ममता बनर्जी के वो पांच जंगबाज, जो तय करेंगे पश्चिम बंगाल चुनाव की दिशा

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ममता बनर्जी के वो पांच जंगबाज, जो तय करेंगे पश्चिम बंगाल चुनाव की दिशा

Last Updated:March 16, 2026, 19:16 IST

Bengal Election 2026: ममता बनर्जी ने 2026 की चुनावी जंग के लिए अपने सबसे भरोसेमंद लड़ाकों की टीम मैदान में उतार दी है. अभिषेक बनर्जी की सांगठनिक शक्ति से लेकर महुआ मोइत्रा के तीखे तेवरों तक, ये नेता बीजेपी की घेराबंदी करने को तैयार हैं. वहीं, बिहार मूल के शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति झा आजाद हिंदी भाषी वोटरों के बीच टीएमसी का सबसे मजबूत ढाल बनकर उभरे हैं. क्या ममता बनर्जी को बंगाल विधानसभा चुनाव में अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और फिरहाद हकीम जीत दिला पाएंगे? क्या ये नेता बीजेपी के ‘चाणक्य’ से सामना कर पाएंगे? पढ़ें यह रिपोर्ट.

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ममता बनर्जी के पांच जंगबाज, जिस पर बंगाल चुनाव का है सारा दारोमदार.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है और इसी के साथ ‘दीदी’ की सेना ने मोर्चा संभाल लिया है. ममता बनर्जी खुद एक बड़ी ब्रांड हैं, लेकिन बीजेपी की ‘इलेक्शन मशीनरी’ को मात देने के लिए उन्होंने इस बार पांच ऐसे रणनीतिकारों को आगे किया है, जो जमीनी पकड़ के साथ-साथ बौद्धिक और आक्रामक राजनीति में बीजेपी के किसी भी दांव का तोड़ निकाल सकते हैं. आइए जानते हैं उन नेताओं की ताकत, जिससे बीजेपी को रहना होगा सावधान

अभिषेक बनर्जी: टीएमसी के ‘मुख्य सेनापति’

ममता बनर्जी के बाद पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले अभिषेक बनर्जी इस चुनाव के सबसे बड़े ‘जंगबाज’ हो सकते हैं. उन्होंने हाल ही में ‘आबार जीतबे बांग्ला’ (फिर जीतेगा बंगाल) अभियान शुरू किया है. अभिषेक की ताकत उनका सांगठनिक कौशल है. उन्होंने बूथ स्तर पर युवाओं की ऐसी टीम खड़ी की है, जो बीजेपी के ‘पन्ना प्रमुखों’ का मुकाबला करने में सक्षम है. साथ ही वे मतदाता सूची में गड़बड़ी के मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरकर बीजेपी पर हमला बोला था.

संसद से लेकर सड़क तक महुआ मोइत्रा बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई हैं. उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे बीजेपी की ‘ध्रुवीकरण’ की राजनीति को तर्कों के साथ काटती हैं. हाल ही में उन्होंने ‘वंदे मातरम’ बहस को 2026 के चुनावों से जोड़कर बीजेपी की ध्रुवीकरण की योजना पर हमला बोला था. शहरी और शिक्षित मतदाताओं के बीच महुआ की लोकप्रियता बीजेपी के नैरेटिव को कमजोर करने का दम रखती है.

3. शत्रुघ्न सिन्हा: बिहार के ‘बिहारी बाबू’ का बंगाल में जादू

बिहार के दिग्गज नेता और आसनसोल से टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ममता बनर्जी के एक ऐसे ‘ब्रह्मास्त्र’ हैं, जिन्होंने आसनसोल जैसे बीजेपी के गढ़ को ढहा दिया. बंगाल में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी बिहारी और यूपी के वोटर हैं. शत्रुघ्न सिन्हा की मौजूदगी बीजेपी के ‘हिंदुत्व और हिंदी’ वाले कार्ड को बेअसर कर देती है. उनकी अपील केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं है, बल्कि वे यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि टीएमसी केवल बंगालियों की नहीं, बल्कि बंगाल में रहने वाले हर भारतीय की पार्टी है.

4. कीर्ति आजाद: क्रिकेटर से सांसद तक

बिहार के एक और दिग्गज नेता और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने बर्दवान-दुर्गापुर सीट पर बीजेपी के कद्दावर नेता दिलीप घोष को हराकर अपनी ताकत साबित की थी. कीर्ति आजाद का टीएमसी में होना यह दर्शाता है कि ममता बनर्जी अब बिहार और झारखंड से सटे सीमावर्ती जिलों में बीजेपी के दबदबे को खत्म करने के लिए ‘बिहार के बेटों’ पर दांव लगा रही हैं. लेकिन क्या झा में वह ‘मद्दा’ है कि वे हिंदी भाषी इलाकों में बीजेपी की जीत की बाजी को पलट सकें.

5. फिरहाद हकीम: ‘संकटमोचक’ और जमीनी पकड़

कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम टीएमसी के सबसे पुराने और भरोसेमंद सिपाही हैं. अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों के साथ-साथ कोलकाता और उसके आसपास की सीटों पर उनका जबरदस्त प्रभाव है. बीजेपी अक्सर उन पर हमलावर रहती है, लेकिन फिरहाद का संगठन पर नियंत्रण और सरकारी योजनाओं जैसे ‘दीदीर सुरक्षा कवच’ को घर-घर पहुंचाने की उनकी क्षमता उन्हें ममता का अनिवार्य योद्धा बनाती है.

बीजेपी के लिए क्यों हैं ये खतरनाक?

बीजेपी की रणनीति अक्सर ‘अस्मिता’ और ‘घुसपैठ’ के इर्द-गिर्द घूमती है. लेकिन अभिषेक बनर्जी ने इसे ‘बंगाल विरोधी बीजेपी’ बनाम ‘बंगाल की अपनी बेटी’ के मुद्दे में बदल दिया है. वहीं, शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद ने बीजेपी के उस तर्क को खत्म कर दिया है कि टीएमसी बाहरी लोगों के खिलाफ है.

टीएमसी के ये पांचों नेता अलग-अलग मोर्चों पर बीजेपी की घेराबंदी कर रहे हैं. जहां अभिषेक संगठन देख रहे हैं, वहीं महुआ वैचारिक लड़ाई लड़ रही हैं और शत्रुघ्न सिन्हा-कीर्ति आजाद वोट बैंक में सेंध लगा रहे हैं. ब्राह्मण और कायस्थ वोट बैंक के जरिए 2026 की यह जंग केवल ममता बनाम मोदी नहीं, बल्कि इन रणनीतिकारों बनाम बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे की भी है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें

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Kolkata,Kolkata,West Bengal

First Published :

March 16, 2026, 19:16 IST

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