Under Ground Railway Tunnel under Chicken Neck News: बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है.
सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया, ‘केंद्र नॉर्थईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’
अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए
कहां से कहां तक ?
प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है.
बजट पर बात करते हुए जानकारी दी
रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’
डिफेंस के लहजे से अहम
अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है.
सुरक्षा के लिए जरूरी
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पूर्वोत्तर भारत के लिए किस महत्वपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट की घोषणा की है?
जवाब: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पश्चिम बंगाल में स्थित 40 किलोमीटर लंबे रणनीतिक कॉरिडोर (चिकन्स नेक) में अंडरग्राउंड (भूमिगत) रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना की घोषणा की है. इस योजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले रेल मार्ग को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना है.
रणनीतिक कॉरिडोर या ‘चिकन्स नेक’ (Chicken’s Neck) से क्या तात्पर्य है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित भूमि के संकरे हिस्से को अक्सर ‘चिकन्स नेक’ कहा जाता है. यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी रास्ता है, जो सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
अंडरग्राउंड ट्रैक के अलावा मौजूदा रेल पटरियों के लिए क्या योजना बनाई गई है?
रेल मंत्री के अनुसार, केवल अंडरग्राउंड ट्रैक ही नहीं बिछाए जाएंगे, बल्कि इस कॉरिडोर में मौजूद रेल पटरियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम होगा. उन्होंने बताया कि मौजूदा रेल पटरियों को ‘फोर-लेन’ (चार-लाइन) बनाने की भी योजना है, ताकि रेल यातायात को और सुगम बनाया जा सके.
(पीटीआई इनपुट)

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