Last Updated:November 29, 2025, 14:56 IST
अनमोल बिश्नोई के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि उनके मुवक्किल को जान का गंभीर खतरा है. इस पर एनआईए ने भी कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की और माना कि कुछ इनपुट्स मिले हैं, जो अनमोल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाते हैं
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. पटियाला हाउस कोर्ट ने अनमोल की NIA रिमांड 7 दिनों के लिए बढ़ा दी है. हालांकि अनमोल पर इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए कोर्ट ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया और पूरी सुनवाई एनआईए हेडक्वार्टर के अंदर ही की गई.
दरअसल अनमोल बिश्नोई के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि उनके मुवक्किल को जान का गंभीर खतरा है. इस पर एनआईए ने भी कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की और माना कि कुछ इनपुट्स मिले हैं, जो अनमोल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाते हैं. दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए स्पेशल जज ने तय किया कि अगली पेशी एनआईए दफ्तर में ही हो, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके.
अनमोल बिश्नोई पर कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आरोप हैं. एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश से लेकर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर हुई फायरिंग तक में अनमोल मुख्य आरोपी है. अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद कोर्ट ने एनआईए को उसकी कस्टडी देते समय कई सुरक्षा शर्तें लगाई थीं. इनमें हर 48 घंटे में मेडिकल जांच, अनमोल को कोर्ट में लाने-ले जाने के पूरे मार्ग की वीडियो रिकॉर्डिंग और मार्ग की जानकारी पहले से कोर्ट के साथ साझा करने जैसी कड़ी व्यवस्थाएं शामिल थीं. इसी के साथ एनआईए को यह भी बताना था कि सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं.
इन सबके बावजूद खतरे की आशंका कम नहीं हुई. लॉरेंस बिश्नोई के गैंग की बम्बिहा गैंग सहित कई गैंग्स से गहरी और पुरानी दुश्मनी है. सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि कोर्ट में पेशी के दौरान विरोधी गैंग हमला करने की कोशिश कर सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं. यही वजह है कि एजेंसी और कोर्ट दोनों ने कोई भी जोखिम न लेते हुए एनआईए दफ्तर को ही अस्थायी अदालत में बदलने का फैसला किया.
इन परिस्थितियों ने अनमोल बिश्नोई को देश के सबसे संवेदनशील और उच्च-जोखिम वाले कैदियों की सूची में ला खड़ा किया है. उसकी सुरक्षा से जुड़ी यह स्थिति बताती है कि आखिर क्यों एजेंसियों को इतना सख्त कदम उठाना पड़ा और क्यों एनआईए दफ्तर को ही अदालत बनाना आवश्यक हो गया.
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New Delhi,Delhi
First Published :
November 29, 2025, 14:56 IST

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