जब ईरान ने तीन जहाजों को शरण देने की मांग की तो भारत ने एक को ही शरण क्यों दी? खुल गया राज

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जब ईरान ने तीन जहाजों को शरण देने की मांग की तो भारत ने एक को ही शरण क्यों दी?

Last Updated:March 09, 2026, 20:56 IST

ईरान के तीन युद्धपोतों में से केवल IRIS Lavan भारतीय बंदरगाह कोच्चि पहुंचा, जबकि बाकी दो श्रीलंका चले गए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में स्पष्ट किया कि भारत से ईरान ने तीन जहाजों के ल‍िए अनुमत‍ि मांगी थी.

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iris dena जब डूबा तो उसे बचाने के ल‍िए श्रीलंका की नेवी मैदान में उतर आई. (Reuters)

नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच भारतीय बंदरगाहों पर ईरानी युद्धपोतों की एंट्री को लेकर बड़ा सस्पेंस खत्म हो गया है. संसद से लेकर रायसीना डायलॉग तक इस बात की चर्चा थी कि आखिर जब ईरान ने तीन जहाजों के लिए अनुमति मांगी थी, तो भारत के पोर्ट पर केवल एक ही जहाज क्यों नजर आया? अब इस रहस्य से पर्दा उठ गया है.

संसद में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ईरानी पक्ष ने 28 फरवरी को अपने तीन युद्धपोतों के लिए भारत से अनुमति मांगी थी. इससे पहले रायसीना डायलॉग में भी विदेश मंत्री ने जिक्र किया था कि ईरानी पक्ष का एक जहाज भारतीय बंदरगाह पर आना चाहता था. इसे लेकर कंफ्यूजन हो गया था. संसद में इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय से स्पष्टीकरण भी मांगा गया. सवाल यह था कि अगर मंजूरी तीन जहाजों को मिली थी, तो बाकी दो भारतीय पोर्ट पर शरण लेने क्यों नहीं पहुंचे? क्या इसके पीछे कोई कूटनीतिक दबाव था या कोई और वजह?

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के मुताबिक, ईरान के अनुरोध पर भारत सरकार ने दरियादिली दिखाते हुए 1 मार्च को ईरानी नौसेना के तीन जहाजों  IRIS Lavan, Bushehr और Dena को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक (रुकने) करने की मंजूरी दे दी थी. भारत ने अपनी तरफ से ‘ग्रीन सिग्नल’ दे दिया था, लेकिन हकीकत में कोच्चि पोर्ट पर केवल IRIS Lavan ही पहुंचा.

बाकी दो जहाज कहां गए?

बाकी दो जहाजों के भारत न आने के पीछे का ‘राज’ अब सामने आ रहा है. जानकारी के अनुसार, जब भारत ने प्रक्रिया पूरी की, उसी बीच पड़ोसी देश श्रीलंका ने भी सक्रियता दिखाई. श्रीलंका ने भी ईरानी युद्धपोतों को अपने बंदरगाह पर आने के लिए आमंत्रित किया और उन्हें ‘पोर्ट कॉल’ (Port Call) की अनुमति दे दी.

माना जा रहा है कि सामरिक या तकनीकी कारणों से बाकी दो जहाजों ने श्रीलंका के निमंत्रण को स्वीकार किया और वहां के बंदरगाह का रुख कर लिया. यानी भारत की ओर से कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि यह ईरान का अपना फैसला या रूट का बदलाव था.

भारत की सतर्कता और कूटनीति

विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा गया है कि क्या इन जहाजों को अनुमति देते समय सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा गया था. जानकारों का कहना है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए ही यह अनुमति दी थी. फिलहाल, IRIS Lavan की कोच्चि में मौजूदगी और बाकी दो जहाजों का श्रीलंका जाना इस क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक हलचल की ओर इशारा कर रहा है.

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

March 09, 2026, 20:56 IST

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