Last Updated:February 25, 2026, 05:52 IST
India on Russia-Ukraine War: यूक्रेन जंग पर भारत ने एक बार फिर वही किया है, जिसके लिए वह जाना जाता है. भारत ने यूक्रेन जंग पर संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग से खुद को अलग रखा है. भारत ने न तो यूक्रेन का साथ दिया और न ही रूस का. भारत ने खुद को तटस्थ रखा है. भारत की तरह ही चीन ने इस वोटिंग से दूरी बनाई है. यह प्रस्ताव यूक्रेन की तरफ से पेश किया गया था.

India on Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने को लेकर संयुक्त राष्ट्र में आज एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई. यूएन में शांति प्रस्ताव पर भारत ने वही किया, जिसके लिए वह जाना जाता है. तटस्थ, गुट निरपेक्ष और स्वतंत्र. जी हां, यूक्रेन पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव में वोटिंग से भारत ने दूरी बनाई है. यूक्रेन की तरफ से लाए गए प्रस्ताव पर हुए मतदान में भारत ने हिस्सा नहीं लिया. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव में रूस और यूक्रेन के बीच तुरंत, पूरी तरह और बिना शर्त सीजफायर की मांग की गई थी.
रूस-यूक्रेन संघर्ष के चार वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र में शांति प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान भारत ने स्वतंत्र और तटस्थ रुख पेश किया. प्रस्ताव पर मतदान के दौरान भारत ने हिस्सा नहीं लिया. 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन के प्रस्ताव को 107 देशों का समर्थन मिला. मगर भारत ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. भारत ही नहीं, भारत की तरह चीन ने भी वही स्टैंड लिया है. जी हां, भारत, चीन, ब्राजील और यूएई सहित 51 देशों ने मतदान नहीं किया है. जबकि 12 देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. यहां बताना जरूरी है कि यूक्रेन की तरफ से ही यूएन में यह प्रस्ताव लाया गया था.
यूक्रेन जंग पर भारत ने वोटिंग से बनाई दूरी
दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को चार साल पूरे हो चुके हैं. इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया. इसमें दोनों देशों के बीच तुरंत, पूरी तरह और बिना किसी शर्त के सीजफायर (युद्ध विराम) की मांग की गई थी. इस प्रस्ताव का नाम ‘Support for Lasting Peace in Ukraine’ था. लेकिन भारत ने इस वोटिंग से दूरी बनाते हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया. यह भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह इस संघर्ष में तटस्थ रहते हुए दोनों पक्षों से अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्या हुआ?
24 फरवरी 2026 को जंग के चार साल पूरे होने पर यूक्रेन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई. 193 सदस्य देशों वाली महासभा में प्रस्ताव को 107 देशों का समर्थन मिला. इनमें यूक्रेन खुद, यूरोपीय संघ के कई देश और अन्य सहयोगी शामिल थे. प्रस्ताव में यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया था. साथ ही, रूस से तुरंत हमला रोकने और शांति वार्ता शुरू करने की अपील की गई थी. लेकिन 12 देशों ने इसके खिलाफ वोट दिया, जिनमें रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया, ईरान और कुछ अन्य शामिल थे. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि 51 देशों ने वोटिंग से खुद को अलग रखा. इनमें भारत के अलावा चीन, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), दक्षिण अफ्रीका, बहरीन, बांग्लादेश और श्रीलंका शामिल था.
भारत का स्टैंड क्या रहा है?
भारत ने शुरू से ही इस युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है. वह रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को बनाए रखना चाहता है, क्योंकि रूस भारत का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता है और ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग करता है. लेकिन साथ ही, भारत पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है. इस वजह से भारत ने यूएन में कई बार रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर खुद को अलग रखा है. इस बार भी भारत ने कहा कि वह शांति के पक्ष में है, लेकिन प्रस्ताव में कुछ ऐसी भाषा है जो वार्ता को बाधित कर सकती है. भारत का रुख स्वतंत्र और संतुलित है. बहरहाल, भारत शुरू से शांति की अपील करता रहा है. भारत का मानना है कि युद्ध का समाधान युद्धक्षेत्र में नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर होना चाहिए.
इस वोटिंग का क्या मतलब है?
यह दिखाता है कि दुनिया अब भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है. पश्चिमी देश यूक्रेन का खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जबकि रूस के सहयोगी उसके साथ हैं. वोटिंग से दूर रहने वाले देश, जैसे भारत, चीन और ब्राजील, वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व करते हैं और युद्ध को जल्द खत्म करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन बिना किसी पक्ष का साथ दिए. ये देश चाहते हैं कि बातचीत के जरिए और दोनों पक्षों की बात सुनकर ही युद्ध खत्म हो. रूस ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह एकतरफा है और यूक्रेन की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश है.यह युद्ध कब से चल रहा है?
रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत 24 फरवरी 2022 को हुई थी. जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला कर दिया. रूस का दावा था कि वह यूक्रेन में अपने हितों की रक्षा कर रहा है और नाटो (NATO) के विस्तार को रोकना चाहता है. लेकिन यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इसे आक्रमण करार दिया. इससे पहले 2014 में रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र को अपने में मिला लिया था, जो इस संघर्ष की जड़ माना जाता है. चार सालों में इस युद्ध ने हजारों सैनिकों और नागरिकों की जान ली है, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, और यूक्रेन की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है. रूस पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं, लेकिन वह अब भी मजबूती से लड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस मौके पर बयान दिया कि यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, और तुरंत सीजफायर की जरूरत है.
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First Published :
February 25, 2026, 05:52 IST

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