समस्तीपुर में अनोखी पहल, कृषि विश्वविद्यालय की दीवारों पर सजी मिथिला पेंटिंग, जानें खासियत

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Last Updated:March 12, 2026, 15:37 IST

दीवारों पर बनाए जा रहे चित्रों में खेती-किसानी, पशुपालन, हरियाली और ग्रामीण जीवन के विभिन्न दृश्य उकेरे जा रहे हैं. इन चित्रों के माध्यम से कृषि परंपरा और ग्रामीण संस्कृति को दर्शाने की कोशिश की जा रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल परिसर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि यहां आने वाले छात्र-छात्राओं और आगंतुकों को मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू होने का अवसर मिलेगा.

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में स्थित डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एक बार फिर अपनी अनोखी पहल को लेकर चर्चा में है. मिथिलांचल क्षेत्र में स्थित इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों को अब पारंपरिक मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है. दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर जैसे जिलों से मिलकर बना यह इलाका अपनी समृद्ध संस्कृति और कला परंपरा के लिए देश-विदेश में खास पहचान रखता है. ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर को स्थानीय कला और संस्कृति से जोड़ने की पहल की है.

ग्रामीण जीवन के विभिन्न दृश्य
दीवारों पर बनाए जा रहे चित्रों में खेती-किसानी, पशुपालन, हरियाली और ग्रामीण जीवन के विभिन्न दृश्य उकेरे जा रहे हैं. इन चित्रों के माध्यम से कृषि परंपरा और ग्रामीण संस्कृति को दर्शाने की कोशिश की जा रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल परिसर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि यहां आने वाले छात्र-छात्राओं और आगंतुकों को मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू होने का अवसर मिलेगा.

मिथिला की संस्कृति और कृषि को जोड़ने का प्रयास
विश्वविद्यालय के कुलपति Dr. P. S. Pandey ने बताया कि यह संस्थान मिथिलांचल क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यहां की संस्कृति, सभ्यता और ग्रामीण जीवन को सम्मान देना भी विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि मिथिला की कला और परंपरा की पहचान सदियों पुरानी है और इसकी झलक राजा जनक के समय से मिलती रही है. इसी विरासत को सहेजने के उद्देश्य से परिसर की दीवारों पर मधुबनी शैली में चित्र बनवाए जा रहे हैं.

डिजिटल एग्रीकल्चर की झलक
कुलपति ने बताया कि इन चित्रों में पारंपरिक कृषि के साथ-साथ आधुनिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर की झलक भी दिखाई जाएगी. अतीत, वर्तमान और भविष्य तीनों को एक साथ जोड़कर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पारंपरिक कला और आधुनिक कृषि एक-दूसरे के पूरक हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी मदद करेगी.

चित्रों में ग्रामीण जीवन की झलक
मिथिला पेंटिंग बनाने में लगे कलाकारों ने भी अपने अनुभव साझा किए. कलाकार पल्लवी कुमारी ने बताया कि इन चित्रों में मिथिला क्षेत्र की पहचान माने जाने वाले पान, मखाना, खेती-बाड़ी और मछली पालन जैसे विषयों को प्रमुखता से दर्शाया गया है. पारंपरिक खेती की झलक दिखाने के लिए बैलों से हल जोतते किसान का दृश्य भी चित्रों में उकेरा गया है.

कलाकारों ने बतायी खासियत
इसके अलावा नाव पर बैठकर मछली पकड़ते मछुआरे, खेतों में काम करते किसान और कमल के फूल जैसे कई प्रतीकात्मक दृश्य भी चित्रित किए जा रहे हैं. कलाकार दर्शन कुमार और शिवानी कुमारीने बताया कि दीवारों पर बत्तख पालन, मुर्गी पालन और ग्रामीण जीवन से जुड़े कई पहलुओं को भी चित्रों के माध्यम से दिखाया जा रहा है. कलाकारों का कहना है कि देश-विदेश या अन्य राज्यों से आने वाले मेहमान जैसे ही विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करेंगे, उन्हें पहली ही नजर में यह एहसास हो जाएगा कि वे मिथिला की सांस्कृतिक और पावन धरती पर पहुंच चुके हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें

Location :

Samastipur,Bihar

First Published :

March 12, 2026, 15:37 IST

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