Last Updated:March 04, 2026, 08:25 IST
पोलैंड के व्रोकला में एक असली 80 टन का स्टीम इंजन सीधे आसमान की ओर रुख किए हुए खड़ा है, जिसे 'स्वर्ग की ट्रेन' कहा जाता है. ऐसा लगता है मानो यह कुदरत को चुनौती दे रहा हो. इस अनोखे आइडिया ने आज इसे पोलैंड का सबसे मशहूर और बड़ा शहरी स्मारक बना दिया है.

इंसानी कल्पना की कोई सीमा नहीं होती और जब यह कल्पना कला और इंजीनियरिंग से मिल जाती है, तो ‘ट्रेन टू हेवन’ जैसा अजूबा जन्म लेता है. पोलैंड के खूबसूरत शहर व्रोकला (Wroclaw) के स्ट्रेजगोम्स्की स्क्वैयर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जिसे देखकर पहली बार में किसी को भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं होता. यहां एक असली, भारी-भरकम स्टीम लोकोमोटिव इंजन पटरी के साथ सीधा खड़ा है, जैसे वह जमीन छोड़कर सीधे स्वर्ग की ओर उड़ान भरने वाला हो. इसे ‘स्वर्ग की ट्रेन’ कहा जाता है. 30 मीटर लंबे और 80 टन वजनी इस स्मारक को पोलैंड की सबसे बड़ी ‘अर्बन मूर्तिकला’ माना जाता है. ऐसा लगता है मानो यह कुदरत को चुनौती देने को तैयार है. इस अद्भुत स्मारक के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है जितना कि यह खुद दिखता है.
व्रोकला के मशहूर कलाकार आंद्रेज जारोड्स्की (Andrzej Jarodzki) ने इस प्रोजेक्ट की नींव सालों पहले रखी थी. दिलचस्प बात यह है कि उन्हें यह विचार तब आया जब वे अपने बेटे के रेल इंजन वाले खिलौने के साथ खेल रहे थे. खेल-खेल में उन्होंने खिलौना इंजन को सीधा खड़ा कर दिया और तभी उनके दिमाग में बिजली कौंधी कि क्यों न एक असली ट्रेन के साथ ऐसा कुछ किया जाए. हालांकि, एक विशाल रेल इंजन को सीधा खड़ा करना कोई आसान काम नहीं था और इसे हकीकत में बदलने के लिए उन्हें सालों तक इंतजार करना पड़ा. साल 2010 में जारोड्स्की का यह सपना तब पूरा हुआ, जब व्रोकला की एक बड़ी डेवलपर कंपनी ‘आर्चीकॉम’ ने शहर में अपने 20 साल पूरे होने की खुशी में एक यादगार स्मारक बनाने का फैसला किया. इस प्रोजेक्ट के लिए एक म्यूजियम से 65 साल पुराने ‘Ty2-1035’ सीरीज के स्टीम इंजन को लाया गया.
यह इंजन कभी पटरियों पर दौड़ता था, लेकिन अब इसे एक कलाकृति में तब्दील कर दिया गया है. इसे स्थापित करने के लिए भारी-भरकम क्रेनों और विशेष नींव का इस्तेमाल किया गया, ताकि 80 टन का यह लोहा बिना किसी खतरे के सीधा खड़ा रह सके. प्रामाणिक सोर्सेस और लोकल आर्ट एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘ट्रेन टू हेवन’ सिर्फ एक दिखावटी ढांचा नहीं है, बल्कि यह प्रगति और इंसानी जज्बे का प्रतीक है. यह स्मारक व्रोकला की औद्योगिक विरासत को आधुनिक कला से जोड़ता है. व्रोकला शहर अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर है, लेकिन इस ‘आसमानी ट्रेन’ ने शहर के पर्यटन को एक नई ऊंचाई दी है. आज यह जगह व्रोकला के सबसे लोकप्रिय फोटोग्राफी पॉइंट्स में से एक बन चुकी है. इस स्मारक को लेकर कुछ रोचक तथ्य भी हैं.
30 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह इंजन रात के समय रोशनी में नहाया हुआ और भी भव्य नजर आता है. स्थानीय लोगों के बीच इसे ‘Pociąg do Nieba’ के नाम से जाना जाता है. कलाकार जारोड्स्की का कहना है कि यह ट्रेन उस ‘असंभव’ को दर्शाती है, जिसे हम मुमकिन बना सकते हैं. जब लोग इसके नीचे खड़े होते हैं, तो उन्हें अपनी लघुता और इंसानी निर्माण की विशालता का अहसास होता है. भले ही इसे बने कुछ ही साल हुए हैं, लेकिन ‘ट्रेन टू हेवन’ ने व्रोकला की पहचान बदल दी है. यह हमें सिखाता है कि प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है, चाहे वह बच्चे का छोटा सा खिलौना ही क्यों न हो. आज यह स्मारक पोलैंड के गौरव का प्रतीक है और दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है.
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First Published :
March 04, 2026, 08:25 IST

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