मानसून के लिए कैसा रहेगा साल 2026? वेदर एक्‍सपर्ट ने किया ऐसा फोरकास्‍ट, अभी से बढ़ जाएगी टेंशन

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मानसून के लिए कैसा रहेगा साल 2026? वेदर एक्‍सपर्ट ने कर दिया फोरकास्‍ट

Last Updated:February 23, 2026, 13:14 IST

India Monsoon News: मानसून और बारिश के लिहाज से 2025 का साल काफी अच्‍छा रहा. कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो तकरीबन देश के सभी हिस्‍सों में अच्‍छी बारिश हुई. अब सवाल उठता है कि बारिश के लिहाज से 2026 कैसा साल रहेगा. वेदर एक्‍सपर्ट ने इसको लेकर पूर्वानुमान जारी किया है.

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साल के दूसरे हाफ में अल-नीनो के एक्टिव बढ़ने का पूर्वानुमान है. इसके चलते इस बार मानसून कमजोर रह सकता है. मतलब बारिश कम होगी, जबकि भीषण गर्मी पड़ेगी. (फाइल फोटो/AP)

India Monsoon News: भारत में इस साल के मौसम को लेकर ताजा पूर्वानुमान सामने आया है. खासकार दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर यह फोरकास्‍ट काफी खास है. मानसून भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर काफ महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि कृषि का ज्‍यादातर हिस्‍सा मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करता है. ग्‍लोबल वेदर मॉडल ने संकेत दिया है कि वर्ष 2026 के दूसरे हिस्से में अल नीनो (El Nino) की स्थिति बनने की संभावना लगातार मजबूत हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह स्थिति विकसित होती है तो भारत में कमजोर मानसून और अधिक तीखी गर्मी देखने को मिल सकती है.

अमेरिका की मौसम एजेंसी Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) के नवीनतम पूर्वानुमान के मुताबिक अगस्त-अक्टूबर और सितंबर-नवंबर 2026 के दौरान अल नीनो बनने की 60% संभावना है. जनवरी में यह संभावना करीब 50% आंकी गई थी, जिससे संकेत मिलता है कि समय के साथ इसके विकसित होने की आशंका बढ़ी है. आम तौर पर अल नीनो वाले वर्षों में भारत में मानसून कमजोर रहता है और तापमान सामान्य से अधिक रहता है. क्‍लाइमेट एक्‍सपर्ट का कहना है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल मौजूद ला नीना की स्थिति कमजोर पड़ रही है. CCSR (Center for Climate Systems Research), जो Columbia University के अर्थ इंस्टीट्यूट का हिस्सा है और नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज के साथ साझेदारी में काम करता है, ने फरवरी 2026 के मध्य तक ला नीना के प्रभाव में गिरावट दर्ज की है.

ला नीना का प्रभाव खत्‍म

कोलंबिया क्लाइमेट स्कूल के Research Institute for Climate and Society (IRI) के ENSO (एल नीनो-सदर्न ओसिलेशन) पूर्वानुमान के अनुसार फरवरी-अप्रैल 2026 के दौरान ला नीना की संभावना केवल 4% रह गई है. इसी अवधि में ENSO न्यूट्रल स्थिति की संभावना लगभग 96% बताई गई है. मार्च-मई के दौरान भी न्यूट्रल स्थिति प्रमुख रहने की संभावना है, हालांकि अप्रैल-जून तक अल नीनो की संभावना तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है. पूर्वानुमान के अनुसार मई-जुलाई 2026 से अल नीनो की संभावना ENSO-न्यूट्रल से अधिक हो जाएगी और यह 58% से 61% के बीच बनी रह सकती है. इसके बाद वर्ष के दूसरे हिस्से में इसके और मजबूत होने की आशंका जताई गई है.

बन रहे नए हालात

NOAA के मुताबिक फरवरी-अप्रैल 2026 के दौरान ला नीना से ENSO न्यूट्रल स्थिति में बदलाव की 60% संभावना है और उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों तक न्यूट्रल स्थिति बने रहने के संकेत हैं. इसके बाद समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव अल नीनो के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकता है. इस बीच World Meteorological Organization (WMO) ने 20 फरवरी को जारी अपने वैश्विक मौसमी अपडेट में कहा कि मार्च-मई 2026 के दौरान समुद्री सतह तापमान के पैटर्न भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में बदलाव के दौर का संकेत दे रहे हैं. मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में औसत से कम तापमान की स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होगी, जिससे ENSO न्यूट्रल परिस्थितियों की ओर बढ़ने का रास्ता साफ होगा.

अर्थव्‍यवस्‍था पर प्रभाव

अल नीनो का भारत की अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि देश की कृषि काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. कमजोर बारिश से फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य कीमतों और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी पूर्वानुमान है और मौसम की स्थिति समय के साथ बदल सकती है. आने वाले महीनों में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों की निगरानी से स्थिति और स्पष्ट होगी. फिलहाल संकेत यही हैं कि 2026 का दूसरा हिस्सा वैश्विक जलवायु के लिहाज से अहम साबित हो सकता है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

February 23, 2026, 13:14 IST

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