Last Updated:February 24, 2026, 15:15 IST
केरल के कोल्लम से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां प्रमोद जॉनी नाम के शख्स ने सिर्फ जेल का खाना खाने के लिए कलेक्ट्रेट में बम होने की झूठी सूचना दे दी. आरोपी काम करने से नफरत करता है और उसे जेल का खाना बहुत पसंद है. पुलिस ने उसे सबक सिखाने के लिए जेल भेजने के बजाय स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया.

केरल के कोल्लम जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे. यहां एक 44 साल के शख्स ने पुलिस को सिर्फ इसलिए परेशान कर दिया क्योंकि उसे मुफ्त में जेल का खाना खाना था. मय्यानाड के रहने वाले प्रमोद जॉनी को मेहनत करना बिल्कुल पसंद नहीं है. वह अपनी जिंदगी बिना किसी काम-काज के गुजारना चाहता है. उसने सोचा कि तीन वक्त का पेट भर खाना खाने के लिए जेल से अच्छी जगह और कोई नहीं हो सकती. इसी लालच में उसने कोल्लम कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की झूठी धमकी दे डाली. उसने पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करके कहा कि अगले 50 मिनट में ब्लास्ट हो जाएगा. पुलिस ने जब लोकेशन ट्रेस की तो आरोपी अपने घर के बाहर ही उनका इंतजार कर रहा था.
काम से ऐसी नफरत! जेल की रोटियां तोड़ना चाहता है
प्रमोद की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. पुलिस पूछताछ में पता चला कि वह काम करने से इतनी नफरत करता है कि उसने आज तक शादी भी नहीं की. कुछ समय पहले वह एक मामले में 15 दिन जेल में रहा था. वहीं से उसे जेल के खाने और बिना मेहनत वाली लाइफस्टाइल से प्यार हो गया. उसे लगा कि अगर वह जेल चला जाए तो उसे खाने-पीने की टेंशन नहीं रहेगी. वह चाहता था कि उसे रिमांड पर जेल भेज दिया जाए ताकि वह वहां के मीनू का आनंद ले सके. उसने जानबूझकर लूट या मारपीट नहीं की क्योंकि उसमें उसे चोट लगने का डर था. इसलिए उसने बम की धमकी वाला सुरक्षित रास्ता चुना.
पुलिस ने कैसे फेल किया आरोपी का मास्टर प्लान?
जब प्रमोद ने कॉल किया तो पुलिस की टीम तुरंत उसके घर पहुंच गई. वहां वह बड़े आराम से पुलिस का इंतजार कर रहा था ताकि वे उसे गिरफ्तार कर जेल ले जाएं. बम स्क्वाड ने कलेक्ट्रेट की पूरी जांच की लेकिन वहां कुछ नहीं मिला. पुलिस को पहले लगा कि शायद इसके तार किसी टेररिस्ट ग्रुप से जुड़े हैं. लेकिन जब प्रमोद ने असली वजह बताई तो अफसर भी हैरान रह गए. उसने साफ कह दिया कि वह बस जेल का खाना खाना चाहता है. पुलिस ने उसकी मंशा समझते हुए उसे जेल भेजने के बजाय स्टेशन बेल पर छोड़ दिया. इस तरह उसकी मुफ्त की रोटियां तोड़ने की प्लानिंग धरी की धरी रह गई.
क्या समाज में बढ़ रही है ऐसी विचित्र मानसिकता?
पुलिस के मुताबिक प्रमोद को कोई गंभीर बीमारी नहीं है, बस वह काम से बचना चाहता है. उसने अपने खुद के फोन से कॉल किया था ताकि पुलिस को उसे ढूंढने में आसानी हो. पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के बजाय उसे कानूनी तरीके से घर भेज दिया ताकि उसे वह सुख न मिले जिसकी वह तलाश कर रहा था.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें
Location :
Thiruvananthapuram,Kerala
First Published :
February 24, 2026, 15:15 IST

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