गैस और कब्जा का है काल, 15 मिनट में होगा तैयार, आयुर्वेदाचार्य ने बताया गजब आयुर्वेदिक काढ़ा

2 hours ago

Last Updated:February 23, 2026, 08:43 IST

यदि कब्ज की समस्या पुरानी है और बार-बार परेशान करती है तो वैद्य ने इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक विशेष आयुर्वेदिक कोर्स का सुझाव दिया है. इस उपचार में हर्रा, बहेड़ा और आंवला (जिसे त्रिफला कहा जाता है) के साथ सनई पत्ती और मरोड़ फली का मिश्रण उपयोग किया जाता है. सनई पत्ती आंतों की सक्रियता बढ़ाती है, जिससे....

गैस और कब्जा का है काल, 15 मिनट में तैयार होगा गजब आयुर्वेदिक काढ़ाZoom

सीतामढ़ी: आज के दौर में असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिहीनता के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं महामारी का रूप ले चुकी हैं. एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक वैद्य ने बताया कि वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत आबादी गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रही है. आयुर्वेद में माना जाता है कि पेट ही समस्त रोगों का जड़ है. यदि पेट साफ नहीं रहता, तो इसका सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर पर पड़ता है. बाजार में मिलने वाली एलोपैथिक दवाएं अक्सर तात्कालिक राहत तो देती हैं, लेकिन समस्या को जड़ से खत्म करने में विफल रहती हैं. ऐसे में आयुर्वेद की प्राचीन विधाएं और रसोई में मौजूद मसाले स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो रहे हैं. तो आज हम आपको भी एक घरेलू नुस्खा बताने जा रहे हैं जो गैस और कब्ज से राहत दिलाने में लाभदायक है.

आयुर्वेदाचार्य राका बाबा ने एक विशेष घरेलू काढ़े की विधि साझा की है, जो गैस और कब्ज पर सीधा प्रहार करता है. इसे बनाने के लिए एक लीटर पानी को अच्छी तरह गर्म करें और उसमें अजवाइन, मेथी दाना, तुलसी के पत्ते और काला नमक डालें. इस मिश्रण को धीमी आंच पर कम से कम 15 मिनट तक उबालना चाहिए ताकि सभी औषधियों का अर्क पानी में पूरी तरह समाहित हो जाए. उबालने के बाद इस पानी को छान लें. अजवाइन और मेथी पाचक अग्नि को प्रज्वलित करते हैं, जबकि काला नमक और तुलसी पेट के भारीपन को कम कर पाचन तंत्र को सुचारू बनाने में मदद करते हैं. यह काढ़ा न केवल गैस से राहत देता है, बल्कि आंतों में जमा पुरानी गंदगी को साफ करने में भी प्रभावी है.

​जड़ से इलाज के लिए ‘पंचतत्व’ जड़ी-बूटियां
यदि कब्ज की समस्या पुरानी है और बार-बार परेशान करती है तो वैद्य ने इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक विशेष आयुर्वेदिक कोर्स का सुझाव दिया है. इस उपचार में हर्रा, बहेड़ा और आंवला (जिसे त्रिफला कहा जाता है) के साथ सनई पत्ती और मरोड़ फली का मिश्रण उपयोग किया जाता है. सनई पत्ती आंतों की सक्रियता बढ़ाती है, जिससे मल त्याग में आसानी होती है, वहीं मरोड़ फली पेट के मरोड़ और ऐंठन को दूर करती है. इन जड़ी-बूटियों का संतुलित मेल पाचन मार्ग को पुनर्जीवित करता है और शरीर के दोषों को संतुलित कर मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है. यह प्राकृतिक उपचार रसायनों के दुष्प्रभाव से मुक्त है और लंबे समय तक लाभ प्रदान करता है.

​सावधानियां और जीवनशैली में बदलाव
आयुर्वेदिक उपचार का अधिकतम लाभ उठाने के लिए सही दिनचर्या का होना भी अनिवार्य है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस काढ़े के सेवन के साथ-साथ व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और अपने भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों जैसे हरी सब्जियां और फलों को शामिल करना चाहिए. रात का भोजन हल्का और सोने से कम से कम दो-तीन घंटे पहले करना फायदेमंद रहता है. यह नुस्खा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो लंबे समय से चूर्ण या टैबलेट पर निर्भर हैं. प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के जरिए न केवल पेट साफ होता है, बल्कि चेहरे पर चमक आती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

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Rajneesh Singh

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Location :

Sitamarhi,Bihar

First Published :

February 23, 2026, 08:43 IST

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