Last Updated:March 03, 2026, 21:45 IST
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है. हवाई हमलों की खबर के बाद वॉल स्ट्रीट में भारी बिकवाली देखने को मिली. Dow Jones में 1100 अंकों की गिरावट से निवेशकों की चिंता साफ नजर आई. तेल की कीमतों में उछाल और ट्रंप के बयान ने बाजार की बेचैनी और बढ़ा दी.

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की धड़कन तेज कर दी है. मंगलवार, 3 मार्च को वॉल स्ट्रीट में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों को डर है कि यह टकराव लंबा खिंच सकता है. इसी आशंका ने बाजार में बिकवाली की तेज लहर पैदा कर दी.
एयरस्ट्राइक के बाद वॉल स्ट्रीट में भारी बिकवाली
अमेरिकी और इजरायली विमानों द्वारा ईरानी ठिकानों पर नए हवाई हमलों की खबर आते ही बाजार में घबराहट फैल गई. इसका सीधा असर Dow Jones Industrial Average पर दिखा, जो 1100 अंकों तक टूट गया. शुरुआती कारोबार में यह करीब 2.23 फीसदी नीचे चला गया. S&P 500 में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई, जबकि Nasdaq Composite 500 से ज्यादा अंक फिसल गया. निवेशक जोखिम से बचने के लिए शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ने लगे. बाजार में यह संदेश साफ दिखा कि अनिश्चितता बढ़ते ही पूंजी तेजी से बाहर निकलती है.
तेल में 8 फीसदी से ज्यादा उछाल, महंगाई की चिंता गहराई
तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में 8.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई. ट्रेडर्स को आशंका है कि पश्चिम एशिया के अहम सप्लाई रूट्स पर असर पड़ सकता है. अगर आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक स्तर पर महंगाई फिर सिर उठा सकती है. सोना, जो लगातार चार सत्रों से चढ़ रहा था, अचानक 3 फीसदी से ज्यादा टूट गया. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक मुनाफावसूली और बदलती जोखिम धारणा के चलते अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल कर रहे हैं.
ट्रंप के बयान से बढ़ी बेचैनी, लंबा खिंच सकता है संघर्ष
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयान में यह कहकर चिंता बढ़ा दी कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना की जमीनी तैनाती से भी इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक कार्रवाई करने की क्षमता रखता है. इस बयान ने संकेत दिया कि टकराव जल्दी खत्म होने वाला नहीं है. ईरान पहले ही क्षेत्र के तेल ठिकानों और अन्य स्थानों पर जवाबी हमले कर चुका है. अब दुनिया भर के बाजार अगली चाल का इंतजार कर रहे हैं. कम से कम नौ देशों पर इस बढ़ते संघर्ष का असर बताया जा रहा है. ऐसे में निवेशकों को आने वाले दिनों में तेज उतार-चढ़ाव और अस्थिरता के लिए तैयार रहना पड़ सकता है.
एशियाई बाजारों में कोहराम
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के विस्तार की आशंका ने एशियाई शेयर बाजारों में भारी हलचल मचा दी है, जिसके चलते 3 मार्च को लगातार दूसरे दिन निवेशकों ने जमकर बिकवाली की. दक्षिण कोरियाई बाजार में 7.24 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट और एमएससीआई एशिया पैसिफिक इंडेक्स के 3 प्रतिशत लुढ़कने से निवेशकों की घबराहट साफ झलक रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के शामिल होने और लड़ाई के लंबा खिंचने की संभावना ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे भारत सहित तमाम एशियाई देशों के निवेशकों के बीच आशावाद खत्म होता दिख रहा है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
March 03, 2026, 21:45 IST

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