क्या रद्द हो जाएगा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव? विपक्ष ने कर रखी है बड़ी गलती!

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Last Updated:February 10, 2026, 23:22 IST

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे विपक्ष के लिए खुद की एक 'तकनीकी चूक' बड़ी मुसीबत बन गई है. प्रस्ताव में वर्तमान वर्ष 2026 की जगह बार-बार 2025 का उल्लेख किया गया है, जिसने इस पूरे संवैधानिक कदम की गंभीरता और कानूनी वैधता पर सवालिया निशान लगा दिया है.

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लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला के ख‍िलाफ अव‍िश्‍वास प्रस्‍ताव पेश क‍िया गया है.

विपक्षी दल इंडिया अलायंस ने लोकसभा के स्‍पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस तो दिया, लेकिन जोश में ऐसी गलती कर दी, जिससे अब इस पूरे प्रस्ताव के रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विपक्ष ने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है.

विपक्ष की सबसे बड़ी फजीहत उस समय हुई जब यह सामने आया कि अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों की भरमार है. पूरे नोटिस में जहां साल 2026 होना चाहिए था, वहां बार-बार 2025 लिखा गया. संसदीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज में तारीख और वर्ष की गलती को टाइपिंग एरर कहकर टाला नहीं जा सकता. यह विपक्ष की तैयारी और संजीदगी पर बड़ा सवालिया निशान है.

क्या कहता है कानून और नियम?

संसद के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के तहत किसी भी प्रस्ताव, खासकर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (संविधान के अनुच्छेद 94-C के तहत) में हर जानकारी का सटीक और तथ्यात्मक होना अनिवार्य है. नियम स्पष्ट कहते हैं कि यदि नोटिस में कोई भी तकनीकी त्रुटि (जैसे गलत साल या गलत संदर्भ) है, तो लोकसभा सचिवालय उसे स्वीकार करने से इनकार कर सकता है.

क्‍या पहले भी हुआ ऐसा?

अभी हाल ही में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव सिर्फ इसलिए गिर गया था क्योंकि उनके सरनेम की स्पेलिंग में गलती थी. स्पीकर को हटाने के लिए 14 दिन का अग्रिम नोटिस देना होता है. अगर नोटिस तकनीकी रूप से दोषपूर्ण है, तो उन 14 दिनों की गिनती शुरू ही नहीं होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया शून्य हो जाती है.

राजनीतिक असर

विपक्ष ने अनुच्छेद 94(सी) के तहत गौरव गोगोई के नेतृत्व में 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दोपहर 1:14 बजे जमा तो कर दिया, लेकिन ‘2025’ वाली गलती ने उन्हें बैकफुट पर धकेल दिया है. एक तरफ तकनीकी गलती ने फजीहत कराई, तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने अभी तक इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे विपक्षी एकजुटता की दरार भी उजागर हो गई है. अगर लोकसभा सचिवालय इस आउटडेटेड नोटिस को खारिज कर देता है, तो विपक्ष के पास दोबारा नया नोटिस जमा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. इससे न केवल विपक्ष की रणनीति को झटका लगेगा, बल्कि सदन में उनकी फजीहत भी तय है.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें

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First Published :

February 10, 2026, 23:22 IST

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