Last Updated:March 09, 2026, 08:20 IST
India Develop Technology For Sixth Gen Fighter Jet: भारत ने छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की डिजाइन से जुड़ी एक बड़ी तकनीक हासिल कर ली है. इसको भारत भविष्य में अपनी पांचवीं और छठी के पीढ़ी के जेट में इस्तेमाल कर सकता है. इससे भारत को भी छठी पीढ़ी के जेट को विकसित करने में बड़ी सहायता मिलेगी.

India Develop Technology For Sixth Gen Fighter Jet: दुनिया के किसी भी मुल्क के पास अभी तक छठी पीढ़ी के फाइटर जेट नहीं हैं. चीन, अमेरिका, जापान और यूरोप के कुछ देश ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. हालांकि गंभीरता के साथ केवल चीन और अमेरिका ही इस खेल में उतरे हैं. अभी तक दुनिया के तमाम देश पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने में ही परेशान हैं. चीन, अमेरिका के बाद केवल रूस के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं. जहां तक भारत की बात है तो हम इस रेस में काफी पीछे हैं. हमारे इंजीनियरों ने 4.5 जेन की तकनीकी डेवलप कर ली है. इस जेन के फाइटर जेट्स तेजस मार्क-2 के प्रोटोटाइप पर काम चल रहा है. इसके साथ भारत पांचवीं पीढ़ी के एम्का प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है. लेकिन, अभी इन दोनों तकनीक के मैच्योर होने में काफी वक्त लग सकता है. उधर, भारत 4.5+ जेन के फाइटर जेट राफेल का सौदा कर रहा है. भारतीय एयरफोर्स में और 114 राफेल विमान शामिल किए जाएंगे.
छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की तकनीक
इस बीच एक बड़ी खबर आई है. भारतीय इंजीनियरों ने छठी पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इसको पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के साथ-साथ छठी पीढ़ी के जेट में भी इस्तेमाल किया जाएगा. दरअसल, पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की सबसे बड़ी खासियत उसकी स्टेल्थ तकनीक है. यानी ऐसे जेट्स को किसी भी रडार सिस्टम द्वारा इंटरसेप्ट करना करीब-करीब असंभव होता है. वहीं छठी पीढ़ी के जेट्स में एआई के व्यापक इस्तेमाल की संभावना हैं. छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स ड्रोन्स और अन्य जेट्स के साथ एक टीम बनाकर हमलों को अंजाम देंगे. वे एक वार रूम की तरह काम करेंगे. खैर इस बात यहीं थामने हैं. आइए तकनीक पर चर्चा करते हैं.
क्या है तकनीकी
दरअसल, भारत में फाइटर जेट्स को डेवलप करने का काम एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) कर रही है. इसने अगली पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स के लिए एयर इनटेक सिस्टम के एयरोडायनामिक डिजाइन में एक महत्वपूर्ण तकनीकी सफलता हासिल की है. फरवरी 2026 के ‘जर्नल ऑफ एयरोस्पेस साइंसेज एंड टेक्नोलॉजीज’ में प्रकाशित इस रिसर्च ने स्टेल्थ एयरक्राफ्ट के लिए हाई इंजन परफॉर्मेंस बनाए रखते हुए रडार से छिपने वाली प्रोफाइल को सुरक्षित रखने का एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है. यह उपलब्धि एम्का प्रोजेक्ट के लिए एक निर्णायक कदम साबित होगी. इसके साथ ही यह भविष्य के छठी पीढ़ी के टेललेस एयरक्राफ्ट के लिए भी बेहद कारगर तकनीकी है.
डिफेंस सेक्टर से आई रिपोर्ट के मुताबिक एडीए के इंजीनियर्स ने एस-डक्ट इनटेक की जटिल चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार कर लिया. यह तकनीकी स्टेल्थ डिजाइन की सबसे जरूरी चीज है. स्टेल्थ फाइटर जेट्स में इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को रडार से छिपाना अनिवार्य होता है. ये ब्लेड रडार तरंगों को बहुत अधिक रिफ्लेक्ट करते हैं. इसे हासिल करने के लिए डिजाइनर सेर्पेंटाइन या एस-आकार के डक्ट इनटेक का उपयोग करते हैं. ये डक्ट अंदर की ओर मुड़कर इंजन को दुश्मन के रडार सेंसर की सीधी नजर से बचाते हैं. हवा को इस घुमावदार रास्ते से गुजारने पर एयरोडायनामिक समस्याएं पैदा होती हैं. सामान्य स्ट्रेट इनटेक में हवा सुचारू रूप से बहती है, लेकिन एस-डक्ट में हवा मुड़ते समय अशांत यानी डिस्टॉर्टेड हो जाती है. अगर यह विकृत हवा इंजन तक पहुंच जाए तो कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इससे इंजन के थ्रस्ट में कमी आएगी और इंजन फेल होने का खतरा बढ़ जाएगा.
एडीए ने किया कमाल
लेकिन, एडीए के इंजीनियर आर अबिलाशनिनी और विल्लिआम्माई सोमासुंदरम ने विंड टनल एक्सपेरिमेंट और कंप्यूटेशन फ्लूइड डायनामिक्स का संयोजन करके एक नई इनटेक ज्योमेट्री तकनीकी विकसित की है. इसके नतीजे बेहद प्रभावशाली रहे हैं. इससे भारत में ही पांचवीं और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स की डिजाइन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल होने की संभावना है. सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में एडीए के अधीन ही एम्का प्रोजेक्ट चल रहा है. भविष्य में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स को विकसित करने का काम भी एडीए को ही मिलने की संभावना है. ऐसे में एडीए की इस उपलब्धि से भविष्य में भारत भी फाइटर जेट्स तकनीक में एक बड़ा प्लेयर बनकर उभर सकता है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
March 09, 2026, 08:20 IST

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