‘मिडिल ईस्ट’ को ऐसा क्यों कहा जाता है? किसका ‘मध्य’ और किसका ‘पूर्व’? इतिहास में खींचा ये नक्शा समझिए

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Last Updated:March 05, 2026, 12:17 IST

आखिर मिडिल ईस्ट में मध्य और पूर्व किसके संदर्भ में इस्तेमाल होता है? यह शब्द भले ही तटस्थ और सामान्य लगे, लेकिन इसका जन्म औपनिवेशिक दौर में हुआ था. तब ब्रिटिश हुकूमत का बोलबाला था. दरअसल यह नाम उस समय की सोच को दर्शाता है जब दुनिया का नक्शा सिर्फ भौगोलिक रेखाओं से नहीं, बल्कि साम्राज्यवादी ताकतों की नजर से तय होता था.

‘मिडिल ईस्ट’ को ऐसा क्यों कहते हैं? किसका ‘मध्य’ और किसका ‘पूर्व’? नक्शा समझिएZoom

मिडिल ईस्ट का क्षेत्र

इस समय ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका की जंग की खबरें चर्चा में हैं. इस दौरान ‘मिडिल ईस्ट’ यानी मध्य पूर्व का प्रयोग कई बार सुनने में आता है. यह शब्द हम रोज खबरों से लेकर किताबों और अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में सुनते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका इस्तेमाल किस संदर्भ में किया जाता है. आखिर यह मध्य किसका है और पूर्व किसके संदर्भ में इस्तेमाल होता है? यह शब्द भले ही तटस्थ और सामान्य लगे, लेकिन इसका जन्म औपनिवेशिक दौर में हुआ था. तब ब्रिटिश हुकूमत का बोलबाला था. दरअसल यह नाम उस समय की सोच को दर्शाता है जब दुनिया का नक्शा सिर्फ भौगोलिक रेखाओं से नहीं, बल्कि साम्राज्यवादी ताकतों की नजर से तय होता था.

1902 में गढ़ा गया था शब्द
इतिहासकारों के अनुसार ‘मिडल ईस्ट’ शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1902 में अमेरिकी नौसैनिक रणनीतिकार अल्फ्रेड थायेर माहन ने किया था. उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के हितों पर लिखते हुए भारत और फारस (ईरान का पुराना नाम) की खाड़ी के बीच के इलाकों को ‘मिडल ईस्ट’ कहा. उनका दृष्टिकोण यूरोप-केंद्रित था.

उस समय दुनिया को तीन हिस्सों में देखा जाता था. पहला था- नियर ईस्ट. इसमें बाल्कन और ऑटोमन साम्राज्य के क्षेत्र आते थे. दूसरा था- मिडिल ईस्ट. भारत और फारस की खाड़ी के बीच का क्षेत्र. तीसरा था- फार ईस्ट. इसमें चीन और जापान जैसे सुदूर के देश आते थे. इन सभी शब्दों की दिशा लंदन से तय होती थी. यानी यूरोप को केंद्र मानकर बाकी दुनिया को दूरी के आधार पर नाम दिया गया.

लंदन से खींचा गया नक्शा
ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के साथ उसे अपने विशाल क्षेत्रों को अलग-अलग वर्गीकृत करने के लिए नई शब्दावली की जरूरत पड़ी. मिस्र जैसे देश ‘मिडिल ईस्ट’ में इसलिए रखे गए क्योंकि वे लंदन के पूर्व में थे, लेकिन एशिया के सुदूर पूर्व जितने दूर भी नहीं. उसी तरह, ब्रिटिश भारत को कई बार ‘फार ईस्ट’ का हिस्सा कहा गया, क्योंकि वह यूरोप से बहुत दूर था. ये नाम तटस्थ नहीं थे. ये साम्राज्यवादी व्यापार रास्तों और नौसैनिक रणनीति के हिसाब से तय किए गए थे.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद
पहले वर्ल्ड वार के बाद जब ऑटोमन साम्राज्य का पतन हुआ, तो पश्चिम एशिया में कई नए राष्ट्र उभरे. इसी दौर में मिडल ईस्ट शब्द का इस्तेमाल ब्रिटिश और अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत में अधिक व्यापक रूप से होने लगा. यह कूटनीति और सैन्य योजना के लिए सुविधाजनक शब्द बनता चला गया. हालांकि इसकी सीमाएं कभी भी स्पष्ट रूप से तय नहीं की गईं. अब सवाल यह है कि क्या इसमें ईरान शामिल है? क्या तुर्की इसका हिस्सा है? क्या उत्तर अफ्रीका भी इसमें आता है? आज भी इन सवालों पर अलग-अलग मत मिलते हैं.

