Last Updated:February 26, 2026, 13:48 IST
दुब्बा गांव में पहले से ही पुरातात्विक सामग्री बिखरी हुई थी. इसका महत्व कई पुरातत्व विद के द्वारा देखा गया था लेकिन हम लोगों ने भी जब इसका सर्वे किया तो यह आवश्यकता महसूस हुई कि इसका उत्खनन करना आवश्यक है.
गया: बिहार का मगध विश्वविद्यालय पहली बार पुरातात्त्विक उत्खनन कार्य प्रारंभ करने जा रहा है. यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले लगभग चार दशकों से बिहार का कोई भी विश्वविद्यालय स्वतंत्र रूप से उत्खनन कार्य नहीं कर सका है. गया जिले के गुरुआ प्रखंड अंतर्गत दुब्बा गांव को उत्खनन स्थल के रूप में चयनित किया गया है. इस कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से विधिवत अनुमति प्राप्त हो चुकी है.
उत्खनन का प्रमुख उद्देश्य प्राचीन भारतीय इतिहास
कुलपति एसपी शाही ने बताया उत्खनन का प्रमुख उद्देश्य प्राचीन भारतीय इतिहास, एशियाई अध्ययन व पुरातत्त्व विषय से जुड़े छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों को अनिवार्य फील्ड प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है. इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, उनके शोध कौशल का विकास होगा और भविष्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. साथ ही मगध क्षेत्र विशेषकर बोधगया के आसपास फैले पुरातात्त्विक स्थलों और पुरावशेषों का वैज्ञानिक अध्ययन कर पौराणिक एवं बौद्धकालीन साक्ष्यों की खोज की जाएगी.
नीतीश कुमार ने किया था दुब्बा का भ्रमण
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी दुब्बा पुरातात्त्विक स्थल का भ्रमण कर इसकी संभावनाओं को रेखांकित कर चुके हैं. यहां तथागत बुद्ध से जुड़े कई पुरातन अवशेष मौजूद हैं. उत्खनन कार्य के निर्देशन एवं पर्यवेक्षक दल में प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन विभाग के शिक्षक डॉ. अलका मिश्रा, शंकर शर्मा, डॉ. जन्मेजय सिंह, आलोक रंजन, डॉ. अनूप कुमार भारद्वाज, डॉ. चन्द्र प्रकाश और डॉ. विजयकांत यादव, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल होंगे.
शिक्षकों की योग्य और अनुभवी टीम करेगी खोज
मगध विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन विभाग के नवनियुक्त शिक्षकों द्वारा लगातार पुरातात्विक गतिविधियां की जा रही है. वहीं, अब नवनियुक्त शिक्षकों की योग्य और अनुभवी टीम गया जिले के गुरुआ थाना अंतर्गत दुब्बा गांव में पुरातात्त्विक उत्खनन का कार्य करने जा रही है. उम्मीद जताई गई कि मार्च के तीसरे सप्ताह से इसमें काम तेजी से शुरु हो जाएगा.
दुब्बा गांव में पहले से ही पुरातात्विक सामग्री
इस संबंध में प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन विभाग के शिक्षिका डॉ. अलका मिश्रा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि दुब्बा गांव में पहले से ही पुरातात्विक सामग्री बिखरी हुई थी. इसका महत्व कई पुरातत्व विद के द्वारा देखा गया था लेकिन हम लोगों ने भी जब इसका सर्वे किया तो यह आवश्यकता महसूस हुई कि इसका उत्खनन करना आवश्यक है. क्योंकि यहां कई पुरातात्विक सामग्री है जिसका संरक्षण नहीं होने से खत्म हो सकती थी. इसलिए यहां उत्खनन के साथ-साथ संरक्षण की आवश्यकता महसूस की गई. इस संदर्भ में एक प्रोजेक्ट तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजी गई. उन्होंने दो दिन पहले ही उत्खनन कार्य को लेकर मगध विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन विभाग को स्वीकृति दे दी है.
बौद्धकालीन संस्कृतियों के साक्ष्य
वहीं, शिक्षक शंकर शर्मा ने बताया दुब्बा गांव से संबंधित रिसर्च रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को हम लोगों ने भेजी थी और दो दिन पहले ही उत्खनन को लेकर स्वीकृति मिली है. दुब्बा गांव में उत्खनन कार्य से मगध विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, एशियाई अध्ययन और पुरातत्त्व विषय पर पठन-पाठन कर रहे छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों का अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग मिल सकेगा. मगध क्षेत्र विशेषकर बोधगया के इर्द-गीर्द बिखरे विभिन्न पुरातात्त्विक महत्त्व के स्थलों और पुरावशेषों का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन कर सकेंगे. जिसमें पौराणिक एवं बौद्धकालीन संस्कृतियों के साक्ष्यों को ढूंढना और बोधगया के अतिरिक्त समकालिक पुरास्थलों तथा स्मारकों की पहचान कर उसके महत्त्व को समझना शामिल होगा.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें
First Published :
February 26, 2026, 13:48 IST

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