Last Updated:January 05, 2026, 19:30 IST
China Construction Near Indian Border: लद्दाख के पैंगोंग झील के पास चीन भारत सीमा से सिर्फ 5 किमी दूर स्थायी कंक्रीट ढांचे बना रहा है. लेटेस्ट सैटेलाइट तस्वीरों ने बीजिंग की नई प्लानिंग के राज खोल दिए हैं. साल 2024 में तनाव कम होने के बावजूद यह निर्माण भारत के लिए चेतावनी है कि LAC पर शांति बेहद नाजुक है.
पैंगोंग झील के पास चीन की नई चालबाजी सामने आई है. (फोटो X/@detresfa_)China Construction Near Indian Border: लद्दाख की बर्फीली वादियों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. पैंगोंग झील के पास चीन की नई गतिविधियों ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. लेटेस्ट सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि चीन भारत की सीमा से महज पांच किलोमीटर दूर, बफर जोन के करीब, स्थायी कंक्रीट ढांचे खड़े कर रहा है. 2020 के गलवान झड़प के बाद से यह सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है कि बीजिंग शांति की बात करते हुए भी जमीनी हकीकत बदलने में जुटा है. सैटेलाइट तस्वीरों ने चीन के इरादों की परतें खोल दी हैं.
खास बात यह है कि यह गतिविधि ऐसे समय सामने आई है जब 2024 में भारत-चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें हुई थीं. दोनों देशों के बीच पैट्रोलिंग दोबारा शुरू हुई, सैन्य कमांडरों के बीच संवाद बढ़ा और सीमावर्ती इलाकों में अपेक्षाकृत शांति का माहौल दिखा. लेकिन अब पैंगोंग झील के पास दिख रहे ये कंक्रीट स्ट्रक्चर उस नाजुक शांति पर सवाल खड़े कर रहे हैं. संदेश साफ है चीन बातचीत की मेज पर मुस्कुराता है, लेकिन मैदान में अपनी पकड़ मजबूत करता रहता है.
China is constructing new buildings near the military buffer zone with India at Pangong Tso, while the activity is within Chinese held territory, it consolidates Beijing’s physical presence post the 2020 border dispute & subtly recalibrates its territorial claims in the region pic.twitter.com/RSR6km5YHg
क्या है सैटेलाइट इमेज का बड़ा खुलासा?
जियोस्ट्रैटेजिक मामलों के जानकार डेमियन साइमन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नई सैटेलाइट तस्वीरें साझा की हैं. इन तस्वीरों में पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे के पास चीनी नियंत्रण वाले क्षेत्र में नए कंक्रीट ढांचे उभरते दिखाई दे रहे हैं. ये इमारतें किसी अस्थायी कैंप जैसी नहीं, बल्कि स्थायी सैन्य निर्माण की ओर इशारा करती है. खास बात यह है कि ये ढांचे पीएलए की पहली पोस्ट से आगे, पियर और ट्रूप एकोमोडेशन के आसपास बनाए जा रहे हैं, जो भविष्य में सैनिकों की स्थायी तैनाती को आसान बना सकते हैं.
क्यों कर रहा है चीन इतनी तेजी से निर्माण?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह चीन की लंबे समय की रणनीति का हिस्सा है. 2020 के बाद बीजिंग ने समझ लिया कि केवल गश्त या अस्थायी टेंट से दबदबा कायम नहीं रखा जा सकता. द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट बताती है कि चीन विवादित और संवेदनशील इलाकों में भारत की तुलना में लगभग चार गुना तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है. इसका मकसद साफ है ‘फैक्ट ऑन ग्राउंड’ बनाना, ताकि भविष्य में बातचीत हो तो जमीनी सच्चाई उसके पक्ष में हो. पैंगोंग झील जैसे इलाके रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं, क्योंकि यहां से सड़क, झील और ऊंचाई तीनों का नियंत्रण मिलता है.
कैसे हो रहा है यह निर्माण और क्या है तकनीक?
सैटेलाइट इमेज से यह भी साफ होता है कि चीन हाई-एल्टीट्यूड कंस्ट्रक्शन की एडवांस तकनीक इस्तेमाल कर रहा है. प्री-फैब्रिकेटेड कंक्रीट स्ट्रक्चर, भारी मशीनरी और ऑल-वेदर कनेक्टिविटी इस निर्माण को संभव बना रही है. ये इमारतें सिर्फ रहने के लिए नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और कमांड उपयोग के लिए भी तैयार की जा रही हैं. बाहर से शांति का संकेत देने के बावजूद, अंदरखाने यह तैयारी किसी भी हालात के लिए तैयार रहने की रणनीति को दिखाती है.
भारत-चीन सीमा की मौजूदा तस्वीर:
2020 के गलवान संघर्ष के बाद बफर ज़ोन और डिस-एंगेजमेंट समझौते. 2024 में कूटनीतिक बातचीत से पैट्रोलिंग फिर शुरू. ज़मीनी स्तर पर सैनिकों में औपचारिक शिष्टाचार, लेकिन भरोसे की कमी. चीन का इंफ्रा निर्माण भारत से कई गुना तेज. भारत की ओर से निगरानी और जवाबी तैयारी जारी.इस नई चाल के संभावित नतीजे
चीन अपने क्षेत्रीय दावों को स्थायी ढांचों से मजबूत कर सकता है. अगर भारत जवाबी निर्माण तेज करता है, तो तनाव दोबारा बढ़ सकता है. 2024 की कूटनीतिक सहमति की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं. लंबे समय में सैन्य संतुलन चीन के पक्ष में झुकने का खतरा. भारत के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और निगरानी तेज करने की अनिवार्यता.अंततः यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है. चीन की रणनीति अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली है. इसे अक्सर ‘सलामी स्लाइसिंग’ कहा जाता है. भारत को न तो घबराने की जरूरत है और न ही आंखें मूंदने की. जरूरी है कि कूटनीति और सैन्य तैयारी साथ-साथ चलें. सैटेलाइट मॉनिटरिंग, तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और रणनीतिक धैर्य ही इसका जवाब हो सकते हैं. पैंगोंग झील के पास बन रहा यह ‘कंक्रीट किला’ याद दिलाता है कि LAC पर शांति हमेशा सतर्कता मांगती है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
January 05, 2026, 19:30 IST

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