सिर्फ भौगोलिक शब्द नहीं
समय के साथ ‘मिडिल ईस्ट’ शब्द ने कई अर्थ और धारणाएँ भी अपने साथ जोड़ लीं. वैश्विक मीडिया में यह शब्द अक्सर तेल, युद्ध, संघर्ष और अस्थिरता से जोड़ा जाता रहा है. जबकि इस क्षेत्र में भूमध्यसागर से लेकर फारस की खाड़ी तक और प्राचीन फारसी सभ्यताओं से लेकर अरब समाजों तक, बेहद विविध इतिहास, भाषाएँ और संस्कृतियाँ मौजूद हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ‘मिडिल ईस्ट’ शब्द इस सारी विविधता को एक ही खांचे में समेट देता है.

यूरोप केंद्र में क्यों?
‘नियर ईस्ट’, ‘मिडल ईस्ट’ और ‘फार ईस्ट’. इन सभी शब्दों में एक समानता है. वह यह कि इनका केंद्र यूरोप है. अगर नजरिया उल्टा कर दिया जाए, तो लंदन से पश्चिम की ओर जाने को कोई ‘मिडिल वेस्ट’ नहीं कहता. यही विडंबना है. ‘मिडिल ईस्ट’ की सामान्य स्वीकृति बताती है कि किस तरह औपनिवेशिक भाषा आज भी हमारे सोचने के तरीके को प्रभावित करती है.

आज क्या विकल्प हैं?
शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में कुछ लोग ‘वेस्ट एशिया’ (पश्चिम एशिया) या फिर ‘नॉर्थ अफ्रीका’ (उत्तर अफ्रीका) जैसे शब्दों का उपयोग करना पसंद करते हैं. ये शब्द भौगोलिक स्थिति को अधिक सटीक रूप से दर्शाते हैं और यूरोप को केंद्र में नहीं रखते. फिर भी ‘मिडिल ईस्ट’ आज भी कूटनीति, पत्रकारिता और आम बातचीत में सबसे अधिक प्रचलित शब्द बना हुआ है. इसे बदलना सिर्फ एक शब्द को ही बदलना नहीं होगा, बल्कि यह सवाल उठाना होगा कि दुनिया के क्षेत्रों का नामकरण कौन करता है और किस नजरिए से.

इस पूरी बात का सार समझें तो वो यह है कि ‘मिडिल ईस्ट’ कोई प्राकृतिक दिशा नहीं है, जैसे उत्तर या दक्षिण. यह इतिहास, साम्राज्य और रणनीति से जन्मा शब्द है. यह ‘मध्य’ तभी है, जब आप यूरोप को अपना शुरुआती बिंदु मानें. अगली बार जब यह शब्द आपकी स्क्रीन पर दिखाई दे, तो याद रखिए कि यह सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि इतिहास की विरासत भी है.

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ऐश्वर्य कुमार राय

ऐश्वर्य कुमार राय नेटवर्क 18 ग्रुप में जर्नलिस्ट हैं. वह यहां डेप्युटी न्यूज एडिटर के तौर पर देश और दुनिया के घटनाक्रमों पर विस्तृत रिपोर्ट्स कवर करते हैं. वह पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्स और र...और पढ़ें

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

March 05, 2026, 12:17 IST

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