राष्ट्रपति प्रोटोकॉल मामला: पश्चिम बंगाल के सीएस ने जवाब देने के लिए मांगा और समय

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राष्ट्रपति प्रोटोकॉल मामला: बंगाल के सीएस ने जवाब देने के लिए मांगा और समय

Last Updated:March 09, 2026, 10:06 IST

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला काफी तूल पकड़ चुका है. केंद्र ने इस बारे में रिपोर्ट मांगी थी जिस पर बंगाल के मुख्य सचिव ने देरी की. उन्होंने रिपोर्ट भेजने के लिए और समय की मांग की है. इधर ममता बनर्जी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों को खारिज किया है.

 बंगाल के सीएस ने जवाब देने के लिए मांगा और समयZoom

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला बढ़ गया है.

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला तूल पकड़ गया है. केंद्र सरकार ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने अभी तक रिपोर्ट सौंपने में देरी की है और अतिरिक्त समय की मांग की है. राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को सिलीगुड़ी में नौवें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं. कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल में कई गंभीर चूकें सामने आईं, जिस पर राष्ट्रपति ने खुद नाराजगी जताई. ब्लू बुक (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल व सुरक्षा नियमों का गोपनीय दस्तावेज) के नियमों का उल्लंघन होने का आरोप लगा.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 मार्च को गृह सचिव गोविंद मोहन के माध्यम से पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम 5 बजे तक पूरी रिपोर्ट मांगी थी. रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था.

प्रोटोकॉल: राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) स्वागत के लिए क्यों उपस्थित नहीं थे? केवल सिलीगुड़ी के मेयर ही रिसीव करने पहुंचे थे, जो ब्लू बुक के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.

वेन्यू (कार्यक्रम स्थल): सम्मेलन स्थल में आखिरी समय बदलाव किया गया, जिससे व्यवस्थाओं में असुविधा हुई.

रूट (मार्ग): राष्ट्रपति के काफिले के लिए चुना गया रास्ता कचरे से भरा हुआ था, जो सुरक्षा और गरिमा के खिलाफ था.

व्यवस्थाएं: राष्ट्रपति के लिए तैयार वॉशरूम में पानी तक नहीं था, जो बुनियादी सुविधाओं की कमी दर्शाता है.

इन खामियों के लिए स्थानीय प्रशासन के अधिकारी- दार्जिलिंग के जिलाधिकारी (DM), सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त (CP) और अतिरिक्त जिलाधिकारी (ADM) जिम्मेदार बताए जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, इन पर कार्रवाई की मांग उठ रही है, क्योंकि ऐसी लापरवाही संवैधानिक पद की गरिमा पर सवाल खड़े करती है. गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना को अराजक और राष्ट्रपति पद का अपमान करार दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की. केंद्र ने इसे महज लॉजिस्टिकल समस्या नहीं, बल्कि गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन माना है.

हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने निर्धारित समय सीमा (शाम 5 बजे) तक रिपोर्ट नहीं भेजी. उन्होंने गृह मंत्रालय से और समय मांगा है. राज्य सरकार का कहना है कि कुछ मुद्दों को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत है, लेकिन विस्तृत जवाब जल्द दिया जाएगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई जानबूझकर प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ, बल्कि कुछ प्रशासनिक कमियां हो सकती हैं. यह मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है. विपक्षी दल इसे ममता सरकार की असफलता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति असम्मान बता रहे हैं.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

March 09, 2026, 10:06 IST

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