ग्रेट निकोबार इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट: कंसल्टेंसी हायर करने के लिए मंगाए गए टेंडर

2 hours ago

होमताजा खबरदेश

निकोबार इंटरनेशनल एयरपोर्ट: कंसल्टेंसी हायर करने के लिए मंगाए गए टेंडर

Last Updated:March 11, 2026, 13:34 IST

Great Nicobar Airport Project: ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना को एनजीटी की मंजूरी मिल चुकी है. इसके बाद अब एएआई ने कंसल्टेंसी सेवाओं हेतु टेंडर आमंत्रित किए हैं. इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना है.

 कंसल्टेंसी हायर करने के लिए मंगाए गए टेंडरZoom

अंडमान निकोबार की यह परियोजना देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. फाइल फोटो

Great Nicobar Airport Project: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना अब वास्तविकता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुकी है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने हाल ही में इस हवाई अड्डे के निर्माण के लिए कंसल्टेंसी सेवाओं हेतु टेंडर आमंत्रित किए हैं, जो वर्षों की योजना, बहस और पर्यावरणीय चुनौतियों के बाद एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है. ऐसा तब हुआ है जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल के फैसले में पर्यावरण मंजूरी को बरकरार रखा और संबंधित चुनौतियों को खारिज कर दिया. एनजीटी ने परियोजना में पर्याप्त सुरक्षा उपायों का हवाला देते हुए इसे रणनीतिक महत्व का बताते हुए मंजूरी दी. यह फैसला फरवरी 2026 में आया, जिसके बाद परियोजना को गति मिली.

टेंडर दस्तावेजों के अनुसार यह ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी भाग में गांधी नगर और शास्त्री नगर के बीच प्रस्तावित है, जो कैंपबेल बे से लगभग 30 किलोमीटर दूर है. ग्रेट निकोबार द्वीप इंडोनेशिया के सुमात्रा से मात्र 180 किलोमीटर दूर स्थित है और मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले विश्व के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट्स के निकट है. यह स्थिति इसे भारत के लिए भारतीय महासागर क्षेत्र में रणनीतिक महत्व प्रदान करती है. वर्तमान में द्वीप पर आबादी कम है और घने जंगल तथा बायोस्फीयर रिजर्व के लिए जाना जाता है, लेकिन विकास के साथ यह बदलने वाला है.

2040 तक आबादी लगभग 3.25 लाख

ट्रैफिक पूर्वानुमान के अनुसार द्वीप पर विकास तेज होने से 2040 तक आबादी लगभग 3.25 लाख तक पहुंच सकती है, जिससे सालाना यात्री मांग करीब 13.5 लाख (1.35 मिलियन) हो जाएगी. शुरुआती वर्षों में ज्यादातर उड़ानें घरेलू होंगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय रूट पर्यटन के विकास के साथ धीरे-धीरे शुरू होंगे. मास्टर प्लान 50 वर्षीय है, जिसमें चार चरणों में क्षमता विस्तार होगा. रनवे उत्तर-दक्षिण दिशा में होगा, ताकि विमान ज्यादातर समुद्र के ऊपर से आएं-जाएं और बस्तियों में कम व्यवधान हो. भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानों को समायोजित करने की क्षमता भी रखी गई है.

परियोजना का एक मजबूत रणनीतिक आयाम है. भारतीय नौसेना के लिए लगभग 100 एकड़ भूमि आरक्षित है, जिसमें विमान हैंगर, ऑपरेशनल सुविधाएं और कर्मियों के लिए आवास शामिल हैं. यह भारत को क्षेत्र में निगरानी और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा. हवाई अड्डा ड्यूल-यूज होगा- नौसेना एयरसाइड ऑपरेशंस और एयर ट्रैफिक कंट्रोल संभालेगी, जबकि एएआई यात्री टर्मिनल और सिविलियन ऑपरेशंस देखेगी. यह हवाई अड्डा ग्रेट निकोबार को रणनीतिक और आर्थिक हब बनाने की सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, टाउनशिप, पावर प्लांट आदि शामिल हैं. कुल परियोजना की लागत 80,000-90,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. स्थानीय निवासियों के लिए यह क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. वर्तमान में मुख्य भूमि तक पहुंच लंबी समुद्री यात्रा या उड़ानों से होती है. नया हवाई अड्डा तेज यात्रा, बेहतर सेवाएं, पर्यटन और व्यापार से आर्थिक विकास लाएगा. हालांकि, परियोजना पर्यावरणविदों की चिंताओं का विषय बनी हुई है. जंगलों की कटाई, जैव-विविधता प्रभाव और कार्बन उत्सर्जन जैसे मुद्दे उठे हैं. एनजीटी ने मंजूरी देते हुए सख्त अनुपालन के निर्देश दिए हैं.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

March 11, 2026, 13:34 IST

Read Full Article at Source