जीएसटी सुधारों से कैंसर का इलाज हुआ सस्ता, एम्स शोधकर्ताओं की सराहना

1 hour ago

कैंसर देखभाल को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में हालिया जीएसटी सुधारों को एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं ने एक हालिया कमेंट्री में इसकी सराहना की है. फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अपनी कमेंट्री में, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग, बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल, एम्स दिल्ली के डॉ. अभिषेक शंकर (ऑन्कोलॉजिस्ट) और वैज्ञानिक डॉ. वैभव साहनी ने कहा कि जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए फैसलों से कैंसर रोगियों की वित्तीय परेशानी कम करने की दिशा में लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है.

शोधकर्ताओं के अनुसार, परिषद ने 33 जीवनरक्षक दवाओं को जीएसटी से पूरी तरह मुक्त करने की सिफारिश की, जिनमें कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. इन दवाओं पर पहले 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जो अब शून्य हो गया है. साथ ही, दुर्लभ रोगों और कैंसर के लिए तीन महत्वपूर्ण दवाओं पर पहले लगने वाला 5 प्रतिशत जीएसटी भी हटा दिया गया है. ये कदम विशेष रूप से उन पेटेंटेड दवाओं पर लागू होते हैं, जिनके जेनेरिक विकल्प उपलब्ध नहीं हैं.

इसके अलावा, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी (पहले 18 प्रतिशत) को पूरी तरह हटा दिया गया है. इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए उपचार की वित्तीय बाधाएं कम होंगी. डॉ. शंकर ने कहा, “कई जीवनरक्षक कैंसर दवाओं और दुर्लभ रोगों की थेरेपी पर जीएसटी की पूर्ण छूट, साथ ही मेडिकल उपकरणों और डायग्नोस्टिक्स पर कर में कमी से मरीजों का आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च काफी कम होगा, बशर्ते निर्माता इसका पूरा लाभ मरीजों तक पहुंचाएं.”

महंगे तंबाकू उत्पादों से भी हो रहा फायदा

एक अन्य महत्वपूर्ण कदम में तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी स्लैब को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जो देश में किसी भी वस्तु के लिए सबसे ऊंचा टैक्स स्लैब है. यह बदलाव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर अधिक कर लगाने की दिशा में सकारात्मक है. इससे उत्पन्न अतिरिक्त राजस्व को कैंसर देखभाल और रोकथाम के लिए पुनर्निर्देशित किया जा सकता है. शोधकर्ताओं ने साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि तंबाकू पर कर वृद्धि से स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में.

चार भारतीय राज्यों में किए गए एक सबनेशनल अध्ययन (एक्सटेंडेड-कॉस्ट इफेक्टिवनेस मॉडल) के अनुसार सिगरेट पर 10 रुपये प्रति पैकेट की कीमत वृद्धि और 10 प्रतिशत एड वेलोरम टैक्स से उच्च आय वर्ग के 65,762 और निम्न आय वर्ग के 4,85,725 लोग धूम्रपान छोड़ सकते हैं. इससे 6,65,000 मौतें रोकी जा सकती हैं, 1.19 करोड़ जीवन वर्ष प्राप्त हो सकते हैं और उपचार लागत में अरबों रुपये की बचत हो सकती है.

इसके अलावा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए 76.25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बचत संभव है. तंबाकू टैक्स में 50 प्रतिशत की वृद्धि से एक दशक में 1.8 मिलियन मौतें रोकी जा सकती हैं और अरबों रुपये की बचत हो सकती है. भारत में सिगरेट की अफॉर्डेबिलिटी स्थिर या सुधरी है, जबकि स्मोकलेस तंबाकू की अफॉर्डेबिलिटी बढ़ी है, इसलिए टैक्स वृद्धि का स्वागत योग्य कदम है.

डॉ. शंकर ने कहा कि तंबाकू पर उच्च जीएसटी से भविष्य में कैंसर का बोझ कम होगा और राजस्व से कैंसर देखभाल में निवेश बढ़ेगा. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इन सुधारों के वास्तविक लाभ के लिए प्रभावी क्रियान्वयन, निर्माताओं को समय पर टैक्स रिफंड और निरंतर मॉनिटरिंग जरूरी है.

कुल मिलाकर, ये बदलाव सरलीकृत टैक्स संरचना, दवाओं-उपकरणों पर कर हटाने और तंबाकू पर उच्च कर के माध्यम से कैंसर देखभाल को सस्ता बनाने और समाज में स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. एम्स के शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि लाभ पूरी तरह से मरीजों तक पहुंचे, तो यह कैंसर रोगियों के लिए एक बड़ा राहत होगा.

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