Last Updated:February 27, 2026, 14:51 IST
Board Exams History In India: भारत में पहली बोर्ड परीक्षा साल 1930 में आयोजित की गई थी, जबकि भारत का पहला एजुकेशन बोर्ड यूपी बोर्ड था, जो 1921 में बना था. वहीं, बोर्ड परीक्षाएं हर साल इसलिए ली जाती है, ताकि छात्रों की नॉलेज का मूल्यांकन किया जा सके. यह आगे की पढ़ाई व करियर के लिए काफी अहम मानी जाती है.

Board Exams History In India: हर साल फरवरी-मार्च का महीना आते ही देशभर में बोर्ड परीक्षा की चर्चा शुरू हो जाती है. घरों में पढ़ाई का माहौल गंभीर हो जाता है, स्कूलों में एक्स्ट्रा क्लास लगने लगती हैं और छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को लेकर अधिक सजग हो जाते हैं. 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं छात्रों के जीवन का एक अहम पड़ाव मानी जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में बोर्ड परीक्षा की शुरुआत आखिर कब और कैसे हुई? दरअसल, इसका इतिहास लगभग 100 साल पुराना है, जिसने समय के साथ भारत की शिक्षा व्यवस्था को आकार दिया है.
कौन सा है भारत का पहला एजुकेशन बोर्ड?
भारत का सबसे पहला एजुकेशन बोर्ड उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड था, जिसकी स्थापना साल 1921 में हुई थी. उस दौर में शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित और एक समान बनाने की जरूरत महसूस की गई. इसी उद्देश्य से एक आधिकारिक बोर्ड का गठन किया गया, जो स्कूल स्तर की परीक्षाओं को तय नियमों के अनुसार आयोजित कर सके. इसके बाद 1929 में ‘बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन’ नाम से एक संयुक्त बोर्ड बनाया गया, जिसने एग्जाम सिस्टम को और मजबूत किया.
1930 में हुई थी पहली बार बोर्ड परीक्षा
साल 1930 में पहली बार हाई स्कूल और इंटरमीडिएट लेवल पर आर्ट्स और साइंस विषयों की बोर्ड परीक्षा आयोजित की गई थी. इसे भारत में औपचारिक बोर्ड परीक्षा की शुरुआत माना जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे अन्य राज्यों ने भी अपने शिक्षा बोर्ड स्थापित किए और बोर्ड परीक्षाएं शुरू कीं.
राष्ट्रीय स्तर पर हुआ CBSE का गठन
आज देश का प्रमुख राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education (CBSE) है. स्वतंत्रता के बाद साल 1962 में इसका पुनर्गठन किया गया, ताकि पूरे देश में एक समान और व्यवस्थित शिक्षा प्रणाली लागू की जा सके. आज CBSE के साथ-साथ कई स्टेट बोर्ड भी हर साल बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करते हैं.
क्यों ली जाती है बोर्ड परीक्षा?
बोर्ड परीक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों की नॉलेज और समझ का निष्पक्ष मूल्यांकन करना है. यह देखा जाता है कि छात्र ने पूरे साल में क्या सीखा और वह विषय को कितनी अच्छी तरह समझ पाया. इन परीक्षाओं से छात्रों को एक आधिकारिक सर्टिफिकेट मिलता है, जो आगे की पढ़ाई और नौकरी के लिए जरूरी होता है. 10वीं के बाद छात्र अपने विषय का चुनाव करते हैं, जबकि 12वीं के मार्क्स कॉलेज में एडमिशन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. इसके अलावा, बोर्ड परीक्षा छात्रों में अनुशासन, टाइम मैनेजमेंट और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती है.
भविष्य की तैयारी का मजबूत आधार
बोर्ड परीक्षाएं केवल अंक प्राप्त करने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं. यही कारण है कि लगभग 100 साल बाद भी बोर्ड परीक्षा भारतीय शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है.
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कुणाल झा एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन साल से ज्यादा का अनुभव है. वह नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के कई अलग-अलग मुद्दों को कवर करते हैं. करियर, एजुकेशन, जॉब और स्पोर्ट्स जैसी फील्ड में...और पढ़ें
First Published :
February 27, 2026, 14:51 IST

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