Last Updated:January 04, 2026, 19:21 IST
Indian Army Ramjet Artillery Shell Deployment: भारतीय सेना 155mm आर्टिलरी गनों के लिए रामजेट इंजन से लैस शेल तैनात करने जा रही है. IIT मद्रास और आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड की इस स्वदेशी तकनीक से ATAGS और K9 वज्र जैसी गनों की रेंज 30–50% तक बढ़ जाएगी. मतलब लाहौर से लेकर सियालकोट तक अब इसके जद में है.
भारतीय सेना दुनिया की पहली आर्मी बनेगी जो 155mm आर्टिलरी के लिए रामजेट शेल तैनात करेगी. (फाइल फोटो PTI)नई दिल्ली: भारतीय सेना आर्टिलरी के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ने जा रही है, जिसकी गूंज आने वाले दशकों तक सुनाई देगी. 155mm आर्टिलरी गनों के लिए रामजेट इंजन से लैस शेल को ऑपरेशनल तौर पर तैनात करने की तैयारी भारत को दुनिया की पहली ऐसी सेना बना देगी. इसने इस एडवांस तकनीक को आर्टिलरी में उतारा हो. यह सिर्फ हथियारों की रेंज बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि युद्ध की सोच और क्षमता में एक बड़ा बदलाव है.
इस उपलब्धि की सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी रिसर्च और डेवलपमेंट का नतीजा है. IIT मद्रास और आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) के सहयोग से विकसित इस रामजेट आर्टिलरी शेल ने पोखरण में सफल ट्रायल्स पूरे कर लिए हैं. इसका मतलब साफ है भारतीय सेना की ATAGS, K9 वज्र और दूसरी 155mm गनें अब दुश्मन के ठिकानों को पहले से कहीं ज्यादा दूर और ज्यादा असरदार तरीके से निशाना बना सकेंगी.
क्या है रामजेट आर्टिलरी शेल तकनीक?
रामजेट तकनीक अब तक मिसाइलों तक सीमित मानी जाती थी लेकिन इसे आर्टिलरी शेल में फिट करना अपने आप में क्रांतिकारी कदम है. रामजेट एक एयर-ब्रीदिंग इंजन है. इसमें न टरबाइन होता है और न कंप्रेसर. जब गोला आर्टिलरी गन से करीब मैक 2 की रफ्तार से बाहर निकलता है, तब हवा अपने आप इनटेक से अंदर जाकर कंप्रेस हो जाती है. इसके बाद फ्यूल इंजेक्ट होते ही लगातार थ्रस्ट मिलता रहता है.
IIT मद्रास के वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा इसका हाई स्पेसिफिक इंपल्स है. जहां सॉलिड रॉकेट मोटर का ISP करीब 2500 N s/kg होता है, वहीं रामजेट का ISP 4000 N s/kg से ज्यादा है. यानी समान मात्रा के ईंधन में कहीं ज्यादा ताकत और दूरी.
कैसे बढ़ेगी आर्टिलरी गनों की मारक क्षमता?
अब तक 155mm आर्टिलरी गनों की प्रभावी रेंज 40 से 50 किलोमीटर के आसपास मानी जाती थी. रामजेट शेल के आने से यह रेंज 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़कर 60 से 75 किलोमीटर तक जा सकती है. मतलब पाकिस्तान के लाहौर और सियालकोट जैसे शहर रेंज में आ जाएंगे. खास बात यह है कि इसके लिए न तो गोले का वजन बढ़ाया गया है और न ही नई गन डिजाइन करने की जरूरत है.
कुल मिलाकर रामजेट आर्टिलरी शेल भारत की आर्टिलरी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम है. (फाइल फोटो PTI)
क्यों गेम-चेंजर साबित होगा यह शेल?
सीमा पर लड़ाई अब सिर्फ सामने दिख रहे टारगेट तक सीमित नहीं है. दुश्मन के डीप लॉजिस्टिक बेस, कमांड सेंटर और आर्टिलरी पोजिशन को पीछे से तोड़ना आधुनिक युद्ध की जरूरत है. रामजेट शेल से भारतीय सेना को यही बढ़त मिलेगी. वह भी बिना एयरस्ट्राइक किए, जमीन से ही गहराई तक मार करने की क्षमता के साथ.
रामजेट शेल की प्रमुख खूबियां
आर्टिलरी रेंज में 30–50% तक बढ़ोतरी. मौजूदा 155mm शेल्स पर रेट्रोफिट, नई अम्युनिशन की जरूरत नहीं. एयर-ब्रीदिंग इंजन, ऑक्सीडाइजर साथ ले जाने की जरूरत नहीं. हल्का डिजाइन, लेकिन ज्यादा थ्रस्ट. पोखरण में सफल ट्रायल्स, ऑपरेशनल इंडक्शन की तैयारी.भारतीय सेना की किन गनों को मिलेगा सीधा फायदा?
यह तकनीक भारतीय सेना के लगभग पूरे 155mm आर्टिलरी इकोसिस्टम को बदल देगी. खासतौर पर ATAGS और K9 वज्र जैसे सिस्टम्स की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. रामजेट शेल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है. चीन और पाकिस्तान जैसी सीमाओं पर भारत अब दुश्मन की आर्टिलरी से ज्यादा दूर से, ज्यादा सटीक हमला कर सकेगा. इससे काउंटर-बैटरी फायर में बढ़त मिलेगी और दुश्मन को जवाब देने का समय कम होगा.
आगे का रास्ता क्या है?
पोखरण ट्रायल्स के बाद फील्ड ट्रायल्स और यूजर ट्रायल्स. सीमित संख्या में ऑपरेशनल इंडक्शन. बड़े पैमाने पर स्वदेशी प्रोडक्शन. आर्टिलरी डॉक्ट्रिन में बदलाव.भविष्य में एक्सपोर्ट की संभावनाएं
कुल मिलाकर रामजेट आर्टिलरी शेल भारत की आर्टिलरी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम है. यह आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारने का मजबूत उदाहरण है, जहां रिसर्च, सेना और स्वदेशी उद्योग मिलकर भविष्य का युद्ध तैयार कर रहे हैं.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
January 04, 2026, 19:20 IST

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