Last Updated:February 14, 2026, 09:11 IST
India Crude Oil Import: भारत ने इस साल जनवरी में रूस से 11.4 लाख बीपीडी तेल आयात किया था. इसके बाद इराक से 10.3 लाख बीपीडी और सऊदी अरब से करीब 7.74 लाख बीपीडी तेल आया था. हालांकि फरवरी की शुरुआत में ही तस्वीर बदलती दिख रही है.

फरवरी के पहले हिस्से में सऊदी अरब ने भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने में रूस को पीछे छोड़ दिया है. कीमतों में कटौती और कम भाड़ा लागत के चलते सऊदी अरब एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है.
वैश्विक शिप ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के पहले 10 दिनों में सऊदी अरब ने भारत को औसतन 11.3 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चा तेल भेजा, जबकि रूस की ऑयल सप्लाई 10.9 लाख बीपीडी रही. करीब एक साल बाद सऊदी अरब की सप्लाई फिर 10 लाख बीपीडी के पार पहुंची है.
एक महीने में बदल गई पूरी तस्वीर
लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस वक्त भारत ने रूस से 11.4 लाख बीपीडी तेल आयात किया था. इसके बाद इराक से 10.3 लाख बीपीडी और सऊदी अरब से करीब 7.74 लाख बीपीडी तेल आया था. हालांकि फरवरी की शुरुआत में ही तस्वीर बदलती दिख रही है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बदलाव भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के बाद सामने आया है. अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने और रूसी तेल खरीद को हतोत्साहित करने के लिए लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटाने की घोषणा की है. इसके बाद भारत ने रूस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने के संकेत दिए हैं.
90 फीसदी तेल का आयात करता है भारत
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है और वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार है. साथ ही भारत चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर भी है, जिसकी रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जो 2030 तक बढ़कर 309 मिलियन टन से ज्यादा होने की उम्मीद है.
सऊदी अरब से सप्लाई बढ़ने की एक बड़ी वजह कम ट्रांसपोर्ट लागत भी है. सऊदी अरामको ने प्रति बैरल 30 सेंट का प्रीमियम हटाकर अपने तेल की कीमत को ओमान और दुबई ग्रेड के बराबर कर दिया है. इसके अलावा पश्चिम एशिया से भारत तक तेल पहुंचने में करीब तीन दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका से यही समय 45 से 55 दिन तक का होता है.
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, जिससे वह जरूरत पड़ने पर तेजी से सप्लाई बढ़ा सकता है. यही वजह है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है.
फिलहाल रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत का झुकाव एक बार फिर सऊदी अरब की ओर बढ़ता दिख रहा है. शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि आने वाले महीनों में भारत के तेल आयात मानचित्र में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
February 14, 2026, 09:10 IST

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