Last Updated:February 26, 2026, 13:59 IST
Telangana Highcourt News: तेलंगाना हाईकोर्ट में एक शख्स ने खुद को पहले पाकिस्तानी नागरिक बताया, लेकिन सुनवाई के दौरान अचानक भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया. सरकारी रिकॉर्ड में पासपोर्ट का कोई डिटेल्स नहीं मिलने पर कोर्ट ने कड़े सवाल उठाए. विरोधाभासी दस्तावेजों के बीच याचिका वापस ले ली गई और जांच एजेंसियों को आगे कार्रवाई की छूट दी गई.

Telangana Highcourt News: तेलंगाना हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने कोर्ट को भी चौंका दिया. एक शख्स जो खुद को पहले पाकिस्तानी नागरिक बता चुका था, अचानक सुनवाई के दौरान भारतीय पासपोर्ट लेकर कोर्ट पहुंच गया. इसके बाद मामला पहचान, दस्तावेजों की सच्चाई और कानूनी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया. कोर्ट में जैसे-जैसे तथ्य सामने आते गए, सवाल बढ़ते गए और जवाब कम पड़ते नजर आए. जजों ने भी साफ कहा कि हर सुनवाई में नए तथ्य सामने आना मामले को और उलझा रहा है. यही वजह रही कि यह केस अचानक चर्चा का विषय बन गया.
हैदराबाद के याकूतपुरा निवासी 33 साल के सैयद अली हुसैन इमरान ने कोर्ट से पुलिस पूछताछ पर रोक लगाने की मांग की थी. उनका दावा था कि वह भारत में पैदा हुए और यहीं पले-बढ़े हैं. लेकिन सरकारी रिकॉर्ड कुछ और कहानी बता रहे थे. सुनवाई के दौरान जब उनके वकील ने 2022 में जारी भारतीय पासपोर्ट पेश किया तो कोर्ट समेत सरकारी पक्ष भी हैरान रह गया. क्योंकि गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में ऐसे किसी पासपोर्ट का कोई उल्लेख नहीं मिला. इसके बाद कोर्ट में तीखे सवालों की झड़ी लग गई.
क्या है पूरा विवाद?
सरकार की ओर से पेश दलीलों में कहा गया कि इमरान का जन्म कराची में हुआ था और उनकी मां के पाकिस्तानी पासपोर्ट में उनका नाम ‘इमरान आबिद उर्फ इमरान हुसैन’ दर्ज था. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इमरान ने खुद 2025 में लॉन्ग-टर्म वीजा के लिए आवेदन करते समय खुद को पाकिस्तानी नागरिक बताया था. वहीं इमरान का कहना था कि पुलिस उन्हें जबरन वीजा आवेदन करने के लिए दबाव बना रही थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि अगर उनके पास भारतीय पासपोर्ट पहले से था, तो पुलिस जांच के दौरान उन्होंने यह दस्तावेज क्यों नहीं दिखाया. कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पासपोर्ट में दर्ज नाम और उनकी मां के दस्तावेजों में दर्ज नाम अलग-अलग हैं. इन विरोधाभासों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बेंच ने सख्त टिप्पणी की. अंततः कोर्ट ने कहा कि वह पासपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच करने वाली एजेंसी नहीं है. याचिकाकर्ता के वकील ने रिट अपील वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. साथ ही अधिकारियों को कानून के अनुसार आगे कार्रवाई की छूट दे दी गई.कोर्ट इस मामले में सबसे ज्यादा किस बात से हैरान हुई?
कोर्ट की हैरानी की मुख्य वजह यह थी कि याचिकाकर्ता पहले खुद को पाकिस्तानी नागरिक बता चुका था और वीजा के लिए आवेदन भी कर चुका था. लेकिन अचानक सुनवाई के दौरान भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया गया. सरकारी रिकॉर्ड में उस पासपोर्ट का कोई विवरण नहीं मिला. साथ ही नाम और पहचान से जुड़े दस्तावेजों में कई विरोधाभास पाए गए, जिससे कोर्ट ने मामले को गंभीर माना.
सरकार ने इमरान के खिलाफ क्या प्रमुख तथ्य रखे?
सरकारी पक्ष ने बताया कि इमरान का जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था और उनकी मां के पाकिस्तानी पासपोर्ट में उनका नाम दर्ज था. इसके अलावा उन्होंने स्वयं लॉन्ग-टर्म वीजा के लिए आवेदन करते समय पाकिस्तानी नागरिक होने की बात स्वीकार की थी. सरकार ने यह भी कहा कि भारतीय पासपोर्ट जारी होने का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.
कोर्ट ने अंतिम फैसले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट की असलियत जांचना कोर्ट का काम नहीं है. यह जांच संबंधित सरकारी एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र है. इसलिए याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कोर्ट ने प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई जारी रखने की छूट दे दी. कोर्ट ने संकेत दिया कि दस्तावेजों की सत्यता अब जांच एजेंसियां तय करेंगी.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
February 26, 2026, 13:59 IST

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