एक्सीडेंट में इंजीनियर की कट गई टांग, ट्रिब्यूनल ने दिया 58 लाख का मुआवजा

1 hour ago

Last Updated:February 26, 2026, 12:15 IST

Mumbai News: मुंबई के उपनगर ठाणे में एमएसीटी ने किरण सुरेश माली को ट्रक दुर्घटना में 65 प्रतिशत विकलांगता के बाद 58.3 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. आदेश के मुताबिक बीमा कंपनी को पहले भुगतान करना होगा. फिर वह ट्रक मालिक से राशि की वसूली करेगी.

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ट्रिब्यूनल ने पीड़ित को 58 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

Mumbai News: मुंबई के उपनगर ठाणे के एक मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 58.3 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. इस इंजीनियर की 2019 में एक तेज रफ्तार ट्रक से टक्कर लगने के बाद बायां पैर काटना पड़ा था. यह फैसला 23 फरवरी को एमएसीटी सदस्य आरवी मोहिते ने दिया, जिसमें बीमा कंपनी को पहले मुआवजा चुकाने और फिर वाहन मालिक से रिकवर करने का निर्देश दिया गया है.

दावा करने वाले किरण सुरेश माली (35) एक वरिष्ठ सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं, जो एक कंपनी में काम करते हैं. 30 मार्च 2019 को ठाणे के घोडबंदर रोड पर आनंद नगर इलाके में वे अपनी मोटरसाइकिल चला रहे थे, जब एक ट्रक ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी. इस भीषण दुर्घटना में उनके बाएं पैर में क्रश इंजरी आई, जिसके कारण पैर काटना करना पड़ा. इससे उन्हें 65 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हो गई. ट्रक मालिक ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ, इसलिए मामला उसके खिलाफ एक्स-पार्टे चला. बीमा कंपनी ने दावा किया कि पेश की गई इंश्योरेंस पॉलिसी नकली और फर्जी है. लेकिन ट्रिब्यूनल ने आरटीओ रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि वाहन बीमित दिख रहा है.

अदालत ने विभिन्न हाई कोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि थर्ड पार्टी (दावा करने वाला) के मामले में बीमा कंपनी को पहले मुआवजा चुकाना होगा, फिर कंपनी वाहन मालिक या ड्राइवर से रिकवर कर सकती है. मुआवजे की गणना में ट्रिब्यूनल ने माली की फंक्शनल डिसेबिलिटी को 25 प्रतिशत आंका. उन्होंने 84,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन का दावा किया था, लेकिन आईटी रिटर्न्स या बैंक स्टेटमेंट्स नहीं पेश किए, इसलिए नॉशनल मासिक आय 45,000 रुपये तय की गई. मुआवजे की राशि को इस तरह तय किया गया. कमाई की हानि- 21.6 लाख रुपये, भविष्य की संभावनाओं के लिए- 8.64 लाख रुपये, भविष्य के आर्टिफिशियल लिम्ब और उसके रखरखाव के लिए- 18 लाख रुपये.

कुल मुआवजा 58.3 लाख रुपये है, जिस पर पिटीशन की तारीख अप्रैल 2019 से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा. ट्रिब्यूनल ने कहा कि स्थायी विकलांगता का प्रभाव व्यक्ति की उम्र, शिक्षा, पेशा और अन्य कारकों पर निर्भर करता है. मोशन ग्राफिक डिजाइनर के रूप में उनके पेशे पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है.

ठाणे एमएसीटी हाल के महीनों में कई ऐसे मामलों में मुआवजा दे रहा है, जहां विकलांगता स्थायी है. माली के वकील ने कहा कि यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने में मददगार साबित होगा. बीमा कंपनी अब अपील कर सकती है, लेकिन फिलहाल पीड़ित को राहत मिली है.

First Published :

February 26, 2026, 12:15 IST

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