Last Updated:March 03, 2026, 15:15 IST
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में लगे कारीगरी बाजार में इस बार देशभर की पारंपरिक कलाओं की झलक देखने को मिल रही है. लेकिन इस भीड़ में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र लाख की चूड़ी है. जो राजस्थान के जयपुर से आया है
राजधानी के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में लगे कारीगरी बाजार में इस बार देशभर की पारंपरिक कलाओं की झलक देखने को मिल रही है. लेकिन इस भीड़ में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बने हैं. राजस्थान के जयपुर से आए लाख चूड़ी कलाकार इस्लाम अहमद, जो अपनी 300 साल पुरानी पारिवारिक कला को आज भी उसी समर्पण से जीवित रखे हुए हैं.
300 साल पुरानी विरासत, सातवीं पीढ़ी का संकल्प
जयपुर की पहचान उसकी रंगीन संस्कृति और हस्तशिल्प से है. इसी शहर से ताल्लुक रखने वाले इस्लाम अहमद बताते हैं कि उनका परिवार करीब 300 वर्षों से लाख की चूड़ियां बना रहा है.
इतिहास के अनुसार जब महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने जयपुर को बसाया और उसे विश्व प्रसिद्ध शहर बनाने का सपना देखा, तब विभिन्न देशों से कारीगरों को बुलाया गया. इस्लाम अहमद के पूर्वजों को भी ईरान से जयपुर लाया गया. तब से यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही और आज इस्लाम अहमद इस परंपरा की सातवीं कड़ी हैं.
लाख चूड़ियों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
राजस्थान में लाख की चूड़ियां बेहद पवित्र मानी जाती हैं. किसी भी शुभ कार्य चाहे विवाह हो, त्योहार हो या कोई नया आरंभ घर की महिलाएं सबसे पहले लाख की चूड़ियां पहनती हैं. उसके बाद ही मांगलिक कार्य शुरू होता है.लाख का उल्लेख पौराणिक कथाओं में भी मिलता है. हालांकि इस्लाम अहमद के परिवार की इस कला का प्रामाणिक इतिहास लगभग तीन शताब्दियों पुराना है.
कैसे बनती है लाख की चूड़ी
इस्लाम अहमद रोजाना करीब 100 चूड़ियां तैयार कर लेते हैं. वे बताते हैं कि लाख इस समय लगभग 2400 रुपये प्रति किलो है. यह प्राकृतिक रेज़िन कुसुम और बेसाख जैसे पेड़ों से प्राप्त होती है.चूड़ी बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह हाथों से होती है. गर्म लख को आकार देकर उसमें रंग और डिजाइन जोड़े जाते हैं. हर चूड़ी में कारीगर की मेहनत और आत्मा झलकती है. यही कारण है कि एक चूड़ी की कीमत 300 रुपये से शुरू होती है.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर जयपुर की पहचान
इस्लाम अहमद सिर्फ स्थानीय कलाकार नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वर्ष 2022 में उन्होंने Cannes Film Festival में लाइव प्रदर्शन कर भारत की पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया.वे सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, दुबई, कुवैत, बहरीन, ऑस्ट्रेलिया और हंगरी समेत 14 देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं. उनका कहना है कि विदेशों में लोग भारतीय हस्तकला की बहुत सराहना करते हैं और हाथ से बनी चीजों को विशेष महत्व देते हैं.
वोकल फॉर लोकल की मिसाल
इस्लाम अहमद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और हर हाथ को हुनर अभियान को अपनी कला के जरिए मजबूत कर रहे हैं. उनका मानना है कि हस्तशिल्प को बढ़ावा देना सिर्फ परंपरा को बचाना नहीं, बल्कि कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना भी है.
First Published :
March 03, 2026, 15:15 IST

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