Last Updated:February 24, 2026, 14:32 IST
यह होमर कबूतर एक ही उड़ान में 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी 28 घंटे में तय कर रेसिंग चैंपियन बन गया. 19 फरवरी की सुबह 8 बजे ठाणे के कुडस से उड़ा यह कबूतर 20 फरवरी को तिरूर स्थित अपने घर पहुंच गया.
महाराष्ट्र के ठाणे से केरल के तिरूर तक आसमान की सीमाएँ लांघते हुए एक रेसिंग कबूतर ने इतिहास रच दिया. पी. शानवास ने दो साल का रेसिंग होमर कबूतर पाल रखा है, जिसने एक ही उड़ान में 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी 28 घंटे में तय कर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.
यह प्रतियोगिता मालाबार रेसिंग पिजन क्लब और केरल रेसिंग पिजन क्लब ने मिलकर आयोजित की थी. 19 फरवरी की सुबह 8 बजे ठाणे से लगभग 56 किलोमीटर दूर कुडूस क्षेत्र से कुल 80 कबूतर उड़ान के लिए छोड़े गए. कबूतरों को सड़क मार्ग से वहां पहुंचाया गया था.
मालिकों के घर लौटने से पहले ही 20 फरवरी को दोपहर 11:58 बजे, शानवास का रेसिंग होमर सुरक्षित रूप से तिरूर स्थित उनके घर पहुंच गया. यह उपलब्धि प्रतियोगिता की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है.
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1001 किलोमीटर श्रेणी में पहला और दूसरा स्थान शानवास के ही कबूतरों ने हासिल किया. तीसरा स्थान तनालूर निवासी के कबूतर को, जबकि चौथा स्थान मंकड़ा निवासी के कबूतर को मिला. तिरूर नदुविलंगाड़ी में स्थित 'प्रिय एक्वापेट्स' के मालिक शानवास के लिए कबूतर पालन एक बड़ा शौक और जुनून है.
प्रतियोगिता से पहले सभी कबूतरों को क्लब कार्यालय में टैग किया जाता है. लौटकर आने वाले कबूतर के टैग पर दर्ज गुप्त नंबर को आयोजकों के मोबाइल ऐप में दर्ज करते ही विजेता का निर्धारण होता है.
प्रतियोगिताएं मुख्य रूप से दो श्रेणियों में होती हैं.... अधिक समय तक उड़ान भरने वाले 'हाई फ्लायर' और अधिक दूरी तय करने वाले 'रेसिंग पिजन'.
इस शानदार उड़ान ने न केवल शानवास बल्कि पूरे केरल के कबूतर प्रेमियों को गर्व का क्षण दिया है.
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First Published :
February 24, 2026, 14:32 IST

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