Last Updated:January 31, 2026, 17:47 IST
King Cobra On Trains: भारतीय रेलवे अब किंग कोबरा जैसे खतरनाक सांपों के लिए अनजाने में एक 'हाई-स्पीड रूट' बन गई है. हालिया स्टडी के अनुसार, वेस्टर्न घाट्स के किंग कोबरा गोवा की ट्रेनों में सवार होकर सैकड़ों किलोमीटर दूर पहुंच रहे हैं. यह न केवल यात्रियों के लिए जानलेवा है, बल्कि सांपों के लिए भी खतरनाक है क्योंकि वे अपने प्राकृतिक आवास से दूर सूखे और बंजर इलाकों में फंस रहे हैं.
ट्रेनों में घूम रहे किंग कोबरा. (Image : Biotropica Journal)नई दिल्ली: भारतीय रेलवे में सफर के दौरान आपने अक्सर लोगों को अपनी सीट के लिए झगड़ते देखा होगा. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपकी सीट के नीचे या खिड़की पर दुनिया का सबसे लंबा जहरीला सांप किंग कोबरा बैठा हो? यह कोई फिल्मी सीन नहीं बल्कि एक हकीकत बनती जा रही है. हाल ही में ‘बायोट्रोपिका’ (Biotropica) में प्रकाशित स्टडी ने पूरे देश को चौंका दिया है. रिसर्च के अनुसार, भारत के वेस्टर्न घाट्स में पाए जाने वाले किंग कोबरा (Ophiophagus kaalinga) अब ट्रेनों को अपना परिवहन का जरिया बना रहे हैं. गोवा जैसे राज्यों में ट्रेनों के अंदर और रेलवे ट्रैक के पास इन खतरनाक सांपों के मिलने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं.
यह रिसर्च पिछले 22 सालों के डेटा पर आधारित है. इसमें साल 2002 से 2024 तक के किंग कोबरा रेस्क्यू रिकॉर्ड्स को खंगाला गया. एक्सपर्ट्स ने पाया कि गोवा के बिजी रेलवे कॉरिडोर के पास कोबरा के मिलने की फ्रीक्वेंसी बहुत ज्यादा है. साल 2017 में गोवा में एक चलती ट्रेन में सांप मिलने के बाद से इस पर बारीकी से काम शुरू हुआ. इसके बाद 2019 में उत्तराखंड की एक ट्रेन और 2023 में गुजरात की ट्रेन में भी इंडियन कोबरा को खिड़की पर बैठा पाया गया. ये घटनाएं बताती हैं कि रेलवे अब इन वन्यजीवों के लिए एक अनचाहा रास्ता बन गया है.
ट्रेनों में क्यों चढ़ रहे हैं खतरनाक किंग कोबरा?
किंग कोबरा जैसे बड़े शिकारी सांप आखिर ट्रेनों की बोगियों या मालगाड़ियों में क्यों घुस रहे हैं? रिसर्चर्स का मानना है कि इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं. पहला है शिकार की तलाश. रेलवे ट्रैक और यार्ड्स में अक्सर चूहे और दूसरे छोटे सांप आसानी से मिल जाते हैं. इनके पीछे भागते हुए किंग कोबरा ट्रेन के डिब्बों या मालगाड़ी के नीचे छिप जाते हैं. दूसरा कारण है सुरक्षित ठिकाने की तलाश. ट्रेन के अंधेरे और ठंडे हिस्से इन सांपों को छिपने के लिए सही जगह लगते हैं. जब ट्रेन चलती है, तो ये सांप अनजाने में ही सैकड़ों किलोमीटर दूर निकल जाते हैं.
(a) गोवा, भारत में चंदोर स्टेशन का प्लेटफॉर्म के नीचे से नजारा, जिसमें पेड़-पौधे और कंक्रीट के खंभे दिख रहे हैं, जहां सांप मिला था.
(b) मजदूरों के रहने की जगह कंक्रीट के खंभों से बस एक कच्ची सड़क की दूरी पर है, जहां किंग कोबरा को देखा गया था.
(c) सांप रेलवे ट्रैक के ढेर के नीचे से निकला, जो साइट पर चल रहे रेलवे रखरखाव और मरम्मत के लिए रखे गए थे.
(d) वलसाड, गुजरात राज्य, भारत के पास चलती लोकशक्ति एक्सप्रेस ट्रेन में खिड़की पर एक भारतीय कोबरा (नाजा नाजा).
(तस्वीरें: दिकांश एस. परमार (a, b), सौरभ यादव (c), और समीर लखानी (d). क्रेडिट: बायोट्रोपिका (2026)। DOI: 10.1111/btp.70157)
क्या सांपों के लिए ‘काल’ बन रहा है रेलवे का सफर?
रिसर्च के मुताबिक, रेलवे इन सांपों के लिए एक ‘हाई-स्पीड कॉरिडोर’ की तरह काम कर रहा है. लेकिन यह उनके अस्तित्व के लिए बहुत बुरा है. किंग कोबरा आमतौर पर घने जंगलों, नदियों और नमी वाले इलाकों में रहना पसंद करते हैं. जब ये सांप ट्रेन के जरिए दूसरे शहरों या राज्यों में पहुंचते हैं, तो वहां का वातावरण उनके अनुकूल नहीं होता. कई बार ये सांप सूखे और कम हरियाली वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं जहां उनके लिए शिकार ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है. इस तरह का प्रवास उनकी आबादी के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है.
यात्रियों की जान को कितना बड़ा खतरा है?
किंग कोबरा का ट्रेन में होना इंसानों के लिए मौत का पैगाम हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किंग कोबरा किसी इंसान को काट ले, तो महज 15 मिनट के भीतर उसकी मौत हो सकती है. ट्रेन जैसे बंद और भीड़भाड़ वाले माहौल में सांप के होने से भगदड़ मच सकती है. डर के मारे लोग अक्सर सांप को मारने की कोशिश करते हैं, जो सांपों के संरक्षण के लिहाज से भी गलत है. सोशल मीडिया और सस्ते स्मार्टफोन की वजह से अब ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग ज्यादा हो रही है, जिससे पता चला है कि महज 30 दिनों के भीतर तीन बड़े मामले सामने आए थे.
क्या है इस समस्या का समाधान?
स्टडी करने वाली टीम का कहना है कि हमें रेलवे स्टाफ और यात्रियों को इस बारे में जागरूक करने की जरूरत है. स्नेक रेस्क्यू संस्थाओं और एनजीओ को रेलवे के साथ मिलकर काम करना होगा. अगर समय रहते इन सांपों को सही तरीके से रेस्क्यू नहीं किया गया, तो भविष्य में रेल यात्रा काफी जोखिम भरी हो सकती है. रेल प्रशासन को भी यार्ड्स और स्टेशनों के पास सफाई का ध्यान रखना होगा ताकि चूहों की संख्या कम हो और सांप वहां न आएं. यह इंसानी सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण, दोनों के लिए बहुत जरूरी है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 31, 2026, 17:47 IST

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