Last Updated:March 03, 2026, 11:52 IST
Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने 26 हिन्दू पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार डाला था. इस आतंकी हमले में हुए नए खुलासे के बाद NIA की जांच अब चीन तक पहुंच गई है. एजेंसी ने इस मामले में बीजिंग से मदद मांगी है.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाया है कि हमले से पहले रेकी और तैयारी के लिए इस्तेमाल किया गया संदिग्ध गोप्रो हीरा-12 ब्लैक कैमरा चीन के एक डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ा है. अब एजेंसी ने इस मामले में चीन से सहायता मांगी है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एनआईए ने जम्मू की एक अदालत में आवेदन दायर कर ‘लेटर रोगेटरी’ (LR) जारी करने की अनुमति मांगी थी. लेटर रोगेटरी वह औपचारिक न्यायिक अनुरोध होता है, जिसके जरिए किसी दूसरे देश से जांच में मदद और जानकारी मांगी जाती है.
अदालत ने सोमवार को एनआईए को चीन को एलआर जारी करने की अनुमति दे दी. अदालती आदेश के मुताबिक, जांच के दौरान कई फिजिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की गई. इनमें एक महत्वपूर्ण उपकरण GoPro Hero 12 Black कैमरा है, जो हमले से पहले की रेकी, मूवमेंट और आतंकी मॉड्यूल की तैयारी से जुड़ा माना जा रहा है.
चीनी डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ा कैमरा
एनआईए ने पहले नीदरलैंड स्थित गोप्रो निर्माता कंपनी से इस कैमरे की सप्लाई चेन और एक्टिवेशन से जुड़ी जानकारी मांगी थी. कंपनी की ओर से बताया गया कि यह कैमरा चीन स्थित एई ग्रुप इंटरनेशनल लिमिटेड नामक डिस्ट्रीब्यूटर को सप्लाई किया गया था.
साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि यह डिवाइस 30 जनवरी 2024 को चीन के डोंगगुआन शहर में एक्टिवेट किया गया था.
रेकी में इस्तेमाल का शक
निर्माता कंपनी ने साफ किया कि उसके पास आगे की खरीद-फरोख्त या अंतिम उपभोक्ता (एंड-यूजर) की जानकारी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में कैमरे के खरीदार, यूजर और उससे जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड की जानकारी केवल चीनी अधिकारियों की मदद से ही मिल सकती है.
जांच एजेंसी का मानना है कि इस कैमरे का इस्तेमाल हमले से पहले इलाके की रेकी, मूवमेंट की रिकॉर्डिंग और ऑपरेशन की तैयारी के लिए किया गया. इसलिए यह डिवाइस साजिश के अहम सबूत के रूप में देखा जा रहा है.
जब बैसरन में आतंकियों ने 26 लोगों को मार डाला
22 अप्रैल को पहलगाम के खूबसूरत बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक घोड़ा संचालक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था.
हमले के बाद भारत ने 7 मई की सुबह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी. 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्षविराम की घोषणा हुई.
सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई को दाचीगाम जंगल क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान हमले में शामिल तीन आतंकियों सुलेमान शाह, हमजा अफगानी उर्फ अफगान और जिब्रान को मार गिराया था.
एनआईए की जांच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है. चीन से मांगी गई जानकारी से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कैमरा किसने खरीदा, किसने इस्तेमाल किया और वह आतंकियों तक कैसे पहुंचा. जांच एजेंसियों का मानना है कि इस डिवाइस से साजिश के नेटवर्क और फंडिंग से जुड़े नए सुराग मिल सकते हैं.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
March 03, 2026, 11:52 IST

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