Last Updated:November 30, 2025, 14:52 IST
राजस्थान में 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी पर शौर्य दिवस मनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद तेज़ राजनीतिक रंग लेता गया, लेकिन अंत में यह मामला एक कथित फर्जी आदेश तक जा पहुंचा.
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था. (फाइल फोटो)राजस्थान में 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी पर शौर्य दिवस मनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद तेज़ राजनीतिक रंग लेता गया, लेकिन अंत में यह मामला एक कथित फर्जी आदेश तक जा पहुंचा. शिक्षा विभाग की ओर से शनिवार देर रात एक आदेश जारी होने की खबरें फैलीं, जिसमें सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 6 दिसंबर को शौर्य दिवस मनाने के निर्देश बताए गए थे. हालांकि, महज 12 घंटे के भीतर सरकार ने बैकफुट लेते हुए न सिर्फ इन कार्यक्रमों को रोक दिया, बल्कि अगले ही दिन यह कहकर नया मोड़ दे दिया कि वायरल हुआ आदेश फर्जी है.
वायरल आदेश में दावा किया गया था कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने 6 दिसंबर को शौर्य दिवस के रूप में मनाने के निर्देश जारी किए थे. प्रस्तावित कार्यक्रमों में भगवान राम के भजन-आरती के साथ विशेष प्रार्थना सभा, शौर्य यात्रा, राम मंदिर आंदोलन पर प्रतियोगिताएं, चित्रकला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं. आदेश में विशेष अतिथियों को बुलाने तक की बात कही गई थी.
शनिवार रात करीब नौ बजे यह आदेश शिक्षा मंत्री के मीडिया व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा हुआ, जिसके कुछ ही घंटे बाद रविवार सुबह शिक्षा मंत्री की ओर से संदेश आया कि परीक्षाओं के चलते 6 दिसंबर के कार्यक्रम फिलहाल स्थगित किए जा रहे हैं. उनका तर्क था कि 5-6 दिसंबर को स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए अन्य गतिविधियां सम्भव नहीं.
लेकिन विवाद तब और गहरा गया जब मुख्यमंत्री कार्यालय से शिक्षा निदेशक की ओर से एक खंडन जारी हुआ, जिसमें साफ कहा गया कि विभाग ने ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं किया और वायरल पत्र पूरी तरह फर्जी है. यह सवाल उठने लगे कि अगर आदेश फर्जी था, तो शिक्षा मंत्री के मीडिया ग्रुप में वह जारी कैसे हुआ और फिर उसे स्थगित करने की घोषणा क्यों करनी पड़ी?
इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि ‘सर्कस’ चल रहा है. पार्टी ने आरोप लगाया कि अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए सरकार सांप्रदायिकता का सहारा ले रही है, और शौर्य दिवस का कथित आदेश उसी रणनीति का हिस्सा था.
About the Author
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 30, 2025, 13:53 IST

1 hour ago
