Last Updated:March 12, 2026, 13:09 IST
Villagers Built School Rajasthan: राजस्थान के नरसाणा गांव ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अनोखी मिसाल पेश की है. गांव के लोगों ने मिलकर योगदान दिया और हर घर से एक ईंट के प्रतीकात्मक सहयोग के साथ करीब साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से भव्य स्कूल भवन तैयार कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण उन्होंने कर दिया है, लेकिन स्कूल का संचालन सरकार ही करेगी. इस पहल ने गांव की एकता और शिक्षा के प्रति जागरूकता को दिखाया है. नरसाणा की यह कहानी अब पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का उदाहरण बनती जा रही है.
जालोर: जालोर जिले के नरसाणा गांव की यह कहानी सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे गांव की एकजुटता और बच्चों के भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है. कभी इसी गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ने के लिए पर्याप्त कमरे तक नहीं मिलते थे. कई कक्षाएं बरामदे में लगती थीं और बैठने की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी. लेकिन आज वही गांव साढ़े चार करोड़ की लागत से बने भव्य स्कूल के कारण चर्चा में है.
स्कूल की एक छात्रा बताती है कि पहले स्कूल में सिर्फ पांच कमरे थे और बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी. कई बार जगह की कमी के कारण पढ़ाई में भी दिक्कत आती थी. हालांकि शिक्षकों की मेहनत हमेशा सराहनीय रही. वे सीमित संसाधनों में भी बच्चों को अच्छे से पढ़ाने की कोशिश करते थे. छात्रा कहती है कि गांव के लोगों ने मिलकर जो नया स्कूल बनाया है, उससे अब पढ़ाई का माहौल और बेहतर होगा और बच्चों को अच्छी सुविधाएं मिल सकेंगी.
गांव में बैठकों का दौर शुरू हुआ
स्कूल समिति के अध्यक्ष जसवंत सिंह बताते हैं कि यह राजस्थान का शायद पहला ऐसा स्कूल है, जिसे पूरे गांव ने मिलकर बनाया है. गांव की 36 कौमों ने इसमें हिस्सा लिया और सभी ने इसे अपने बच्चों के भविष्य से जोड़कर देखा. जब स्कूल की समस्या गंभीर हो गई, तो गांव में बैठकों का दौर शुरू हुआ. सवाल यह था कि इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी और निर्माण कैसे होगा.
इसके बाद गांव के प्रवासी लोगों और पुराने छात्रों से संपर्क किया गया. जैसे ही उन्हें बताया गया कि यह बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा मामला है, लोग आगे आने लगे. जसवंत सिंह बताते हैं कि शिलान्यास के समय ही कई भामाशाह सामने आ गए. किसी ने एक-एक कमरे की जिम्मेदारी ली तो किसी ने हॉल बनाने का संकल्प लिया.
काम रुकने की नौबत ही नहीं आई
एक भामाशाह ने तो स्कूल के सबसे बड़े हॉल के लिए 21 लाख रुपए देने का निर्णय लिया. उन्होंने यहां तक कहा कि पैसों की कमी के कारण काम रुकना नहीं चाहिए और जरूरत पड़ने पर वे हर महीने सहयोग देते रहेंगे. हालांकि गांव वालों के सहयोग से इतनी जल्दी राशि जुट गई कि काम रुकने की नौबत ही नहीं आई.
धीरे-धीरे भामाशाहों की संख्या बढ़ती गई और देखते ही देखते स्कूल के 19 कमरे तैयार हो गए. आज नरसाणा गांव का यह स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पूरे गांव की एकजुटता, विश्वास और शिक्षा के प्रति समर्पण की पहचान बन गया.
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Location :
Jalor,Rajasthan
First Published :
March 12, 2026, 13:09 IST

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