Last Updated:December 15, 2025, 07:13 IST
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट के कई मुख्य न्यायाधीशों (CJI) ने रिटायरमेंट से ठीक पहले कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को एक नहीं, बल्कि दो से तीन और कुछ मामलों में छह तक अतिरिक्त वेतनवृद्धि मंजूर कर दी. हालांकि अब उनकी यह बढ़ी हुई सैलरी वापस ले ली गई है.
सुप्रीम कोर्ट के इन सारे कर्मचारियों की बढ़ी हुई सैलरी वापस ले ली गई है.हर नौकरीपेशा इंसान को हर साल अपनी सैलरी बढ़ने की उम्मीद जरूर रहती है. प्राइवेट से लेकर सरकारी तक सभी दफ्तरों में सालाना वेतनवृद्धि एक सामान्य प्रक्रिया होती है. लेकिन क्या हो अगर किसी कर्मचारी की सालभर के अंदर छह-छह बार सैलरी बढ़ जाए. यह सुनकर आप हैरान हुए न… लेकिन सुप्रीम कोर्ट में बीते कुछ वर्षों में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली. यहां कई मुख्य न्यायाधीशों (CJI) ने रिटायरमेंट से ठीक पहले अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को एक नहीं, बल्कि दो से तीन और कुछ मामलों में छह तक अतिरिक्त वेतनवृद्धि मंजूर कर दी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन न्यायाधीशों का कार्यकाल छोटा रहा, उन्होंने भी सालाना इन्क्रीमेंट के अलावा अपने निजी स्टाफ या ‘असाधारण कार्य’ करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त इन्क्रीमेंट दिए. बीते चार वर्षों में ही सुप्रीम कोर्ट के करीब 2,000 कर्मचारियों को कम से कम दो से तीन अतिरिक्त वेतनवृद्धि मिली, जबकि कुछ ‘खास’ कर्मचारियों को छह अतिरिक्त इन्क्रीमेंट तक मिले. इसके चलते कुछ कर्मचारियों का वेतन सामान्य वेतन से करीब 150 प्रतिशत तक पहुंच गया.
इस असमानता और विसंगति को दूर करने के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने सभी जजों की फुल कोर्ट बैठक बुलाई थी. इस बैठक में अधिकांश न्यायाधीशों की राय थी कि न तो सुप्रीम कोर्ट कोई ‘साम्राज्य’ है और न चीफ जस्टिस कोई ‘राजा’… जो अपने विवेक से चुनिंदा लोगों को वेतन लाभ बांटें. लंबी चर्चा के बाद फुल कोर्ट ने फैसला किया कि इस तरह की विवेकाधीन वेतनवृद्धि की प्रथा को तत्काल समाप्त किया जाए.
फुल कोर्ट ने यह भी तय किया कि बीते वर्षों में दी गई अतिरिक्त वेतनवृद्धि को वापस लिया जाएगा और भविष्य में अगर किसी विशेष इन्क्रीमेंट पर विचार होगा तो वह केवल फुल कोर्ट की मंजूरी से ही संभव होगा.
कई कर्मचारियों पर अचानक से इस फैसले का असर पड़ा. जिन कर्मचारियों को अतिरिक्त इन्क्रीमेंट मिले थे, उनकी सैलरी में एक झटके में भारी कटौती हो गई. कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने बढ़ी हुई सैलरी को आधार बनाकर घर या कार लोन ले लिया था, ऐसे में अचानक वेतन घटने से उनका बजट बिगड़ गया. कुछ मामलों में कर्मचारियों की मासिक सैलरी 30 से 40 हजार रुपये तक कम हो गई.
कुछ कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि एक-दो रजिस्ट्रारों ने तत्कालीन सीजेआई को गलत जानकारी दी, जिसके आधार पर इन्क्रीमेंट दिए गए. वहीं, कई कर्मचारियों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट को यह फैसला लेना ही था, तो अतिरिक्त वेतनवृद्धि को भविष्य के सालाना इन्क्रीमेंट में समायोजित किया जा सकता था, ताकि अचानक वेतन कटौती का झटका न लगे.
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, हालांकि इससे जुड़े मानवीय और आर्थिक पहलुओं पर कर्मचारियों के बीच असंतोष भी साफ नजर आ रहा है.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
December 15, 2025, 07:12 IST
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4 weeks ago
