Last Updated:February 24, 2026, 16:10 IST
केरल की राजनीति में मंगलवार को कौवा और मेंढक का अचानक जिक्र होने लगा. मामला यहां तक पहुंच गया कि शब्दों की मर्यादा टूटती नजर आई. आखिर क्या है केरल की राजनीति में 'कौवा-मेंढक' कनेक्शन?

तिरुवनंतपुरम/अलप्पुझा. चुनाव नजदीक आते ही केरल की सियासत में बयानों के तीर कुछ ज्यादा ही नुकीले और दिलचस्प हो गए हैं. आम तौर पर गंभीर रहने वाली दक्षिण की राजनीति में अचानक से कौवे और मेंढक की एंट्री हो गई है. दरअसल, केरल के सामाजिक संगठन श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन पर बेहद तीखा हमला किया है. इसमें शब्दों की मर्यादा टूटती दिख रही है.
न्यूज18मलायलम की रिपोर्ट के मुताबिक, नटेसन ने कांग्रेस के कद्दावर नेता वीडी सतीशन की वर्किंग स्टाइल पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘मेंढक’ कह डाला. उन्होंने कहा, जब से सतीशन विपक्ष के नेता बने हैं, उनका अहंकार बढ़ गया है. वे एक मेंढक की तरह फूल गए हैं. नटेसन ने दो टूक शब्दों में कहा कि सतीशन के बस की बात नहीं है कि वे केरल की राजनीति में कोई नया युग ला सकें या कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव कर सकें.
‘मुख्यमंत्री बने तो उल्टे उड़ने लगेंगे कौवे’
मलयालम भाषा में एक बहुत ही मशहूर मुहावरा है- “काका मलर्नु परक्कुम” यानी ‘कौवे उल्टे उड़ने लगेंगे’. यह मुहावरा किसी बिल्कुल असंभव काम को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन नटेसन ने सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के सपने पर पानी फेरते हुए इसी मुहावरे का इस्तेमाल किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, जिस दिन वीडी सतीशन केरल के मुख्यमंत्री बनेंगे, समझ लेना उस दिन आसमान में कौवे उल्टे उड़ने लगेंगे. यानी नटेसन की नजर में सतीशन का केरल का सीएम बनना पूरी तरह से नामुमकिन है.
तो फिर मुख्यमंत्री पद का असली हकदार कौन?
नटेसन सिर्फ सतीशन को नकार कर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने कांग्रेस के भीतर अपनी पसंद भी खुलेआम जाहिर कर दी. उन्होंने साफ कहा कि अगर कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई सबसे योग्य उम्मीदवार है, तो वो हैं केसी वेणुगोपाल. नटेसन ने कहा, मुख्यमंत्री बनने के असली हकदार केसी वेणुगोपाल हैं. अगर वे नहीं, तो उसके बाद रमेश चेन्निथला का नंबर आता है. नटेसन के इस बयान ने कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी की आग में घी डालने का काम किया है.
तंत्री विवाद पर राजनेताओं के दोहरे रवैये पर भी भड़के
राजनीतिक हमलों के अलावा, वेल्लापल्ली नटेसन ने तंत्री कंडरारू राजीवरु के विवाद पर भी अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को अपराधी ठहराना अदालत का काम है, नेताओं का नहीं. नटेसन ने कहा, अभी सिर्फ एक अदालत ने तंत्री को बरी किया है. अगर मामला किसी दूसरी अदालत में जाता है, तो हो सकता है वे दोषी साबित हो जाएं. उन्होंने राजनेताओं की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि जब बात ‘वासु’ जैसे किसी आम आदमी की होती है, तो उसके हक में बोलने कोई नेता नहीं आता. लेकिन तंत्री के पक्ष में बोलने और उनका बचाव करने के लिए राजनेताओं में होड़ मची हुई है. बता दें कि नटेसन वासु को निर्दोष मानते हैं.
क्या है इस ‘कौवा-मेंढक’ पॉलिटिक्स के मायने?
वेल्लापल्ली नटेसन का यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत हमला नहीं है. एसएनडीपी केरल में एझावा समुदाय का एक बहुत बड़ा और प्रभावशाली संगठन है, जो राज्य में हार-जीत तय करने वाला वोट बैंक माना जाता है. नटेसन द्वारा विपक्ष के नेता की इस तरह सार्वजनिक आलोचना करना, कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक अलर्ट है. फिलहाल, ‘उल्टे उड़ते कौवे’ और ‘फूले हुए मेंढक’ के इन मुहावरों ने केरल के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है.
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First Published :
February 24, 2026, 16:10 IST

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