कौन सा है भारत का सबसे पुराना एजुकेशन बोर्ड? जानिए UP बोर्ड, CBSE और ICSE का इतिहास

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कौन सा है भारत का सबसे पुराना एजुकेशन बोर्ड? जानिए CBSE और ICSE का इतिहास

Last Updated:February 28, 2026, 14:44 IST

Oldest Education Board of India: भारत का सबसे पुराना एजुकेशन बोर्ड उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद है, जिसकी स्थापना 1921 में हुई थी. इसी बोर्ड से संगठित परीक्षा सिस्टम की शुरुआत हुई और आगे चलकर CBSE व ICSE जैसे प्रमुख बोर्ड अस्तित्व में आए.

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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना साल 1921 में प्रयागराज में हुई थी.

Oldest Education Board of India: भारत की स्कूल शिक्षा व्यवस्था एक दिन में तैयार नहीं हुई. यह समय के साथ विकसित हुई है. आज देश में CBSE और ICSE जैसे बड़े बोर्ड हैं, लेकिन इन सबकी शुरुआत जिस बोर्ड से मानी जाती है, वह है उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) यानी यूपी बोर्ड (UP Board). इसे भारत का सबसे पुराना एजुकेशन बोर्ड माना जाता है.

कैसे हुई UP बोर्ड की शुरुआत?

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना साल 1921 में प्रयागराज में हुई थी. यह यूनाइटेड प्रोविंसेज की विधान परिषद के एक अधिनियम के तहत बनाया गया था. इसके बाद 1923 में इस बोर्ड ने पहली बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं आयोजित कीं. खास बात यह है कि UP बोर्ड ने शुरुआत से ही 10+2 सिस्टम अपनाया था, जो बाद में पूरे देश में एक स्टैंडर्ड बना. इससे पहले हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं प्रयागराज विश्वविद्यालय के द्वारा कराई जाती थीं.

दुनिया का सबसे बड़ा एग्जाम बोर्ड

समय के साथ UP बोर्ड का दायरा बहुत बढ़ गया. आज यह दुनिया का सबसे बड़ा परीक्षा आयोजित करने वाला बोर्ड माना जाता है. हर साल लगभग 50 से 55 लाख छात्र इसकी परीक्षाओं में शामिल होते हैं. काम का बोझ बढ़ने पर बोर्ड ने मेरठ, वाराणसी, बरेली और प्रयागराज में क्षेत्रीय कार्यालय भी खोले. साल 2000 में उत्तराखंड बनने के बाद रामनगर (नैनीताल) का कार्यालय अलग कर दिया गया.

यूपी बोर्ड का अन्य राज्यों में भी था दायरा

शुरुआती समय में UP बोर्ड केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था. यह राजपूताना, सेंट्रल इंडिया और ग्वालियर जैसे क्षेत्रों के छात्रों की परीक्षाएं भी आयोजित करता था. लेकिन 1927-28 के बाद बाहरी क्षेत्रों के छात्रों को UP बोर्ड की परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई. इसी फैसले के बाद भारत में अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड बनने की प्रक्रिया तेज हुई.

कैसे हुई CBSE की शुरुआत?

साल 1917-19 की सैडलर आयोग की सिफारिशों के बाद अलग-अलग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बनाने का विचार सामने आया. जब UP बोर्ड का क्षेत्र बहुत बड़ा हो गया, तो सरकार ने प्रभावित रियासतों को दो विकल्प दिए – या तो वे अपना अलग बोर्ड बनाएं या संयुक्त बोर्ड बनाएं. आखिरकार 1929 में अजमेर में एक संयुक्त बोर्ड की स्थापना हुई, जो बाद में विकसित होकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) बना. आज CBSE देश का राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख बोर्ड है.

ICSE बोर्ड क्या है?

ICSE सरकारी बोर्ड की तरह स्थापित नहीं हुआ था. यह एक स्वायत्त संस्था के रूप में काम करता है. इसका उद्देश्य कमजोर और वंचित वर्गों को शिक्षा से जोड़ना था. इसका संचालन भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है. 2003 में सुप्रीम कोर्ट के टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन मामले के फैसले ने ऐसे संस्थानों को कानूनी मजबूती दी. ICSE सिस्टम की शुरुआत 1990 में हुई और 2009 में इसका संचालन काउंसिल ऑफ बेसिक एंड टेक्निकल एजुकेशन को सौंपा गया.

भारत की शिक्षा व्यवस्था की साझा विरासत

आज भले ही CBSE और ICSE ज्यादा चर्चित नाम हों, लेकिन भारत में संगठित स्कूल परीक्षाओं की मजबूत नींव UP बोर्ड ने रखी थी. 10+2 सिस्टम की शुरुआत और लाखों छात्रों की परीक्षा का सफल संचालन इसकी बड़ी उपलब्धि है. इन सभी बोर्ड ने अलग-अलग समय पर भारत के एजुकेशन सिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है. UP बोर्ड से शुरू हुई यह यात्रा आज राष्ट्रीय और स्वायत्त बोर्डों तक पहुंच चुकी है, जो देश के लाखों छात्रों का भविष्य तय करते हैं.

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Kunal Jha

कुणाल झा एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन साल से ज्यादा का अनुभव है. वह नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के कई अलग-अलग मुद्दों को कवर करते हैं. करियर, एजुकेशन, जॉब और स्पोर्ट्स जैसी फील्ड में...और पढ़ें

First Published :

February 28, 2026, 14:44 IST

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