य अंबरिश नाग बिस्वास ने रेडियो नेटवर्क के जरिए महिला की तस्वीर साझा की, जिससे उनकी पहचान झारखंड के दहुपागर गांव में रहने वाले परिवार के रूप में हुई.

रिश्तों पर मजहब की शर्त

करीब 25 साल बाद मां-बेटे के बीच पहली बार वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हुई. बेटे मदन बेसरा ने साफ कहा कि अगर मां को परिवार में लौटना है तो उन्हें हिंदू धर्म अपनाना होगा. इस पर सुशीला मुर्मू ने इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं अपना धर्म नहीं छोड़ सकती. यही मेरी अंतिम बात थी.’

मामले पर पोरियाहाट थाना के प्रभारी महावीर पंडित ने कहा कि वह खुद गांव जाकर बेटे से बात करेंगे और पूरे मामले की जानकारी लेंगे. फिलहाल सुशीला मुर्मू कोलकाता के उसी शेल्टर होम में रह रही हैं, जहां उन्होंने जीवन के पिछले 20 साल गुजारे हैं. परिवार मिलने के बाद भी घर वापसी का रास्ता अब भी अधूरा है.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें

Location :

Godda,Jharkhand

First Published :

February 24, 2026, 11:59 IST

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