Last Updated:March 03, 2026, 21:21 IST
US-Iran War New Updates: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका का समीकरण बदलता हुआ नजर आ रहा है. जिस तरह से ईरान हथियार डालने को तैयार नहीं है, उसके बाद तख्तापलट का नया प्लान डोनाल्ड ट्रंप बना रहे हैं. वे ईरान के अंदर ही सशस्त्र विद्रोहियों को समर्थन देने का प्लान कर रहे हैं. इसके अलावा वे कुर्दों की मदद लेने पर भी विचार कर रहे हैं.

ईरान को लेकर बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर वो रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे ईरान में उनकी मनचाही सत्ता स्थापित हो सके. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए वे कुर्द समूहों की भी मदद लेने के लिए तैयार हैं. खबरें हैं कि इराक के प्रमुख कुर्द नेताओं मसूद बरजानी और बाफेल तलाबानी से फोन पर संपर्क किया गया है. यह बातचीत उस समय हुई जब क्षेत्र में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच टकराव चरम पर है. सूत्रों का कहना है कि चर्चा बेहद संवेदनशील थी और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है.
चर्चा ये भी है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से पर्दे के पीछे कुर्द समूहों को संभावित रणनीतिक भूमिका के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे थे. नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ बैठक के दौरान यह प्रस्ताव रखा था कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो कुर्द गुट ईरान के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. ईरान की आक्रामकता देखते हुए अब वो वक्त आ चुका है, जब अमेरिका इन गुटों का इस्तेमाल उसके खिलाफ करे.
इजरायल की सालों की तैयारी अब आएगी काम?
इजराइल के कुर्द संगठनों के साथ वर्षों से सुरक्षा और खुफिया स्तर पर संपर्क रहे हैं. रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इराक-ईरान सीमा पर तैनात कुर्द लड़ाके जमीनी मोर्चे पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद कुछ समूहों ने हाल ही में आरोप लगाया है कि ईरान ने उनके ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले इराक में शरण लिए पांच ईरानी-कुर्द संगठनों ने एक साझा राजनीतिक गठबंधन बनाया, जिसका घोषित उद्देश्य ईरान के खिलाफ संघर्ष को संगठित करना है.
कौन हैं ये कुर्द समुदाय?
कुर्द समुदाय मध्य-पूर्व का बड़ा जातीय समूह है, लेकिन उनका कोई स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है. उनके पारंपरिक क्षेत्र तुर्की, सीरिया, इराक और ईरान के हिस्सों में फैले हुए हैं. अमेरिका के लिए कुर्द इसलिए भी अहम हैं क्योंकि 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद उत्तरी इराक में उन्हें स्वायत्त प्रशासन मिला. पेशमर्गा बलों को आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई का व्यापक अनुभव है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी स्तर पर किसी अभियान की जरूरत पड़ी तो कुर्द लड़ाके हवाई हमलों के साथ तालमेल बैठा सकते हैं.तुर्की को कैसे समझाएगा अमेरिका?
हालांकि अमेरिका के इस प्लान में तुर्की एक महत्वपूर्ण प्वाइंट बन सकता है. नाटो सदस्य तुर्की और कुर्द संगठनों के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं. बताया जा रहा है कि ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन से भी इस मुद्दे पर चर्चा की है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान में जारी संकट के दौरान या उसके बाद कुर्दों की वास्तविक भूमिका क्या होगी. कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कुर्द समर्थन को लेकर अपेक्षाएं वास्तविकता से अधिक हो सकती हैं. हालांकि जिस तरह से पश्चिमी एशिया में समीकरण बन रहे हैं, कुर्दों को लेकर अमेरिका दांव खेल सकता है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर...और पढ़ें
First Published :
March 03, 2026, 21:21 IST

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