Barmer News : राजस्थान की रंग-बिरंगी सांस्कृतिक विरासत में अजरख छपाई एक ऐसी कला है, जो केवल कपड़ों पर डिज़ाइन नहीं बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और धैर्य की कहानी बयां करती है. इसी परंपरा को अपनी जिंदगी बना लेने वाली 82 वर्षीय सुखी देवी खत्री आज “अजरख लेडी” के नाम से जानी जाती हैं. बालोतरा जिले के पादरू गांव की रहने वाली सुखी देवी ने किशोरावस्था में इस कला की दुनिया में कदम रखा और पिछले करीब 65 वर्षों से रंग, मिट्टी और लकड़ी के ब्लॉकों के साथ अपनी साधना जारी रखी. अनपढ़ होने के बावजूद उन्होंने अजरख के हर चरण में ऐसी महारत हासिल की कि वे स्वयं एक जीवित संस्थान बन गईं. कठिन हालात, बदलता समय और मशीनों के दौर के बावजूद उन्होंने इस पारंपरिक कला का दामन नहीं छोड़ा. आज उनकी विरासत नई पीढ़ी के हाथों विदेशों तक पहुंच रही है और अजरख फैशन व डिजाइन की दुनिया में नया ट्रेंड बन चुका है.
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1 hour ago

