Last Updated:February 10, 2026, 21:04 IST
चीन के बदले हुए सुर यह संकेत दे रहे हैं कि वह भारत को अब एक प्रतिद्वंदी के बजाय एक अनिवार्य वैश्विक भागीदार के रूप में देख रहा है. हालांकि, कूटनीति के जानकारों का कहना है कि चीन के 'सम्मान देने' के वादे को हकीकत में बदलने के लिए अभी बीजिंग के अगले कदमों पर नजर रखनी होगी. फिर भी, UNSC की सीट के लिए चीन का यह नरम रुख भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है.

नई दिल्ली/बीजिंग. भारत और चीन के बीच रिश्तों की जमी हुई बर्फ अब न केवल पिघल रही है, बल्कि बीजिंग के रुख में एक ऐसा बड़ा बदलाव आता दिख रहा है जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत-चीन रणनीतिक संवाद के दौरान चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं को ‘समझने और सम्मान देने’ की बात कही है. यह पहली बार है, जब बीजिंंग खुलकर इस बारे में बात कर रहा है.
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन अब तक UNSC में भारत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा माना जाता रहा है. विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओशू के बीच हुई इस उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों की नई पटकथा लिख दी है.
क्या खत्म होगा वीटो का अड़ंगा?
लंबे समय से भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए दावेदारी कर रहा है, जिसे अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस का समर्थन प्राप्त है. चीन एकमात्र ऐसा देश था जो इस पर तकनीकी पेंच फंसाता रहा है. लेकिन इस बार विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चीन ने भारत की इन आकांक्षाओं के प्रति सम्मान प्रकट किया है. रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक साख और ‘ब्रिक्स’ में भारत की अध्यक्षता का असर है.
रिश्तों का री-बिल्डिंग प्लान
बैठक में केवल यूएन पर ही नहीं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया गया है. दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता ही द्विपक्षीय रिश्तों की आधारशिला है. नेताओं के मार्गदर्शन के अनुसार, अब दोनों देश विवादों को केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से सुलझाने पर सहमत हुए हैं. एलएसी (LAC) पर पिछले कुछ समय में हुई प्रगति और सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया की भी गहन समीक्षा की गई.वीजा, व्यापार और एयर सर्विस: अब राह होगी आसान
आसान होगा वीजा: दोनों देशों ने वीजा सुविधाओं को सरल बनाने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया है. सीधी उड़ानें: ‘अपडेटेड एयर सर्विसेज एग्रीमेंट’ को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति बनी है, जिससे भारत और चीन के बीच सीधी हवाई यात्रा फिर से शुरू हो सकेगी. कैलाश मानसरोवर यात्रा: बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल पुनः आरंभ का उल्लेख किया गया और भविष्य में इसके विस्तार की उम्मीद जताई गई.ब्रिक्स की अध्यक्षता और चीन का साथ
भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. चीन ने न केवल भारत की अध्यक्षता के तहत बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा की, बल्कि भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए अपना पूर्ण समर्थन भी व्यक्त किया है. व्यापारिक मोर्चे पर भी दोनों देश नए सिरे से आगे बढ़ने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं.
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
February 10, 2026, 21:04 IST

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