Last Updated:February 25, 2026, 12:32 IST
CJI Suryakant News: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया और इसे ‘गंभीर चिंता का विषय’ बताया. सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया.

CJI Suryakant News: एनसीईआरटी की आठवीं क्लास की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाली बात सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एनसीईआरटी (NCERT) की क्लास 8 की सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडिशियरी में करप्शन’ से जुड़े हिस्सों पर कड़ी आपत्ति जताई. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने 8वीं कक्षा की NCERT पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘गंभीर चिंता का विषय’ बताया. चीफ जस्टिस यानी प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा. कानून अपना काम करेगा.’
सीजेआई सूर्यकांत ने इस रेफरेंस की आलोचना की और इस कदम को ‘सोचा-समझा’ बताया. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘मैं किसी को भी इंस्टीट्यूशन को बदनाम करने की इजाज़त नहीं दूंगा. मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है. यह एक सोची-समझी कार्रवाई प्रतीत होती है. कानून अपना काम करेगा.’ सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित सामग्री पर चिंता भी जताई और कहा कि जल्द ही इस मामले में सुनवाई के लिए वक्त किया जाएगा मुकर्रर.
NCERT किताब पर सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘इंस्टीट्यूशन के हेड के तौर पर, मैंने अपनी ड्यूटी की है और मैंने इस पर ध्यान दिया है. यह एक सोचा-समझा कदम लगता है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगा.’ सीजेआई सूर्यकांत की यह टिप्पणी सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के उनके सामने इस मामले का ज़िक्र करने के बाद आई. सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने कहा, ‘NCERT क्लास 8 के स्टूडेंट्स को ज्यूडिशियल करप्शन के बारे में पढ़ा रहा है. यह बहुत चिंता की बात है. हम यहां बार के लिए हैं.’
सीजेआई सूर्यकांत की बेंच में कौन, सिब्बल की क्या दलील
सीजेआई सूर्यकांत की बेंच में भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल थे. इस पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह दलील दी कि कक्षा आठ के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है. यह एक गंभीर चिंता का विषय है.
चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में आज क्या-क्या हुआ?
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा. कानून अपना काम करेगा.’ उन्होंने कहा, ‘संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है… यह एक सोचा-समझा कदम प्रतीत होता है. मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा.’न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह पुस्तक संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध प्रतीत होती है.
प्रधान न्यायाधीश ने सूर्यकांत कहा, ‘कृपया कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करें. अधिवक्ता और न्यायाधीश सभी परेशान हैं. सभी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश परेशान हैं. मैं इस मामले को स्वतः संज्ञान के तहत लूंगा. मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा. कानून अपना काम करेगा.’ बाद में न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है.नई किताब में क्या है?
कक्षा आठ के लिए एनसीईआरटी की नई समाज विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अनुसार, भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली ‘चुनौतियों’ में से हैं. नई पुस्तक के ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ खंड में कहा गया है कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है.
किताब में और क्या-क्या है?
‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक वाले संशोधित अध्याय में न्यायालयों के पदानुक्रम और न्याय तक पहुंच की व्याख्या करने से आगे बढ़कर न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान तक का जिक्र है. पाठ्यपुस्तक के पहले के संस्करणों में मुख्य रूप से न्यायालयों की संरचना और भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया था. अध्याय में लिखा है, ‘…न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है. गरीबों और वंचितों के लिए इससे न्याय तक पहुंच का मुद्दा और भी गंभीर हो सकता है. इसलिए न्यायिक प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य और केंद्र स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी का उपयोग भी शामिल है और जहां भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आएं, उनके खिलाफ त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है.’ पुस्तक के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में लंबित मुकदमों की अनुमानित संख्या 81,000 है, उच्च न्यायालयों में 62.40 लाख और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं. पुस्तक में न्यायपालिका की आंतरिक जवाबदेही प्रणालियों को रेखांकित किया गया है और शिकायतें प्राप्त करने की स्थापित प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, जो केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) के माध्यम से संचालित होती है. पुस्तक में लिखा है कि 2017 से 2021 के बीच इस तंत्र के जरिए 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं. पाठ्यपुस्तक में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाओं का जनता के भरोसे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. पुस्तक में उन्हें कोट करते हुए कहा गया है, ‘हालांकि, इस विश्वास को पुनर्स्थापित करने का मार्ग इन मुद्दों के समाधान के लिए त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई में निहित है…… पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्वपूर्ण गुण हैं.’About the Author
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें
First Published :
February 25, 2026, 12:32 IST

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